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सोमवार, 23 नवंबर 2015

सबूत का भार सुब्रमणियम स्वामी पर


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भारतीय राजनीति में ऐसे लोग कम नहीं जिनकी राजनीतिक रोटियां केवल और केवल गांधी परिवार की बुराई के चूल्हे पर ही सिंकती हैं और केवल इस परिवार की बुराई करकर ही वे स्वयं को बहुत बड़ा देशभक्त साबित करते हैं और इन्हीं नेताओं में से सर्वप्रमुख नेता हैं ''माननीय सुब्रमणियम स्वामी'' अभी हाल ही में वे एक बहुत बड़ा मुद्दा [केवल उनकी नज़रों में ] लेकर आये हैं और वह है राहुल गांधी के ब्रिटिश नागरिक होने का मुद्दा ,वे कहते हैं कि -
''राहुल ब्रिटिश नागरिक हैं ''

Rahul Gandhi is a British citizen, Subramanian Swamy says;

NEW DELHI: BJP leader Subramanian Swamy on Monday alleged that Congress vice-president Rahul Gandhi has claimed himself to be a British national before the authorities there and has demanded that he be stripped of Indian citizenship and Lok Sabha membership.
और अब वे कह रहे हैं कि ''राहुल साबित करें , वह ब्रिटिश नागरिक नहीं ''और अपने इस दावे के समर्थन में वे ब्रिटिश सरकार की आधिकारिक वेबसाइट से उपलब्ध दस्तावेज का हवाला देते हुए कहते हैं कि राहुल भारत के नहीं बल्कि ब्रिटिश के नागरिक हैं और अब राहुल साबित करें कि ये कागजात फर्जी हैं .
जहाँ तक हम जानते हैं सुब्रमणियम स्वामी एक जाने माने विधिवेत्ता हैं विकिपीडिया भी कहता है -
''डॉ॰ सुब्रह्मण्यम् स्वामी (जन्म: 15 सितम्बर 1939 चेन्नई, तमिलनाडु, भारत) जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। वे सांसद के अतिरिक्त 1990-91 में वाणिज्य, विधि एवं न्याय मन्त्री और बाद में अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार आयोग के अध्यक्ष भी रहे''
और ऐसे में वे स्वयं जानते हैं कि यहाँ ये साबित करने का भार किस पर है चलिए अगर वे अपने इस भार से बचना चाहते हैं तो हम उन्हें बता दें कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा १०२ और १०३ उन्हें इससे बचने नहीं देंगी क्योंकि ये कहती हैं -
धारा १०२ -किसी वाद या कार्यवाही में सबूत का भार उस व्यक्ति पर होता है जो असफल हो जायेगा ,यदि दोनों में से किसी भी ओर से कोई भी साक्ष्य न दिया जाये .
और धारा १०३ उस विशिष्ट तथ्य के बारे में सबूत के भार के बारे में कहती है जो सुब्रमणियम स्वामी जी यहाँ लाये हैं -
धारा १०३ - किसी विशिष्ट तथ्य के सबूत का भार उस व्यक्ति पर होता है जो न्यायालय से यह चाहता है कि वह उसके अस्तित्व में विश्वास करे ,जब तक कि किसी विधि द्वारा यह उपबंधित न हो कि उस तथ्य के सबूत का भार किसी विशिष्ट व्यक्ति पर होगा .
और इस तरह यहाँ इस तथ्य को साबित करने का भार पूरी तरह से सुब्रमणियम स्वामी पर है क्योंकि वे मात्र अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं कर रहे .मात्र वहां की आधिकारिक वेबसाइट पर से उपलब्ध दस्तावेज के जरिये वे अपने अनर्गल प्रलाप को पुख्ता सबूत के रूप में प्रस्तुत नहीं कर सकते क्योंकि वेबसाइट कितना सही बोलती हैं यह अभी हाल में ही गूगल ने दिखा दिया जब प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में जवाहर लाल नेहरू के स्थान पर नरेंद्र मोदी को दिखाया गया .इसलिए अब सुब्रमणियम स्वामी पुख्ता सबूत पेश कर साबित करें कि राहुल ब्रिटिश नागरिक हैं तब आगे बात करें .
शालिनी कौशिक

