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कुछ वकील काली भेड़-इलाहाबाद हाई कोर्ट

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 इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने वकीलों के वेश में मौजूद उन लोगों को "काली भेड़" (Black Sheep) कहा है जो हिंसा, मारपीट या अवैध गतिविधियों में शामिल होकर न्याय व्यवस्था और न्यायपालिका की गरिमा को नुकसान पहुँचाते हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने वकीलों के वेश में मौजूद कुछ भ्रष्ट और हिंसक आचरण वाले वकीलों को "काली भेड़ें" (Black Sheep) कहा है। यह टिप्पणी लखनऊ जिला अदालत परिसर के अंदर एक वादकारी (मुवक्किल) और बाहर से आए वकीलों के साथ मारपीट तथा न्यायिक कार्य में बाधा डालने के मामले में की गई है। ➡️ मामले से जुड़े मुख्य विवरण ⚫ घटना की तिथि : 21 जुलाई 2026, जब दिल्ली के कुछ अधिवक्ता अपने मुवक्किल मोहम्मद शाकिर के संपत्ति विवाद के सिलसिले में लखनऊ जिला न्यायालय पहुंचे थे। ⚫ आरोप : स्थानीय विपक्षी वकीलों द्वारा अदालत में पेश होने से रोकना, गाली-गलौज और मारपीट करना। ⚫ हाईकोर्ट की कार्रवाई :न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की विशेष पीठ ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया। ⚫ हाई कोर्ट की सख्ती: Allahabad High Court की पीठ (न्यायमूर्ति राजन राय और न...

मातृत्व अवकाश रोका नहीं जा सकता-इलाहाबाद हाई कोर्ट

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  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि  दूसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) केवल इस आधार पर नहीं रोका जा सकता कि पहली बार मिले मातृत्व अवकाश के बाद दो वर्ष पूरे नहीं हुए हैं।...... सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Code on Social Security, 2020) के प्रावधान उत्तर प्रदेश फाइनेंशियल हैंडबुक के नियमों पर प्रभावी होंगे । इस प्रकार इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि दो प्रसवों (गर्भधारण) के बीच दो साल का अंतराल न होने के आधार पर महिला कर्मचारी को मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) देने से इनकार नहीं किया जा सकता है। ➡️ वाद विवरण एवं मुख्य पक्षकार (Case Details) ⚫ अदालत :  इलाहाबाद उच्च न्यायालय ( Allahabad High Court ) ⚫ न्यायाधीश :  न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन (एकल पीठ) ⚫ मुख्य पक्षकार (याचिकाकर्ता):  शिखा यादव और अन्य (कानपुर नगर की स्टाफ नर्स) ⚫ विपक्षी प्राधिकारी:  चिकित्सा शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार ➡️ निर्णय के मुख्य बिंदु ⚫ दो साल की शर्त का खंडन:  अदालत ने स्पष्ट किया कि यूपी वित्तीय हैंडबुक या पुराने...

पहली शादी छिपाकर शादी करने वाला दूसरी पत्नी को गुजारा भत्ता देने के लिए बाध्य-इलाहाबाद हाई कोर्ट

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 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि  जिस महिला को पति की पहले से मौजूद शादी की बात छिपाकर शादी के लिए राजी किया गया, वह CrPC की धारा 125 के तहत गुज़ारा-भत्ता पाने की हकदार है, भले ही दोनों के बीच हुई शादी कानूनी रूप से अमान्य (void) हो। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी पहली शादी की बात छिपाकर दूसरी शादी करता है, तो वह महिला (दूसरी पत्नी) CrPC की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता पाने की हकदार है।  कोर्ट ने कहा कि  पति अपने धोखाधड़ी वाले आचरण का लाभ नहीं उठा सकता। ➡️ निर्णय की मुख्य बातें धोखाधड़ी का बचाव नहीं: कोर्ट ने माना कि यदि पत्नी को पहले से मौजूद विवाह की जानकारी नहीं थी और उसे धोखे में रखकर शादी के लिए राजी किया गया, तो विवाह शून्य (void) होने के बावजूद पति भरण-पोषण देने से मना नहीं कर सकता। ⚫ सुप्रीम कोर्ट के दृष्टांत:  जस्टिस प्रसाद ने 'बादशाह बनाम सौ उर्मिला बादशाह गोडसे (2013)' और 'कमला व अन्य बनाम एमआर मोहन कुमार (2018)' में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसलों का हवाला देते हुए कहा कि  जब कोई पति अपनी ...

