भरण-पोषण के लिए वयस्क बेटी का दावा CrPC की कार्यवाही में नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि- " परिवार न्यायालय, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) की धारा 125 के तहत दायर एक आवेदन पर सुनवाई करते हुए, हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 (HAMA) की धारा 20(3) के तहत किसी बालिग, अविवाहित बेटी को भरण-पोषण का आदेश नहीं दे सकता। " न्यायमूर्ति रजनीश कुमार की अध्यक्षता वाली अदालत ने स्पष्ट किया कि " HAMA के तहत भरण-पोषण का दावा एक दीवानी अधिकार है, जिसका निर्णय एक उचित सिविल वाद के माध्यम से होना चाहिए, न कि किसी संक्षिप्त आपराधिक कार्यवाही के जरिए। " इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिवार न्यायालय के आदेश को रद्द कर मामले को वापस भेजते हुए यह निर्देश जारी किया कि " आवेदन को कानून के अनुसार नए सिरे से निर्णय के लिए एक सिविल वाद में परिवर्तित किया जा सकता है. " निर्णित मामले में अनुराग पांडे द्वारा सुल्तानपुर के प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय के 30 जुलाई, 2024 के एक फैसले को चुनौती देते हुए दायर की गई. एक आपराधिक पुनरीक्षण याचिका से उत्पन्न हुआ। परिवार न्यायालय ने श्री पांडे को उनकी ब...