दूर के ढोल सुहावने नामित सभासदों के
बोर्ड की मजबूती, विकास कार्यों की शपथ आदि न जाने कितनी लुभावनी राजनीतिक बयानबाजी से भरपूर हैं आजकल के नगरपालिका प्रशासन मे राज्य सरकार द्वारा मनोनीत सभासदों के शपथ ग्रहण समारोह, पहले भी होते रहे हैं आगे भी होते रहेंगे किन्तु चुनावी बेला में ऐसे समारोहों में बहुत कुछ ऐसा मनगढंत प्रचारित किया जाता है जिससे कानून भी बगलें झांकता नजर आता है. उत्तर प्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1916 की धारा 9 जिसे उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 12 सन 1994 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया की उपधारा (1) घ में कहा गया है कि ( घ) नाम निर्दिष्ट सदस्य जो राज्य सरकार द्वारा, सरकारी गजट में विज्ञप्ति द्वारा, नगरपालिका प्रशासन में विशेष ज्ञान या अनुभव रखने वाले व्यक्तियों में से नामित किये जायेंगे और जिनकी संख्या- (एक) नगर पंचायत की दशा में, दो से कम और तीन से अधिक नहीं होगी; (दो) नगरपालिका परिषद् की दशा में तीन से कम और पाँच से अधिक नहीं होगी। इसके साथ ही अधिनियम मे यह भी उल्लिखित किया गया है कि - "किन्तु प्रतिबंध यह है कि खण्ड (घ) में निर्दिष्ट व्यक्तियों को नगरपालिका की बैठकों में मत देने का अधिकार नहीं होगा. साथ ही, 2...