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एसपी और थानाध्यक्ष (SHO) 'झूठों का झुंड'-इलाहाबाद हाईकोर्ट

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  इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के गौरी बाजार थाने में चार लोगों को अवैध हिरासत में रखने के मामले में एसपी और थानाध्यक्ष (SHO) को 'झूठों का झुंड' कहा है। ➡️ केस की मुख्य बातें: ⚫ घटना : 13 से 24 अप्रैल, 2026 के बीच चार लोगों (अर्चना गौड़, नंदिनी गौड़, इन्नी और महेंद्र गौड़) को गौरी बाजार थाने में अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया था।  ⚫ याचिका : यह मामला महेंद्र गौड़ की बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका के जरिए हाई कोर्ट पहुंचा था। ⚫ सीसीटीवी फुटेज गायब: सुनवाई के दौरान जब कोर्ट ने थाने के सीसीटीवी फुटेज मांगे, तो पुलिस ने दलील दी कि बिजली न होने और जनरेटर खराब होने के कारण रिकॉर्डिंग नहीं हो सकी।  ⚫ कोर्ट की कड़ी टिप्पणी: इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ (न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत) ने पुलिस की इस सफाई को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जो थानेदार जनरल डायरी (GD) की सही एंट्री या सीसीटीवी का बैकअप नहीं रख सकता, उसे नौकरी में रहने का अधिकार नहीं है। जब एसपी ने माफी मांगनी चाही, तो कोर्ट ने कहा कि माफी अदालत से नहीं बल्क...

100 साल पुरानी शाही मस्जिद का एक हिस्सा सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाने की अनुमति-मध्य प्रदेश हाई कोर्ट

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  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उज्जैन में महाकाल मंदिर के पास स्थित शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाकर सड़क चौड़ी करने के नगर निगम के फैसले को चुनौती देने वाली दो याचिकाएं खारिज कर दी । कोर्ट ने कहा कि  नगर निगम ने संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन करते हुए और मस्जिद का प्रबंधन करने वाले लोगों को सुनवाई का पर्याप्त अवसर देने के बाद कार्रवाई की। जस्टिस संदीप एन. भट्ट की पीठ ने कहा कि प्रस्तावित कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 300-ए का उल्लंघन नहीं करती। कोर्ट ने 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ, करोड़ों श्रद्धालुओं की संभावित आवाजाही, यातायात व्यवस्था और मस्जिद की स्थिति को भी ध्यान में रखा।..... शाही मस्जिद महाकालेश्वर मंदिर के लगभग सामने और क्षिप्रा नदी के बेहद करीब स्थित है। सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और यातायात प्रबंधन के लिए सड़क चौड़ीकरण जरूरी है। पीठ ने कहा कि बड़े जनहित और सार्वजनिक सुरक्षा को देखते हुए नगर निगम की कार्रवाई कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के बाद की गई। मध्य प्रदेश हाईको...

सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण

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अनुकम्पा नियुक्ति सदैव स्थायी-इलाहाबाद हाईकोर्ट

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  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि मृतक आश्रित कोटे (अनुकम्पा नियुक्ति) के तहत मिलने वाली सरकारी नौकरी हमेशा स्थायी और नियमित प्रकृति की होती है।  विभाग द्वारा नियुक्ति पत्र (Joining Letter) में 'पूर्णतः अस्थायी सेवा' (Temporary) की शर्त जोड़ना पूरी तरह गैरकानूनी और स्थापित विधिक सिद्धांतों के विपरीत है।  ➡️ इस व्यवस्था की पूरी केस डिटेल्स और कानूनी स्थिति निम्नलिखित है: ⚖️ केस डिटेल्स (Case Details) ⚫ केस का नाम: सपना सारस्वत बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य ⚫ सुनवाई करने वाली अदालत: इलाहाबाद हाईकोर्ट (माननीय न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकलपीठ) ⚫ फैसले की तिथि: सितंबर 2026   ⚫ मामले की पृष्ठभूमि:  आगरा की रहने वाली सपना सारस्वत ने अपने पिता (जो कि एक सरकारी कर्मचारी थे) की सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने के बाद मृतक आश्रित कोटे के तहत नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद विभाग ने उन्हें 27 अगस्त 2026 को नियुक्ति पत्र जारी किया।  ⚫ मुख्य विवाद :नियुक्ति पत्र की शर्त संख्या-1 में विभाग ने यह लिख दि...