12 वर्ष बाद अनुकम्पा नियुक्ति रद्द नहीं की जा सकती-इलाहाबाद हाईकोर्ट

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 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि   यदि अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) देते समय विभाग को आवेदक के पिता की सरकारी नौकरी की जानकारी थी और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद नियुक्ति दी गई थी, तो लगभग 12 वर्ष बाद यह कहते हुए सेवा समाप्त नहीं की जा सकती कि आवेदक ने तथ्य छिपाए थे। इस प्रकार इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 12 साल पहले मां की मृत्यु के बाद मिली अनुकंपा नियुक्ति को इस आधार पर नहीं छीना जा सकता कि पिता की सरकारी नौकरी की जानकारी छिपाई गई थी, क्योंकि विभाग को नियुक्ति के समय ही यह तथ्य पता था। ⚫ निर्णय के पक्षकार (Parties) याचिकाकर्ता: उपासना अग्रवाल (वरिष्ठ लिपिक पद पर कार्यरत कर्मचारी) विपक्ष/प्रतिवादी: उत्तर प्रदेश सरकार एवं अन्य संबंधित जिला अधिकारी/जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मामले का विवरण नियुक्ति का वर्ष: याचिकाकर्ता को करीब 12 वर्ष पूर्व अपनी माता की मृत्यु के बाद अनुकंपा के आधार पर नौकरी दी गई थी।सेवा समाप्ति का आदेश: जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा 11 अगस्त 2025 को एक शिकायत के आधार पर याचिकाकर्ता की सेवा यह कहते हुए समाप्त...

दागी वकीलों पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की सख्त कार्रवाई

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  इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जघन्य अपराधों के आरोपी वकीलों की वकालत पर मुकदमा खत्म होने तक रोक लगाने का सख्त निर्देश दिया है।  ⚫ यह फैसला मोहम्मद कफील बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (Mohammad Kafeel v. State of UP) के मामले में दिया गया है। ➡️ मुख्य नियम और निर्देशप्रैक्टिस पर रोक:  7 साल या उससे अधिक सजा वाले गंभीर/जघन्य अपराधों के आरोपी वकील कोर्ट में पेश नहीं हो सकेंगे और उनका एनरोलमेंट/वकालत का काम मामले के फैसले तक निलंबित रहेगा.  ⚫  छूट:  यह नियम पारिवारिक और वैवाहिक मामलों पर लागू नहीं होगा। ⚫ केस ट्रांसफर :  ऐसे दागी वकीलों से जुड़े आपराधिक मुकदमे सुनवाई के लिए उनके गृह जिले से लगभग 100 किलोमीटर दूर दूसरे जिले की नामित अदालत में ट्रांसफर किए जाएंगे। ⚫ मुवक्किलों की सुरक्षा:  मुवक्किल को अपनी पसंद का दूसरा वकील चुनने का पूरा मौका दिया जाएगा। आर्थिक रूप से कमजोर मुवक्किलों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) द्वारा मुफ्त कानूनी सहायता दी जाएगी। ⚫ लागू कराने की जिम्मेदारी:  संबंधित जिलों के जिला जज (District Judge), डीएम (DM) और एसएसपी/पुलिस कमिश्न...

बंदरों के आतंक और मानव बन्दर संघर्ष पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त

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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में बंदरों के बढ़ते आतंक और मानव-बंदर संघर्ष पर सख्त रुख अपनाते हुए हाल ही में राज्य सरकार द्वारा गठित 13 सदस्यीय हाई-पावर्ड कमेटी को केवल कागजों तक सीमित न रहकर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।अदालत ने कहा कि समिति नियमित बैठकें करें और सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे. ➡️ कोर्ट के मुख्य निर्देश और अपडेट ⚫ मुख्य पक्षकार (Parties Involved) ⚫ याचिकाकर्ता (Petitioners):  विनीत शर्मा और प्रजाक्ता सिंहल, जिनकी ओर से वकील पवन कुमार तिवारी और आकाश वशिष्ठ पैरवी कर रहे हैं। ⚫ प्रतिवादी/विपक्षी (Respondents):  उत्तर प्रदेश सरकार (अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल), नगर निकाय, वन विभाग और अन्य संबंधित अधिकारी। ⚫ कमेटी की सक्रियता:  अदालत ने स्पष्ट किया कि 15 जुलाई 2026 को गठित 13 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति नियमित बैठकें करे और याचिकाकर्ताओं द्वारा सुझाई गई कार्ययोजना पर जल्द से जल्द ठोस निर्णय ले। ⚫ कार्रवाई रिपोर्ट तलब:  कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह अगली सुनवाई पर समिति की बैठकों की कार्यवाही (मिनट्स) और अब तक हुई प...

मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को रोकते हुए तमिलनाडु में जारी रहेगी गो-हत्या: सुप्रीम कोर्ट

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  सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसमें बकरीद या किसी भी अन्य दिन तमिलनाडु राज्य में कहीं भी गाय या बछड़े की हत्या पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने तमिलनाडु राज्य द्वारा दायर स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) पर नोटिस जारी करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया। राज्य ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें राज्य में गायों और बछड़ों की हत्या पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई।  Case : The Secretary to the Government v. K Surya alias K Surya Prasanth | Diary No.36054/2026 द्वारा  शालिनी कौशिक  एडवोकेट  कैराना (शामली)