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हत्यारोपी परिवार का सदस्य अनुकम्पा नियुक्ति से वंचित नहीं - सुप्रीम कोर्ट

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 सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि   यदि किसी मृत सरकारी कर्मचारी के परिवार के किसी सदस्य पर हत्या का आरोप है, तो उसे मिलने वाली 'अनुकंपा नियुक्ति' (Compassionate Appointment) को सिर्फ इस आधार पर नहीं रोका जा सकता, क्योंकि नियमों में नौकरी पर रोक का कोई प्रावधान नहीं है। मामले से जुड़े दोनों पक्षों (दोनों Parties) की विस्तृत जानकारी इस प्रकार है: 1. याचिकाकर्ता (Appellant):  अतुल चौहान परिचय :  अतुल चौहान मृतक सरकारी कर्मचारी (गजेंद्र सिंह चौहान) के बेटे हैं। मुद्दा :  उनके पिता की मृत्यु के बाद, अतुल ने अनुकंपा के आधार पर नौकरी (Compassionate Job) के लिए आवेदन किया था। विवाद की वजह:  हरियाणा सरकार के अधिकारियों ने उनकी नियुक्ति को इसलिए लंबित रखा क्योंकि अतुल की मां पर उनके पिता की हत्या की साजिश रचने का आरोप था और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। मां और भाई द्वारा अपने अधिकार अतुल के पक्ष में छोड़ने के बावजूद अधिकारियों ने उसे नौकरी देने से मना कर दिया था। 2. प्रतिवादी (Respondent):  राज्य सरकार (हरियाणा) और अधिका...

अविवाहित सरकारी कर्मचारी-मृत्यु - अनुकम्पा नियुक्ति

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  अविवाहित सरकारी कर्मचारी की मृत्यु होने पर, अनुकंपा नियुक्ति उनके परिवार के आश्रित सदस्य को मिलती है। प्राथमिकता के क्रम में आमतौर पर माता-पिता या भाई-बहन (यदि अविवाहित सरकारी कर्मचारी पर पूरी तरह आश्रित हों) हकदार होते हैं या यदि मृतक व्यक्ति द्वारा किसी को अपने वारिस के तौर पर नामांकित किया गया हो तो वह हकदार होता है. यह नियुक्ति परिवार की आर्थिक मदद के लिए दी जाती है, न कि अधिकार के तौर पर।  ➡️ नगर पंचायत निदेशक बनाम एम जयबाल (2025) के केस में   भारत के सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ के न्यायमूर्ति मनमोहन व न्यायमूर्ति राजेश बिंदल ने इस तथ्यात्मक संरचना का उपयोग करते हुए, समेकित और सशक्त तरीके से, कानून के चार केंद्रीय सिद्धांतों को दोहराया: 1️⃣ अनुकंपा नियुक्ति कोई निहित अधिकार नहीं है , बल्कि यह अचानक आए वित्तीय संकट से निपटने के लिए दी जाने वाली एक बार की रियायत है । 2️⃣ एक बार आश्रित व्यक्ति अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति का प्रस्ताव स्वीकार कर लेता है, तो विचार करने का अधिकार "पूर्ण" हो जाता है ; दोबारा मौका नहीं मिल सकता या " अनंत करुणा " का कोई अवसर नहीं हो सक...

सुप्रीम कोर्ट ने मृतक कमिश्नर क़े बेटे को अनुकम्पा नियुक्ति देने से किया इंकार

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       Shalini Kaushik Law Classes  माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा राजस्थान हाई कोर्ट और सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल क़े फैसले को बरकरार रखते हुए मृतक सेन्ट्रल एक्साइस कमिश्नर क़े बेरोजगार बेटे को अनुकम्पा नियुक्ति देने से इंकार कर दिया.   ➡️ टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट         टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट  के अनुसार, अदालत ने याचिकाकर्ता रवि कुमार जेफ के पिता, जो सेंट्रल एक्साइज में प्रधान आयुक्त थे। उनका अगस्त 2015 में निधन हो गया था। पिता की मृत्यु क़े उपरांत रवि ने CGST और सेंट्रल एक्साइज (जयपुर जोन) राजस्थान में मुख्य आयुक्त के कार्यालय में अनुकंपा नियुक्ति की मांग की । जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस मनमोहन ने याचिका खारिज कर दी है। ➡️ याचिकाकर्ता रवि की पारिवारिक स्थिति -     याचिकाकर्ता रवि के पिता दो घर, 33 एकड़ जमीन और 85 हजार रुपये पारिवारिक मासिक पेंशन छोड़ गए हैं। राजस्थान हाईकोर्ट और सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्युनल की तरफ से पुत्र रवि की अनुकंपा नियुक्ति की याचिका को डिपार्टमेंट के इस दावे को बरकरार रखते ...