पहले दें सबूत आप
लोकसभा चनाव २०१४ नज़दीक हैं और इसलिए सर्वाधिक सुर्ख़ियों में हैं हमारे राजनेता .सत्ता कौन नहीं चाहता ,कुर्सी का नशा हर किसी के सिर चढ़कर बोलता है .हर कोई जो ओखली स्वरुप राजनीति में सिर घुसा देता है वह मूसल स्वरुप किसी आरोप अस्त्र से नहीं डरता और फिर वह जिसे जैसे भी हो जैसे जनता को उसका दिल जीतकर ,उसको लुभाकर ,बहकाकर अपने लिए कुर्सी का प्रबंध कर ही लेता है .सभी जानते हैं कि नेता होने के मायने क्या हैं ,''सिकंदर हयात ''जी के शब्दों में - ''मुझे इज़ज़त की परवाह है ,न मैं ज़िल्लत से डरता हूँ , अगर हो बात दौलत की ,तो हर हद से गुज़रता हूँ , मैं नेता हूँ मुझे इस बात की है तरबियत हासिल मैं जिस थाली में खाता हूँ उसी में छेद करता हूँ .'' और नेता की यही असलियत उसे आमतौर पर जनता के व्यंग्य के तीर झेलने को मजबूर करती है .चाहे-अनचाहे उसे ऐसी बहुत सी बाते सहनी पड़ती हैं जिससे उसका दूर-दूर तक कोई वास्ता भी नहीं होता किन्तु वह यह सहता है क्योंकि वह ताकत उसे राजनीति से मिलती है ,वह सामर्थ्य उसे जनता के स्नेह और कभी स्वार्थ से मिलता है और इन्ही के बल पर वह झूठे-सच्चे सभी आरोपो...