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ST का दर्जा.... सबूत जरूरी-इलाहाबाद हाईकोर्ट

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  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि  किसी दूसरे धर्म में धर्म परिवर्तन करने से ही किसी व्यक्ति का 'अनुसूचित जनजाति' (ST) का दर्जा अपने आप खत्म नहीं हो जाता..... कोई व्यक्ति ST का सदस्य बना रहता है या नहीं, यह तथ्यों पर निर्भर करता है। इसका फैसला आदिवासी पहचान की ज़रूरी विशेषताओं की जांच करके किया जाएगा, जिसमें पारंपरिक रीति-रिवाज, सामाजिक संगठन, सामुदायिक जीवन और संबंधित आदिवासी समुदाय द्वारा स्वीकार्यता शामिल है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में अपने एक महत्वपूर्ण Nanhki @ Naimunnisha vs. State of U.P. and 3 others मामले के निर्णय में स्पष्ट किया है कि केवल धर्म परिवर्तन या अंतर-धार्मिक विवाह से किसी व्यक्ति का अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा स्वतः समाप्त नहीं होता है।  साक्ष्यों की आवश्यकता:  यदि किसी व्यक्ति के जनजातीय दर्जे पर विवाद होता है, तो यह जांच की जाएगी कि क्या वह व्यक्ति अभी भी उस जनजाति की संस्कृति, रीति-रिवाजों और समुदाय से जुड़ा हुआ है या नहीं. भूमि हस्तांतरण मामला: इस मामले में याची ने मुस्लिम व्यक्ति से विवाह और पहचान अपनाने के बाद कृषि भूमि की खरीद से जुड़े...

बार एसोसिएशन की सदस्यता रिट क्षेत्राधिकार नहीं - इलाहाबाद हाई कोर्ट

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि बार एसोसिएशन (Bar Association) की सदस्यता, निलंबन या किसी सदस्य को संगठन से बाहर करने से जुड़े विवाद मूल रूप से निजी प्रकृति के होते हैं और ऐसे मामलों में संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका पोषणीय (maintainable) नहीं है।  ⚫ मुख्य पक्षकार (Parties)याचिकाकर्ता (Petitioner):  लाल बिहारी वर्मा (Lal Bihari Verma)  ⚫ प्रतिवादी (Respondents):  उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य, सेंट्रल बार एसोसिएशन (तहसील गोला गोकर्णनाथ, जिला लखीमपुर खीरी)  ⚫ पीठ (Bench):  न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ (Justice Shekhar B. Saraf) और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी (Justice Abdhesh Kumar Chaudhary) की खंडपीठ  ➡️ निर्णय की मुख्य बातें और निष्कर्ष ⚫ रिट याचिका खारिज:  अदालत ने याचिकाकर्ता द्वारा सेंट्रल बार एसोसिएशन के उस आदेश (प्रेस विज्ञप्ति दिनांक 12 जून 2026) को चुनौती देने वाली रिट याचिका को खारिज कर दिया, जिसके तहत उन्हें एक साल के लिए बार एसोसिएशन की सदस्यता से वंचित (debar) कर दिया गया था।  ⚫ निजी प्रकृति का ...

फैमिली पेंशन कोई सरकारी खैरात या कृपा नहीं-सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने Maya Banerjee v. Union of India & Ors. मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि फैमिली पेंशन कोई सरकारी खैरात या कृपा नहीं, बल्कि एक मूल्यवान कानूनी अधिकार और संपत्ति है।  ⚫ मुख्य पक्षकार (Case Parties)अपीलकर्ता (Petitioner/Widow): माया बनर्जी (Maya Banerjee), जो एक दिवंगत रेलवे कर्मचारी की विधवा हैं।  ⚫ प्रतिवादी (Respondents):  यूनियन ऑफ़ इंडिया एवं अन्य (रेलवे प्रशासन)।  ➡️ मामले से जुड़ी मुख्य डिटेल्स और कोर्ट का निर्णय ⚫ पति की मृत्यु की तिथि:  12 नवंबर 2000।  ⚫ अधिकार की तिथि:  सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि विधवा को फैमिली पेंशन सीमित अवधि के बजाय उसके पति की मृत्यु की वास्तविक तिथि (12 नवंबर 2000) से दी जानी चाहिए।  ⚫ बकाया और ब्याज:  कोर्ट ने आदेश दिया कि पूरे बकाए का भुगतान 6% वार्षिक ब्याज के साथ अगले तीन महीनों के भीतर किया जाए।  ⚫ देरी पर टिप्पणी:  अदालत ने कहा कि यदि पेंशन मिलने में देरी के लिए विधवा किसी भी प्रकार से जिम्मेदार नहीं है, तो केवल अदालतों या ट्रिब्यूनल में याचिका दायर ...

