संदेश

498A Supreme Court Judgment लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सुप्रीम कोर्ट ने ससुराल वालों पर दर्ज वैवाहिक क्रूरता का मामला ख़ारिज किया.

चित्र
  सुप्रीम कोर्ट द्वारा शुक्रवार (26 सितंबर) को एक महिला के ससुराल पक्ष के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी गई । महिला द्वारा अपने ससुर, सास और ननद पर घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए गए थे. मामले का अवलोकन कर सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि " ये आरोप केवल अस्पष्ट और सामान्य थे और इनमें कोई ठोस तथ्य नहीं है।"    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बी.आर. गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने अपील स्वीकार करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसने पहले इन आरोपों को ख़ारिज करने से इनकार कर दिया था। FIR में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए (क्रूरता), धारा 377 (अप्राकृतिक यौन संबंध), धारा 506 (धमकी) और धारा 34 (समान आशय) के तहत अपराध दर्ज किए गए। अदालत ने कहा कि " शिकायत में केवल सामान्य आरोप हैं, जिनमें कोई विशेष विवरण नहीं दिया गया। महिला ने अपने पति पर अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था लेकिन ये आरोप सिर्फ पति तक सीमित थे ससुराल पक्ष पर नहीं। " पीठ ने दिगंबर बनाम महाराष्ट्र राज्य (2024) मामले का ...

परिवार में तानों पर 498A का मामला खारिज-सुप्रीम कोर्ट

चित्र
साभार   ⬇️ Shalini kaushik law classes ⬇️ परिवार में तानों पर 498A का मामला खारिज   ससुर और सास के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत दर्ज मामला खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि हाईकोर्ट को CrPC की धारा 482 के तहत पति के रिश्तेदारों की प्रार्थनाओं पर विचार करते समय शिकायत के पीछे दुर्भावना की संभावना की जांच करनी चाहिए। जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने कहा, "वैवाहिक विवादों से उत्पन्न मामलों में विशेष रूप से जहां आरोप शादी के कई वर्षों के बाद लगाए जाते हैं और वह भी तब जब एक पक्ष दूसरे के खिलाफ तलाक की कार्यवाही शुरू करता है, न्यायालय को आरोपों को उनके वास्तविक रूप में लेने में सावधानी बरतनी चाहिए। इसके बजाय, जहां दुर्भावना के आरोप हैं, वहां यह जांच करनी चाहिए कि क्या वे आरोप किसी अप्रत्यक्ष उद्देश्य से लगाए गए हैं। पति के रिश्तेदारों की प्रार्थना पर विचार करते समय और भी अधिक।" संक्षेप में मामला न्यायालय ऐसे मामले पर विचार कर रहा था, जिसमें शिकायतकर्ता-पत्नी के पति, ससुर और सास ने उनके खिलाफ IPC की धारा 498ए/411 के तहत दर्ज FIR र...