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एडवोकेट इंटर्नशिप योजना पर विराम

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  बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश द्वारा 1 नवंबर 2026 को एडवोकेट इंटर्नशिप योजना आरम्भ की जा रही थी किन्तु अब उस पर विराम लग गया है. शालिनी कौशिक एडवोकेट द्वारा 31 अक्टूबर 2026 को बार काउन्सिल ऑफ उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष श्री अनुराग पांडे एडवोकेट जी से योजना के बारे में जानकारी मांगे जाने पर कहा गया - "अभी रुक जाइए, हमारे द्वारा विरोध दर्ज कराया गया है, एक हफ्ते में पता लगेगा." इसलिए सभी अधिवक्ताओं की जानकारी के लिए 1 नवंबर 2026 से उत्तर प्रदेश में एडवोकेट इंटर्नशिप योजना लागू नहीं हो रही है. द्वारा शालिनी कौशिक एडवोकेट कैराना (शामली) 

मुजफ्फरनगर का कोर्ट रूम 49 इलाहाबाद हाई कोर्ट विवाद से नाता

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  यूपी के मुजफ्फरनगर में जिला मुख्यालय से 34 किमी दूर जानसठ रोड पर जगह पड़ती है मीरापुर। ओरैया जनपद के एसपी अभिषेक भारती मीरापुर के रहने वाले हैं. यहां के रहने वाले अनिल कुमार यूपीपीसीएल में एक्सईएन रहे। अभिषेक भारती बताते हैं कि पिता पॉवर कॉर्पोरेशन में हैं. मां कुसुमलता पेशे से गृहिणी हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के कोर्ट रूम नंबर 49 में औरैया के पुलिस अधीक्षक (SP) अभिषेक भारती के बैठने को लेकर यह विवाद हुआ था। 27 अक्टूबर 2026 को हुई इस घटना का विवरण इस प्रकार है: • विवाद की वजह: जस्टिस अजय भनोट की कोर्ट में पेशी के सिलसिले में औरैया के एसपी अभिषेक भारती आए थे और वकीलों के बैठने के लिए आरक्षित या उसके पास वाली कतार में एक कुर्सी पर बैठे थे। • सीट हटाने को लेकर बहस: एक वकील ने एसपी से वहां बैठने पर आपत्ति जताई और उन्हें पीछे की पंक्ति में बैठने के लिए कहा। • अदालत में कार्रवाई: इसके बाद एडिशनल गवर्नमेंट एडवोकेट (AGA) और जज अजय भनोट के सामने यह मामला पहुंचा, जहां जज द्वारा उस वकील को फटकार लगाने, जेल भेजने की चेतावनी देने और पुलिस अधिकारी से माफी मांगने के निर्देश दिए जाने के आरोप लगे। • ...

फिर AIBE खत्म करे बार काउन्सिल ऑफ इंडिया

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  COP प्राप्त करने के लिए ही BCI ने AIBE परीक्षा अनिवार्य की है 2010 से ENROLL ADVOCATE के लिए, जिसमें ENROLLMENT के 2 साल के अंदर AIBE परीक्षा पास करने के बाद ही 2010 के बाद ENROLLED ADVOCATE COP प्राप्त कर पाते हैं अब यदि BCI बार काउन्सिल ऑफ उत्तर प्रदेश के  6 महीने की प्रेक्टिस के बाद सीनियर एडवोकेट से प्रमाण पत्र और बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सदस्य से सत्यापन की शर्त पूरी करने के बाद COP जारी करने पर स्वीकृति देता है तो उसे उत्तर प्रदेश में एडवोकेट को AIBE EXAM की पात्रता से मुक्ति प्रदान करनी चाहिए क्योंकि एक COP पाने के लिए इतनी बाध्यतायें नए एडवोकेट के न्याय हितों के खिलाफ हैं।  शालिनी कौशिक एडवोकेट कैराना (शामली)

