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अनुकम्पा नियुक्ति सदैव स्थायी-इलाहाबाद हाईकोर्ट

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  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि मृतक आश्रित कोटे (अनुकम्पा नियुक्ति) के तहत मिलने वाली सरकारी नौकरी हमेशा स्थायी और नियमित प्रकृति की होती है।  विभाग द्वारा नियुक्ति पत्र (Joining Letter) में 'पूर्णतः अस्थायी सेवा' (Temporary) की शर्त जोड़ना पूरी तरह गैरकानूनी और स्थापित विधिक सिद्धांतों के विपरीत है।  ➡️ इस व्यवस्था की पूरी केस डिटेल्स और कानूनी स्थिति निम्नलिखित है: ⚖️ केस डिटेल्स (Case Details) ⚫ केस का नाम: सपना सारस्वत बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य ⚫ सुनवाई करने वाली अदालत: इलाहाबाद हाईकोर्ट (माननीय न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकलपीठ) ⚫ फैसले की तिथि: सितंबर 2026   ⚫ मामले की पृष्ठभूमि:  आगरा की रहने वाली सपना सारस्वत ने अपने पिता (जो कि एक सरकारी कर्मचारी थे) की सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने के बाद मृतक आश्रित कोटे के तहत नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद विभाग ने उन्हें 27 अगस्त 2026 को नियुक्ति पत्र जारी किया।  ⚫ मुख्य विवाद :नियुक्ति पत्र की शर्त संख्या-1 में विभाग ने यह लिख दि...

उपाध्याय समाज पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर भी रामभद्राचार्य पर FIR नहीं-इलाहाबाद हाई कोर्ट

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  जगद्गुरु रामभद्राचार्य द्वारा उपाध्याय, चौबे, पाठक और दीक्षित जैसी ब्राह्मण उपजातियों/समुदायों के संदर्भ में 'नीच' या 'अधम' जैसे शब्दों का उपयोग करने, साथ ही चारों शंकराचार्यों के खिलाफ भी आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोप पर याचिकाकर्ता रमेश उपाध्याय एडवोकेट द्वारा FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है।  ➡️  विवाद और कानूनी केस की मुख्य बातें : ⚫ . विवाद का मुख्य कारण (विवादित बयान) सोशल मीडिया और यूट्यूब पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य का एक बयान/वीडियो प्रसारित हुआ था। याचिकाकर्ता के अनुसार, इस वीडियो में उन्होंने उपाध्याय, चौबे, पाठक और दीक्षित जैसी ब्राह्मण उपजातियों/समुदायों के संदर्भ में 'नीच' या 'अधम' जैसे शब्दों का उपयोग किया था। इसके साथ ही उन पर चारों शंकराचार्यों के खिलाफ भी आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगा। इन बयानों से उपाध्याय समुदाय के लोगों की भावनाएं आहत हुईं और उन्होंने इसे समाज का अपमान माना। ⚫ . रामभद्राचार्य का स्पष्टीकरण विवाद बढ़ने पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने वृंदावन में इस पर अपना स्पष्टीकरण दिया। उन...

गैर कानूनी है न्यायालय परिसर में बार एसोसिएशन कार्यकारिणी सदस्यों का नाम फोटो सहित बैनर

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  न्यायालय परिसर में बार एसोसिएशन के कार्यकारिणी सदस्यों का नाम और फोटो सहित बड़े-बड़े बैनर या फ्लेक्स लगाना कानूनी रूप से प्रतिबंधित और नियमों के खिलाफ है। भारतीय विधिज्ञ परिषद (Bar Council of India) के नियम और विभिन्न उच्च न्यायालयों (जैसे इलाहाबाद हाईकोर्ट) के आदेशों के अनुसार,  कोर्ट परिसर की गरिमा, सुरक्षा और वकीलों के पेशेवर आचरण को बनाए रखने के लिए ऐसे किसी भी प्रकार के प्रचार या प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक है। इस विषय पर कानूनी प्रावधान और न्यायालयों के रुख को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है: 1. बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियम (विज्ञापनों पर रोक)नियम 36 (अध्याय II, भाग VI):  इस नियम के तहत वकीलों द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी प्रकार के विज्ञापन या प्रचार (Soliciting/Advertising) पर पूर्ण प्रतिबंध है। ⚫ सीमित बोर्ड का आकार:  वकीलों को केवल अपने चेंबर या कार्यालय के बाहर एक सामान्य आकार का नेमप्लेट लगाने की अनुमति है। ⚫ पद का प्रचार वर्जित:  BCI के नियमों के अनुसार, कोई भी अधिवक्ता अपने लेटरहेड, साइन-बोर्ड या स्टेशनरी पर यह...