उपाध्याय समाज पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर भी रामभद्राचार्य पर FIR नहीं-इलाहाबाद हाई कोर्ट

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  जगद्गुरु रामभद्राचार्य द्वारा उपाध्याय, चौबे, पाठक और दीक्षित जैसी ब्राह्मण उपजातियों/समुदायों के संदर्भ में 'नीच' या 'अधम' जैसे शब्दों का उपयोग करने, साथ ही चारों शंकराचार्यों के खिलाफ भी आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोप पर याचिकाकर्ता रमेश उपाध्याय एडवोकेट द्वारा FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है।  ➡️  विवाद और कानूनी केस की मुख्य बातें : ⚫ . विवाद का मुख्य कारण (विवादित बयान) सोशल मीडिया और यूट्यूब पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य का एक बयान/वीडियो प्रसारित हुआ था। याचिकाकर्ता के अनुसार, इस वीडियो में उन्होंने उपाध्याय, चौबे, पाठक और दीक्षित जैसी ब्राह्मण उपजातियों/समुदायों के संदर्भ में 'नीच' या 'अधम' जैसे शब्दों का उपयोग किया था। इसके साथ ही उन पर चारों शंकराचार्यों के खिलाफ भी आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगा। इन बयानों से उपाध्याय समुदाय के लोगों की भावनाएं आहत हुईं और उन्होंने इसे समाज का अपमान माना। ⚫ . रामभद्राचार्य का स्पष्टीकरण विवाद बढ़ने पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने वृंदावन में इस पर अपना स्पष्टीकरण दिया। उन...

गैर कानूनी है न्यायालय परिसर में बार एसोसिएशन कार्यकारिणी सदस्यों का नाम फोटो सहित बैनर

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  न्यायालय परिसर में बार एसोसिएशन के कार्यकारिणी सदस्यों का नाम और फोटो सहित बड़े-बड़े बैनर या फ्लेक्स लगाना कानूनी रूप से प्रतिबंधित और नियमों के खिलाफ है। भारतीय विधिज्ञ परिषद (Bar Council of India) के नियम और विभिन्न उच्च न्यायालयों (जैसे इलाहाबाद हाईकोर्ट) के आदेशों के अनुसार,  कोर्ट परिसर की गरिमा, सुरक्षा और वकीलों के पेशेवर आचरण को बनाए रखने के लिए ऐसे किसी भी प्रकार के प्रचार या प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक है। इस विषय पर कानूनी प्रावधान और न्यायालयों के रुख को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है: 1. बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियम (विज्ञापनों पर रोक)नियम 36 (अध्याय II, भाग VI):  इस नियम के तहत वकीलों द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी प्रकार के विज्ञापन या प्रचार (Soliciting/Advertising) पर पूर्ण प्रतिबंध है। ⚫ सीमित बोर्ड का आकार:  वकीलों को केवल अपने चेंबर या कार्यालय के बाहर एक सामान्य आकार का नेमप्लेट लगाने की अनुमति है। ⚫ पद का प्रचार वर्जित:  BCI के नियमों के अनुसार, कोई भी अधिवक्ता अपने लेटरहेड, साइन-बोर्ड या स्टेशनरी पर यह...

राहुल गांधी पर इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

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 इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता वाली याचिका को खारिज किया   ◆ याचिकाकर्ता राहुल गांधी के पास ब्रिटेन की नागरिकता होने का आरोप लगा रहे थे ◆ कोर्ट ने कहा- आरोप साबित करने के लिए एक भी दस्तावेज पेश नहीं किया गया  ◆ राहुल गांधी के खुद को ब्रिटिश नागरिक घोषित करने का भी कोई सबूत नहीं मिला द्वारा  शालिनी कौशिक  एडवोकेट  कैराना (शामली)