एसपी और थानाध्यक्ष (SHO) 'झूठों का झुंड'-इलाहाबाद हाईकोर्ट

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  इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के गौरी बाजार थाने में चार लोगों को अवैध हिरासत में रखने के मामले में एसपी और थानाध्यक्ष (SHO) को 'झूठों का झुंड' कहा है। ➡️ केस की मुख्य बातें: ⚫ घटना : 13 से 24 अप्रैल, 2026 के बीच चार लोगों (अर्चना गौड़, नंदिनी गौड़, इन्नी और महेंद्र गौड़) को गौरी बाजार थाने में अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया था।  ⚫ याचिका : यह मामला महेंद्र गौड़ की बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका के जरिए हाई कोर्ट पहुंचा था। ⚫ सीसीटीवी फुटेज गायब: सुनवाई के दौरान जब कोर्ट ने थाने के सीसीटीवी फुटेज मांगे, तो पुलिस ने दलील दी कि बिजली न होने और जनरेटर खराब होने के कारण रिकॉर्डिंग नहीं हो सकी।  ⚫ कोर्ट की कड़ी टिप्पणी: इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ (न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत) ने पुलिस की इस सफाई को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जो थानेदार जनरल डायरी (GD) की सही एंट्री या सीसीटीवी का बैकअप नहीं रख सकता, उसे नौकरी में रहने का अधिकार नहीं है। जब एसपी ने माफी मांगनी चाही, तो कोर्ट ने कहा कि माफी अदालत से नहीं बल्क...

100 साल पुरानी शाही मस्जिद का एक हिस्सा सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाने की अनुमति-मध्य प्रदेश हाई कोर्ट

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  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उज्जैन में महाकाल मंदिर के पास स्थित शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाकर सड़क चौड़ी करने के नगर निगम के फैसले को चुनौती देने वाली दो याचिकाएं खारिज कर दी । कोर्ट ने कहा कि  नगर निगम ने संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन करते हुए और मस्जिद का प्रबंधन करने वाले लोगों को सुनवाई का पर्याप्त अवसर देने के बाद कार्रवाई की। जस्टिस संदीप एन. भट्ट की पीठ ने कहा कि प्रस्तावित कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 300-ए का उल्लंघन नहीं करती। कोर्ट ने 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ, करोड़ों श्रद्धालुओं की संभावित आवाजाही, यातायात व्यवस्था और मस्जिद की स्थिति को भी ध्यान में रखा।..... शाही मस्जिद महाकालेश्वर मंदिर के लगभग सामने और क्षिप्रा नदी के बेहद करीब स्थित है। सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और यातायात प्रबंधन के लिए सड़क चौड़ीकरण जरूरी है। पीठ ने कहा कि बड़े जनहित और सार्वजनिक सुरक्षा को देखते हुए नगर निगम की कार्रवाई कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के बाद की गई। मध्य प्रदेश हाईको...

सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण

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अनुकम्पा नियुक्ति सदैव स्थायी-इलाहाबाद हाईकोर्ट

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  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि मृतक आश्रित कोटे (अनुकम्पा नियुक्ति) के तहत मिलने वाली सरकारी नौकरी हमेशा स्थायी और नियमित प्रकृति की होती है।  विभाग द्वारा नियुक्ति पत्र (Joining Letter) में 'पूर्णतः अस्थायी सेवा' (Temporary) की शर्त जोड़ना पूरी तरह गैरकानूनी और स्थापित विधिक सिद्धांतों के विपरीत है।  ➡️ इस व्यवस्था की पूरी केस डिटेल्स और कानूनी स्थिति निम्नलिखित है: ⚖️ केस डिटेल्स (Case Details) ⚫ केस का नाम: सपना सारस्वत बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य ⚫ सुनवाई करने वाली अदालत: इलाहाबाद हाईकोर्ट (माननीय न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकलपीठ) ⚫ फैसले की तिथि: सितंबर 2026   ⚫ मामले की पृष्ठभूमि:  आगरा की रहने वाली सपना सारस्वत ने अपने पिता (जो कि एक सरकारी कर्मचारी थे) की सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने के बाद मृतक आश्रित कोटे के तहत नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद विभाग ने उन्हें 27 अगस्त 2026 को नियुक्ति पत्र जारी किया।  ⚫ मुख्य विवाद :नियुक्ति पत्र की शर्त संख्या-1 में विभाग ने यह लिख दि...