तलाकशुदा पत्नी अविवाहित रहने पर भी भरण-पोषण की हकदार: सुप्रीम कोर्ट
29 मई 2025 को माननीय उच्चतम न्यायालय ने राखी साधुखान बनाम राजा साधुखान, सिविल अपील संख्या 10209/2024 में भरण पोषण को लेकर एक बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय दिया है. ➡️ केस का निर्णय- जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने राखी साधुखान बनाम राजा साधुखान मामले में फैसला सुनाया, जिसमें विवाह के अपूरणीय रूप से टूटने के बाद पत्नी को दिए गए गुजारा भत्ते की मात्रा को चुनौती देने वाली अपील पर फैसला सुनाया गया।सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में पत्नी को दिए जाने वाले स्थायी गुजारा भत्ते की रकम को बढ़ाकर ₹50,000 प्रति माह कर दिया, जिससे विवाह के दौरान पत्नी का जो जीवन स्तर रहा है उसी जीवन स्तर के साथ उसका जीवन स्तर सुनिश्चित किया जा सके जिससे उसका भविष्य उचित रूप से सुरक्षित रहे। यह गुजारा भत्ता कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा पहले दी गई राशि से लगभग दोगुना है। कोर्ट ने कहा कि :- "अपीलकर्ता-पत्नी अविवाहित रही और स्वतंत्र रूप से रह रही है। इसलिए वह उस स्तर के भरण-पोषण की हकदार है, जो विवाह के दौरान उसके जीवन स्तर को दर्शाता है और जो उसके भविष्य को उचित रूप से सुरक्षित करता है।" ➡️ केस...