ST का दर्जा.... सबूत जरूरी-इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी दूसरे धर्म में धर्म परिवर्तन करने से ही किसी व्यक्ति का 'अनुसूचित जनजाति' (ST) का दर्जा अपने आप खत्म नहीं हो जाता..... कोई व्यक्ति ST का सदस्य बना रहता है या नहीं, यह तथ्यों पर निर्भर करता है। इसका फैसला आदिवासी पहचान की ज़रूरी विशेषताओं की जांच करके किया जाएगा, जिसमें पारंपरिक रीति-रिवाज, सामाजिक संगठन, सामुदायिक जीवन और संबंधित आदिवासी समुदाय द्वारा स्वीकार्यता शामिल है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में अपने एक महत्वपूर्ण Nanhki @ Naimunnisha vs. State of U.P. and 3 others मामले के निर्णय में स्पष्ट किया है कि केवल धर्म परिवर्तन या अंतर-धार्मिक विवाह से किसी व्यक्ति का अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा स्वतः समाप्त नहीं होता है। साक्ष्यों की आवश्यकता: यदि किसी व्यक्ति के जनजातीय दर्जे पर विवाद होता है, तो यह जांच की जाएगी कि क्या वह व्यक्ति अभी भी उस जनजाति की संस्कृति, रीति-रिवाजों और समुदाय से जुड़ा हुआ है या नहीं. भूमि हस्तांतरण मामला: इस मामले में याची ने मुस्लिम व्यक्ति से विवाह और पहचान अपनाने के बाद कृषि भूमि की खरीद से जुड़े...