संपत्ति की कुर्की से पूर्व नोटिस देना जरूरी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि 'बीएनएसएस की धारा 106 के तहत पुलिस द्वारा संपत्ति कुर्क करने के लिए संबंधित व्यक्ति को पहले से कोई नोटिस देना ज़रूरी नहीं है। कोर्ट ने धारा 106 औरं धारा 107 के बीच अंतर स्पष्ट किया। धारा 107 में विशेष रूप से यह प्रावधान है कि मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति को नोटिस जारी करेगा, जिसकी संपत्ति बीएनएसएस की धारा 107 के तहत कुर्क की जानी है। बीएनएसएस की धारा 106 पुलिस को ऐसी किसी भी संपत्ति को ज़ब्त करने का अधिकार देती है, जिसके बारे में यह आरोप हो या संदेह हो कि वह चोरी की है, या जो ऐसी परिस्थितियों में पाई गई हो, जिनसे किसी अपराध के होने का संदेह पैदा होता हो। धारा 107 भी संपत्ति कुर्क करने की बात करती है, जिसके तहत पुलिस संपत्ति कुर्क करने के लिए पुलिस अधीक्षक या पुलिस आयुक्त से पहले अनुमति लेने के बाद अपने अधिकार क्षेत्र वाले मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रार्थना पत्र देती है। मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस जारी करने और उसे अपनी बात रखने का उचित अवसर देने के बाद, जिसकी संपत्ति कुर्क की जानी है, कुर्की के संबंध में आदेश कर सकता है।...