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राहुल गांधी पर इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

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 इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता वाली याचिका को खारिज किया   ◆ याचिकाकर्ता राहुल गांधी के पास ब्रिटेन की नागरिकता होने का आरोप लगा रहे थे ◆ कोर्ट ने कहा- आरोप साबित करने के लिए एक भी दस्तावेज पेश नहीं किया गया  ◆ राहुल गांधी के खुद को ब्रिटिश नागरिक घोषित करने का भी कोई सबूत नहीं मिला द्वारा  शालिनी कौशिक  एडवोकेट  कैराना (शामली) 

सुप्रीम कोर्ट ने मनन मिश्रा को दे दिया अल्टीमेटम

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  सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा से कहा कि  " आप लोकतांत्रिक रूप से चुने गए पदाधिकारी नहीं हैं, बल्कि केवल एक प्रो-टेम (अस्थाई) चेयरमैन हैं."  इसी के साथ शीर्ष अदालत ने कहा कि  राज्य बार काउंसिलों का गठन जल्द पूरा होने से BCI के नए पदाधिकारियों का चुनाव भी कराया जा सकेगा और मनन मिश्रा के कार्यकाल से जुड़े उठाए गए ज्यादातर सवालों का समाधान हो सकता है। ➡️ मुख्य बातें और निर्देश ✒️ दैनिक कामकाज: अदालत ने स्पष्ट किया कि  प्रो-टेम चेयरमैन होने के नाते मनन मिश्रा केवल बीसीआई (BCI) के दिन-प्रतिदिन के कामकाज को ही संभाल सकते हैं। ✒️ नीतिगत फैसले: कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि  बड़े और महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले लेते समय भारत के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को शामिल किया जाएगा। ✒️ चुनाव प्रक्रिया: सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बार काउंसिलों के गठन और नए पदाधिकारियों के चुनाव के लिए 5 सप्ताह की सख्त समयसीमा तय की है, ताकि जल्द से जल्द नए बीसीआई (BCI) पदाधिकारियों का चुनाव हो सके। कोर्ट ने कहा कि  राज्य बार काउंसिलों का गठन जल्द ...

जन्तर मन्तर के छात्रों से मुक़दमे वापस-सुप्रीम कोर्ट

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   सुप्रीम कोर्ट ने नीट परीक्षा और अन्य मुद्दों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर व देश के अन्य हिस्सों में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर (FIR) को रद्द कर दिया है। ➡️ सुप्रीम कोर्ट का फैसला और मुख्य बातें ⚫ अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल:  सर्वोच्च न्यायालय ने अपने विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मामलों को समाप्त करने का आदेश दिया। ⚫ गंभीर अपराधों पर लागू नहीं:  यह राहत केवल मामूली प्रदर्शन मामलों के लिए है; हत्या या गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि व हिंसा में लिप्त आरोपियों को इससे छूट नहीं मिली है। ⚫ मार्च रद्द :  इस फैसले के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को प्रस्तावित अपना विरोध मार्च रद्द कर दिया है। ⚫ सरकार का आश्वासन:  केंद्र सरकार ने पहले ही अदालत को सूचित किया था कि प्रदर्शनकारियों के पुराने केस वापस लिए जाएंगे और भविष्य में कोई नया मुकदमा दर्ज नहीं होगा। द्वारा शालिनी कौशिक एडवोकेट कैराना (शामली) 

भगवान राम और उनकी माता पर आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में ओवैसी पर कार्यवाही रद्द नहीं

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  बॉम्बे हाईकोर्ट ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) नेता अकबरुद्दीन ओवैसी के खिलाफ भगवान राम और उनकी माता के बारे में कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के लिए शुरू की गई कार्यवाही रद्द करने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि 'संवैधानिक सहिष्णुता' को किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं का जानबूझकर अपमान करने की छूट नहीं माना जा सकता.  Case Title: Akbaruddin Sultan Salahuddin Owaisi vs State of Maharashtra (Criminal Application 1920 of 2022) द्वारा  शालिनी कौशिक  एडवोकेट  कैराना (शामली) 