राहुल गांधी पर इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

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 इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता वाली याचिका को खारिज किया   ◆ याचिकाकर्ता राहुल गांधी के पास ब्रिटेन की नागरिकता होने का आरोप लगा रहे थे ◆ कोर्ट ने कहा- आरोप साबित करने के लिए एक भी दस्तावेज पेश नहीं किया गया  ◆ राहुल गांधी के खुद को ब्रिटिश नागरिक घोषित करने का भी कोई सबूत नहीं मिला द्वारा  शालिनी कौशिक  एडवोकेट  कैराना (शामली) 

सुप्रीम कोर्ट ने मनन मिश्रा को दे दिया अल्टीमेटम

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  सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा से कहा कि  " आप लोकतांत्रिक रूप से चुने गए पदाधिकारी नहीं हैं, बल्कि केवल एक प्रो-टेम (अस्थाई) चेयरमैन हैं."  इसी के साथ शीर्ष अदालत ने कहा कि  राज्य बार काउंसिलों का गठन जल्द पूरा होने से BCI के नए पदाधिकारियों का चुनाव भी कराया जा सकेगा और मनन मिश्रा के कार्यकाल से जुड़े उठाए गए ज्यादातर सवालों का समाधान हो सकता है। ➡️ मुख्य बातें और निर्देश ✒️ दैनिक कामकाज: अदालत ने स्पष्ट किया कि  प्रो-टेम चेयरमैन होने के नाते मनन मिश्रा केवल बीसीआई (BCI) के दिन-प्रतिदिन के कामकाज को ही संभाल सकते हैं। ✒️ नीतिगत फैसले: कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि  बड़े और महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले लेते समय भारत के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को शामिल किया जाएगा। ✒️ चुनाव प्रक्रिया: सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बार काउंसिलों के गठन और नए पदाधिकारियों के चुनाव के लिए 5 सप्ताह की सख्त समयसीमा तय की है, ताकि जल्द से जल्द नए बीसीआई (BCI) पदाधिकारियों का चुनाव हो सके। कोर्ट ने कहा कि  राज्य बार काउंसिलों का गठन जल्द ...

जन्तर मन्तर के छात्रों से मुक़दमे वापस-सुप्रीम कोर्ट

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   सुप्रीम कोर्ट ने नीट परीक्षा और अन्य मुद्दों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर व देश के अन्य हिस्सों में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर (FIR) को रद्द कर दिया है। ➡️ सुप्रीम कोर्ट का फैसला और मुख्य बातें ⚫ अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल:  सर्वोच्च न्यायालय ने अपने विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मामलों को समाप्त करने का आदेश दिया। ⚫ गंभीर अपराधों पर लागू नहीं:  यह राहत केवल मामूली प्रदर्शन मामलों के लिए है; हत्या या गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि व हिंसा में लिप्त आरोपियों को इससे छूट नहीं मिली है। ⚫ मार्च रद्द :  इस फैसले के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को प्रस्तावित अपना विरोध मार्च रद्द कर दिया है। ⚫ सरकार का आश्वासन:  केंद्र सरकार ने पहले ही अदालत को सूचित किया था कि प्रदर्शनकारियों के पुराने केस वापस लिए जाएंगे और भविष्य में कोई नया मुकदमा दर्ज नहीं होगा। द्वारा शालिनी कौशिक एडवोकेट कैराना (शामली)