मुस्लिम क़ानून के तहत वैध तलाक को मान्यता देना फैमिली कोर्ट का दायित्व :राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाइकोर्ट ने कहा कि यदि मुस्लिम व्यक्तिगत क़ानून के अंतर्गत तलाक-उल-हसन या मुबारात के माध्यम से विवाह का विधिवत विघटन पहले ही हो चुका है तो फैमिली कोर्ट ऐसे तलाक को मान्यता देने और विवाह विच्छेद की घोषणा करने के लिए बाध्य है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की राहत को केवल अत्यधिक तकनीकी आधारों पर नकारा नहीं जा सकता । जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने यह टिप्पणी उस अपील पर सुनवाई करते हुए की, जो फैमिली कोर्ट द्वारा पत्नी की विवाह विच्छेद की घोषणा संबंधी याचिका खारिज किए जाने के आदेश के खिलाफ दायर की गई। याचिकाकर्ता पत्नी का कहना था कि उसका विवाह मुस्लिम क़ानून के तहत पहले ही समाप्त हो चुका है। उसने यह दलील दी कि पति द्वारा तलाक-उल-हसन के माध्यम से तीन चरणों में तलाक दिया गया। इसके अतिरिक्त दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से मुबारात का लिखित समझौता भी हुआ था। रिकॉर्ड के अनुसार, पति ने विवाह के दौरान तीन अलग-अलग तहर अवधियों में तलाक का उच्चारण किया पहला 8 जून 2024, दूसरा 8 जुलाई 2024 और तीसरा 8 अगस्त 2024 को जिसे ...