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महिलाओं के रोजगार पर पड़ सकता है उल्टा असर -सुप्रीम कोर्ट

 सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सभी कार्यस्थलों में महिलाओं के लिए पेड मेंस्ट्रुअल लीव (मासिक धर्म अवकाश) की मांग करने वाली एक याचिका का निस्तारण करते हुए केंद्र सरकार से कहा कि वह याचिकाकर्ता की ओर से दिए गए प्रतिनिधित्व पर सभी हितधारकों से परामर्श करके नीति बनाने पर विचार करे। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी चिंता जताई कि यदि कानून बनाकर मासिक धर्म अवकाश को अनिवार्य कर दिया गया तो इसका महिलाओं के रोजगार पर उल्टा असर पड़ सकता है। कोर्ट ने कहा कि इससे नियोक्ता महिलाओं को नौकरी देने से हिचक सकते हैं, जिससे कार्यबल में उनकी भागीदारी प्रभावित हो सकती है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता शैलेन्द्र मणी त्रिपाठी की लोकस स्टैंडी (याचिका दायर करने के अधिकार) पर भी सवाल उठाया और कहा कि इस मुद्दे पर स्वयं कोई महिला अदालत के सामने नहीं आई है। यह इसी मुद्दे पर याचिकाकर्ता द्वारा दायर की गई तीसरी याचिका थी। पहली याचिका फरवरी 2023 में निस्तारित की गई थी, जिसमें याचिकाकर्ता को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के समक्ष प्रतिनिधित्व देने की अनुमति दी गई थी। इसके बाद 2...