सदस्यता के नाम पर बार वकील को प्रेक्टिस से नहीं रोक सकती-तेलंगाना हाईकोर्ट
तेलंगाना हाईकोर्ट (Telangana High Court) के ऐतिहासिक फैसले के अनुसार, बार एसोसिएशन की सदस्यता पूरी तरह से स्वैच्छिक है। यदि कोई वकील किसी बार एसोसिएशन का सदस्य नहीं है, तो भी उसे अदालत में वकालत (practice) करने से नहीं रोका जा सकता। बार एसोसिएशन वकीलों के काम करने के अधिकार पर कोई नियंत्रण नहीं रख सकते。 ➡️ इस केस से जुड़ी मुख्य बातें: ⚫ याचिकाकर्ता (Petitioner): विजय गोपाल (Vijay Gopal), जो स्वयं एक एडवोकेट (Party-in-Person) थे。 ⚫ प्रतिवादी (Respondents): बार काउंसिल ऑफ इंडिया (Bar Council of India - Respondent No. 1)。 बार काउंसिल ऑफ स्टेट ऑफ तेलंगाना (Bar Council of Telangana - Respondent No. 2)。 ➡️ निर्णय के मुख्य बिंदु: इस मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सर्टिफिकेट एंड प्लेस ऑफ प्रैक्टिस (वेरिफिकेशन) रूल्स, 2015 के नियम 6 (Rule 6) को सीमित करते हुए तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा कि वकीलों के लिए बार एसोसिएशन की सदस्यता अनिवार्य नहीं की जा सकती और सदस्यता न होने पर किसी वकील को कानून की प्रैक्टिस करने से रोका या अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। बार काउंसिल ऑफ इंडिया स...