उत्तर प्रदेश में एडवोकेट इंटर्नशिप का सच

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       उत्तर प्रदेश में अधिवक्ताओं के लिए एक नई सूचना आज चर्चाओं में है कि उत्तर प्रदेश में नए अधिवक्ताओं के लिए 6 महीने की इंटर्नशिप अनिवार्य कर दी गई है.         जिसमें कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में नए वकीलों के लिए वकालत की डिग्री मिलने के बाद सीधे प्रैक्टिस करने पर रोक लगाते हुए बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने 6 महीने की इंटर्नशिप (लॉ ट्रेनिंग) अनिवार्य कर दी है। ⚫ मुख्य नियम और विशेषताएं: • लागू होने की तिथि : यह नया नियम 1 नवंबर 2026 से लागू होगा। • प्रमाण पत्र (Certificate): 6 महीने की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद अभ्यर्थी को संबंधित सीनियर अधिवक्ता के लेटर हेड पर जारी प्रमाण पत्र लेना होगा। • सत्यापन : इस प्रमाण पत्र का सत्यापन बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के किसी सदस्य से कराना अनिवार्य होगा। • सीओपी (COP) के लिए अनिवार्यता: सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (COP) के लिए ऑनलाइन आवेदन करते समय इस प्रमाण पत्र को अपलोड करना होगा; इसके बिना सीओपी जारी नहीं किया जाएगा। • सीनियर अधिवक्ताओं पर सीमा: 10 साल या उससे अधिक का अनुभव रखने वाला कोई भी वरिष...

उम्रकैद के दोषी राजनेता को भी है चुनाव लड़ने का अधिकार-इलाहाबाद हाई कोर्ट

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      इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 अक्टूबर 2026 को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पाए दोषी नंदलाल राय उर्फ बबलू राय की दोषसिद्धि और सजा पर अपील लंबित रहने तक रोक लगाते हुए उसकी जमानत मंजूर कर ली है। मुख्य विवरण: • दोषी का नाम: नंदलाल राय उर्फ बबलू राय • मामला: वाराणसी की एक सेशन कोर्ट ने अप्रैल 2025 में 2017 के एक हत्या (प्रमोद कुमार निगम हत्याकांड) मामले में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। • दलील: दोषी के वकीलों ने हाईकोर्ट में दलील दी कि वह 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में या भारतीय जनता पार्टी (BJP) के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहता है। • कोर्ट का फैसला: न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि राजनेताओं का अपने मतदाताओं के प्रति विशेष कर्तव्य होता है और यदि दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई जाती है, तो उनके चुनाव लड़ने का अवसर छिन सकता है। अदालत ने यह भी माना कि एक आम आदमी के आजीविका के अधिकार को राजनेता के चुनाव लड़ने के अधिकार से कम नहीं आंका जा सकता। द्वारा शालिनी ...

बच्चों समेत सभी को इन्टरनेट इस्तेमाल का मौलिक अधिकार-सुप्रीम कोर्ट

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  सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अक्टूबर 2026 के एक ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया है कि इंटरनेट तक पहुंच और उसका इस्तेमाल करना संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) और अनुच्छेद 19(1)(a) (वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) के तहत हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि इंटरनेट तक पहुंच और उसके इस्तेमाल का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस अधिकार में बच्चे भी शामिल हैं और उनकी उम्र चाहे जो भी हो, उन्हें इससे पूरी तरह वंचित नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें • बच्चों का अधिकार: अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मौलिक अधिकार बच्चों को भी समान रूप से प्राप्त है। केवल उम्र के आधार पर इंटरनेट के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाई जा सकती। • पीठ (Bench): यह महत्वपूर्ण फैसला न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति विनोद के. चंद्रन की पीठ ने सुनाया है। • इंटरनेट शटडाउन पर रोक: अदालत ने यह भी कहा है कि जब तक कानूनी रूप...

उत्तर प्रदेश सरकार तीन माह में पंचायत चुनाव कराने के लिए बाध्य-इलाहाबाद हाई कोर्ट

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  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को 3 महीने के भीतर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव संपन्न कराने का आदेश दिया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के तहत ही कराए जाएंगे, जिसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण भी शामिल है। पिछड़ा वर्ग आरक्षण तय करने के लिए गठित समर्पित आयोग की जांच, रिपोर्ट या उसकी सिफारिशों को लागू करने की प्रक्रिया के नाम पर पंचायत चुनाव अनिश्चितकाल तक नहीं टाले जा सकते। मुख्य डिटेल्स: • पीठ (Bench): जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिवीजन बेंच • आदेश की तिथि: 14 अक्टूबर 2026 • मुख्य फैसला: • कोर्ट ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। • जब तक नए चुनाव नहीं होते, तब तक निवर्तमान (outgoing) ग्राम प्रधान ही प्रशासक के रूप में कार्य करते रहेंगे। सरकार के 25 मई के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को कोर्ट ने खारिज करते हुए प्रशासक व्यवस्था को जारी रखने की अनुमति दी है। • कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ओबीसी (OBC) आयोग अपना क...