पट्टा-लाइसेंस और मानस जायसवाल
मेरी पिछली पोस्ट '' पारिवारिक निपटान आलेख और मानस जायसवाल ''में मानस जायसवाल जी ने एक प्रश्न और पूछा था ,जो कुछ इस प्रकार था - धन्यवाद शालिनी जी, अभी भी एक सवाल बाकी है | अपने वाद के अनुसार पूछता हूँ| पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए 3 भाई एक नए शहर में बस गए| उन्होंने खुली नीलामी में अलग अलग कई संपतियां प्राप्त की, जो सभी 33x3 वर्ष की लीज पर प्राप्त हुई| इनमें से 2 भाइयों ने साझे नाम से भी 2-3 संपतियां प्राप्त की| अधिकतर प्लाट इन्होने शुरू के 12-15 सालों में विक्रय कर दिए| इन दो भाइयों में से एक ने अपने तन्हा नाम से प्राप्त एक प्लाट में अपने परिवार के साथ रिहाईश शुरू की, और दुसरे को भी उसके एक भाग में रहने के लिए बुला लिया (जिसे लाइसेंस का नाम दिया गया) | दुसरे भाई की मृत्यु १९७३ में हो गई (पर उसकी विधवा के नाम लाइसेंस जारी रहा) और उसके बाद २०१५ तक जारी रहा| इस बीच पहले भाई, दुसरे भाई की पत्नी और उसके पुत्रों की भी मृत्यु हो चुकी थी (लेकिन लाइसेंस जारी रहा)| उक्त प्लाट की पहले ३३ वर्ष की लीज 1989 में समाप्त होने बाद दोबारा नहीं बड़ी| २०१२ में सरकार की...