बुधवार, 18 नवंबर 2015

तेजाबी हमले :सरकार सही रास्ते पर आये


एक रुसी युवती पर तेजाबी हमला और वह भी प्रधानमंत्री जी के लोकसभा कार्यक्षेत्र में बहुत ही दुखद विषय है। समाचारों के अनुसार स्थिति ये है -
The 23-year-old Russian woman who was attacked with acid in Varanasi and was undergoing treatment has been flown to Moscow with Indian government assuring her that all medical expenses will be borne by it. 
और उससे भी दुखद ये कि देश की विदेश मंत्री इस सम्बन्ध में अपने कर्तव्य का निर्वहन अपनी सरकार की ही कार्यप्रणाली के अनुसार कर रही हैं अर्थात सोशल मीडिया पर और इसके लिए वे ट्विटर का लगातार इस्तेमाल कर रही हैं -
External Affairs Minister Sushma Swaraj has sought a report from the Uttar Pradesh government about the attack on Russian national and tweeted about her leaving for Russia today. 
Here's what Swaraj tweeted: 


Acid attack on Russian girl - A senior officer of MEA met the victim in hospital today. He also spoke to the Doctors attending on her.


इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार 
the Indian Express reported that doctors in New Delhi were trying to salvage the left eye of victim. 
"Her face and eyes are badly burnt. We have stabilised her and completed initial tests. Now our priority will be to prevent any infection. We will also try to see how far her vision can be restored, particularly in the left eye, which is the less severely burnt of the two," a senior doctor in the burns department told The Indian Express.

 कानून क्या कहता है -अभी हाल ही में हुए दंड विधि [ संशोधन] अधिनियम ,२०१३ में तेजाब सम्बंधित मामलों के लिए धारा ३२६ -क व् धारा ३२६-ख  अन्तः स्थापित की गयी हैं जिसमे धारा ३२६-क '' स्वेच्छ्या तेजाब ,इत्यादि के प्रयोग से घोर उपहति कारित करना  ''को ही अपने घेरे में लेती है जिसमे कारावास ,जो दस वर्ष से कम नहीं किन्तु जो आजीवन कारावास तक हो सकेगा और ज़ुर्माना जिसका भुगतान पीड़िता को किया जायेगा ......और धारा ३२६ -ख स्वेच्छ्या तेजाब फेंकने या फेंकने के प्रयत्न को ही अपने घेरे में लेती है जिसमे ५ वर्ष का कारावास ,किन्तु जो सात वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माने का दंड मिलेगा .

 रुसी युवती  पर तेजाबी हमले की ये घटना १३ नवम्बर को हुई और अब अगर हम देखें तो इतने दिन में कोई भी  सही कदम इस दिशा में नहीं उठाया गया। ये कोई पहली घटना तेजाबी हमले की नहीं है तेजाबी हमले होते रहे हैं और सरकार के तेजाब की बिक्री पर प्रतिबन्ध के बावजूद ये हमले रूक नहीं रहे हैं और कानून में जो संशोधन किये भी गए हैं वे नाकाफी हैं क्योंकि इनमे सजा बहुत कम रखी जाती है। तेजाब की बिक्री पर  बंदिशें हैं उससे कहीं बढ़कर इस तरह के हमलों में सजा में वृद्धि जरूरी है और ये सजा फांसी से कम नहीं होनी चाहिए क्योंकि ये हमले पीड़ित की ज़िंदगी को तहस-नहस कर देते हैं और रही सरकार के रवैये की बात तो वह तो किसी भी तरह से सुधरने वाला नहीं क्योंकि अच्छे दिन लाने का वादा करने वाली ये सरकार सोशल मीडिया में अपने फॉलोवर ही बढ़ाने में लगी है भले ही कितने बलात्कार हो जाओ या तेजाबी हमले इसकी सेहत पर कोई असर पड़ने वाला नहीं है ये तो इसके लिए फॉलोवर बढ़ाने के मौके हैं इसे ही तो कहते हैं ''बिल्ली के भाग से छींका फूटा ''
शालिनी कौशिक 
   [कानूनी ज्ञान ]