प्रतिबंधित जनसेवक एडवोकेट

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 दिनांक 30 अगस्त 2026 की अमर उजाला मीडिया रिपोर्ट के अनुसार देश की राजधानी नई दिल्ली में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के 13वें दीक्षांत समारोह के दौरान सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ जज वीवी नागरत्ना ने एक बड़ा और गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि  " हमारी अदालतें मुकदमों के अंबार, लगातार होती देरी और वकीलों की भारी-भरकम फीस से कराह रही हैं। ऐसे में अब समय आ गया है कि देश का वकीलों का समुदाय (बार) अपने रवैये में सुधार करे, अपने कामकाज पर विचार करे और एक सुर में न्याय व्यवस्था को संभालने के लिए आगे आए।"  वकीलों से अपील करते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि " वे अपनी सोच बदलें। वकालत को सिर्फ पैसा कमाने का जरिया बनाने के बजाय इसे जनता की सेवा के रूप में देखें। अगर वकील ऐसा नहीं करेंगे, तो आने वाले समय में आम जनता के बीच उनकी अहमियत खत्म हो जाएगी। उन्होंने वकीलों को लोकतंत्र का 'सेफ्टी वाल्व' बताया। उनका कहना था कि वकीलों को मिली आजादी किसी व्यक्तिगत फायदे के लिए नहीं है, बल्कि इसलिए है ताकि वे बिना किसी सरकार, बाजार या ग्राहक के दबाव के सच के लिए खड़े हो सकें।" इस प्रकार सुप्...

बार एसोसिएशन की वित्तीय अनियमितता है बार फंड का ये उपयोग

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  चुनी हुई कार्यकारिणी बार एसोसिएशन द्वारा समाचार पत्र में बार फंड (Bar Fund) का उपयोग करते हुए शुभकामना संदेश प्रकाशित कराना कानूनी और नैतिक रूप से सही नहीं माना जाता है और यह वित्तीय अनियमितता के दायरे में आ सकता है। ➡️ इस विषय को कानूनी, नैतिक और बार काउंसिल के नियमों के दृष्टिकोण से निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है: 1️⃣ बार फंड का वैधानिक उद्देश्य (Purpose of Bar Fund) बार एसोसिएशन का फंड मुख्य रूप से वकीलों के कल्याण, बार लाइब्रेरी के रखरखाव, कानूनी सहायता, चैंबर सुविधाओं और एसोसिएशन के प्रशासनिक कार्यों के लिए होता है। समाचार पत्र में व्यक्तिगत या कार्यकारिणी के नाम से शुभकामना संदेश (जैसे त्योहारों या जीत की बधाई) छपवाना एसोसिएशन का कोई आवश्यक या वैधानिक कार्य नहीं है। 2️⃣ . बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के विज्ञापन संबंधी नियम-नियम 36 (Rule 36):  बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों (Bar Council of India Rules) के भाग VI, अध्याय II के नियम 36 के तहत भारत में वकीलों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से विज्ञापन करने या काम मांगने की सख्त मनाही है।यद्यपि शुभकामना सं...

स्कूलों में हिजाब की अनुमति नहीं-इलाहाबाद हाई कोर्ट

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  इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्कूलों में तयशुदा यूनिफॉर्म के साथ हिजाब या सिर पर स्कार्फ पहनने की अनुमति देने से इंकार करते हुए एक मुस्लिम छात्रा की याचिका को खारिज कर दिया है। ➡️ पक्षकार (Parties involved) ⚫ याचिकाकर्ता (Student):  सुकैना रिजवी (प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल की 11वीं कक्षा की नाबालिग छात्रा, जो अपनी मां के माध्यम से पेश हुई)। ⚫ प्रतिवादी (Respondent):  टैगोर पब्लिक स्कूल, अत्तारसुइया, प्रयागराज (स्कूल प्रबंधन) और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी। ➡️ न्यायालय पीठ (Bench):  न्यायमूर्ति जे. जे. मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ। ➡️ निर्णय की मुख्य बातें और कोर्ट की टिप्पणियां: ⚫ अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं:  अदालत ने स्पष्ट किया कि हिजाब या हेडस्कार्फ पहनना इस्लाम धर्म का कोई अनिवार्य या आवश्यक धार्मिक हिस्सा (Essential Religious Practice) नहीं है, जिसके बिना किसी व्यक्ति की आस्था खतरे में पड़ जाए। ⚫ यूनिफॉर्म की अनिवार्यता:  कोर्ट ने कहा कि स्कूल में एक समान ड्रेस कोड (यूनिफॉर्म) लागू करने का उद्देश्य अनुशासन बनाए रखना, बच्चों के बीच समान...