शनिवार, 18 दिसंबर 2010

पारस्परिक सहमति से विवाह विच्छेद/बालिका भ्रूण हत्या/विवाह पंजीयन

मेरी पिछली पोस्ट में मैंने आपको विवाह विच्छेद से सम्बंधित हिन्दू-मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों के विषय में बताया था .समयाभाव के कारण मैं हिन्दू महिलाओं का विवाह विधि संशोधन अधिनियम १९७६ की धारा १३ बी में वर्णित अधिकार बताने से चूक गयी थी .आज मैं उसके विषय में और बालिका भ्रूण हत्या  और विवाह पंजीयन से सम्बंधित छोटी सी जानकारी भी आपको दूँगी:
  1. -उपरोक्त अधिनियम की धारा १३ बी में पारस्परिक सहमति से भी विवाह विच्छेद किया जा सकता है.उसकी याचिका जिला अदालत में दायर की जाती है और याचिका प्रस्तुत किये जाने के ६ माह या १८ माह पश्चात् यदि वापस नहीं ली गयी तो न्यायालय सुनवाई व जाँच के पश्चात् जो उचित समझे वह निर्णय करता है.
  2. -देश में बालिका भ्रूण हत्या रोकने हेतु मादा भ्रूण का पता लगाने को रोकने के लिए प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम १९९४ बनाकर लागू कर दिया गया है.इसका उल्लंघन करने वालों पर १०-१५ हज़ार रूपये तक जुर्माना तथा ३ से ५ साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है.
-विवाह पंजीयन अनिवार्य विधेयक २००५ द्वारा प्रत्येक विवाह का पंजीकरण  अनिवार्य बनाकर महिलाओं की स्थिति में सुधार लाने हेतु राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा विधेयक तैयार किया गया है.
   आज के लिए बस इतना ही .बताइयेगा कि क्या मेरा ये प्रयास आपके लिए ज्ञान वर्धक साबित हो रहा है?

रविवार, 12 दिसंबर 2010

vivah vichchhed/talaq aur mahila adhikar

आज मैं आप सभी को जिस विषय में बताने जा रही हूँ उस विषय पर बात करना भारतीय परंपरा में कोई उचित नहीं समझता क्योंकि मनु के अनुसार कन्या एक बार ही दान दी जाती है किन्तु जैसे जैसे समय पलटा वैसे वैसे ये स्थितियां भी परिवर्तित हो गयी .महिलाओं ने इन प्रथाओं के कारण [प्रथाओं ही कहूँगी कुप्रथा नहीं क्योंकि कितने ही घर इन प्रथाओं ने बचाएं भी हैं] बहुत कष्ट भोगा है .हिन्दू व मुस्लिम महिलाओं के अधिकार इस सम्बन्ध में अलग-अलग हैं .
  सर्वप्रथम हम मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की बात करते हैं.पहले मुस्लिम महिलाओं को तलाक के केवल दो अधिकार प्राप्त थे १-पति की नपुन्संकता,२-परपुरुशगमन का झूठा आरोप[लियन]
किन्तु न्यायिक विवाह-विच्छेद [मुस्लिम विवाह-विच्छेद  अधिनियम१९३९]द्वारा मुस्लिम महिलाओं को ९ आधार प्राप्त हो गए हैं:
१-पति की अनुपस्थिति,
२-पत्नी के भरण-पोषण में असफलता,
३-पति को सात साल के कारावास की सजा,
४-दांपत्य दायित्वों के पालन में असफलता,
५-पति की नपुन्संकता,
६-पति का पागलपन,
७-पत्नी द्वारा विवाह की अस्वीकृति[यदि विवाह के समय लड़की १५ वर्ष से काम उम्र की हो तो वह १८ वर्ष की होने से पूर्व विवाह को अस्वीकृत  कर सकती है],
८-पति की निर्दयता,
९-मुस्लिम विधि के अंतर्गत विवाह विच्छेद के अन्य आधार,
    ऐसे ही हिन्दू विधि में विवाह विधि संशोधन अधिनियम १९७६ के लागू होने के बाद महिलाओं की स्थिति मज़बूत हुई है और पति द्वारा बहुविवाह व पति द्वारा बलात्कार,गुदा मैथुन अथवा पशुगमन  दो और आधार महिलाओं को प्राप्त हो गए हैं जबकि इससे पूर्व ११ आधार पति-पत्नी दोनों को प्राप्त थे.वे आधार हैं;
१-जारता, २-क्रूरता, ३-अभित्याग, ४ -धर्म-परिवर्तन, ५ -मस्तिष्क विकृत्त्ता  ,६--कोढ़ ,७-- रतिजन्य रोग ,८-संसार परित्याग, ९--प्रकल्पित मृत्यु ,१० -न्यायिक प्रथक्करण , ११- -दांपत्य अधिकारों के पुनर्स्थापन की आज्ञप्ति   का पालन न करना
   इस तरह अब हिन्दू महिलाओं को तलाक के १३ अधिकार प्राप्त है किन्तु जैसा की मैं आपसे पहले भी कह चुकी हूँ कि महिलाओं में अपने अधिकारों को लेकर कोई जागरूकता नहीं है वे घर बचाने के नाम पर पिटती रहती  हैं,मरती रहती हैं,सिसक सिसक कर सारी जिंदगी गुज़ार देती हैं यदि एक बार वे पुरुषों  को अपनी ताक़त का अहसास करा दें तो शायद इन घटनाओ पर कुछ रोक लग सकती है क्योंकि इससे पुरुषों  के  निर्दयी रवैय्ये को कुछ चुनौती तो मिलेगी.मैं नहीं चाहती आपका घर टूटे किन्तु मैं महिलाओं को भी टूटते नहीं देख सकती इसीलिए आपको ये जानकारी दे रही हूँ ताकि आपकी हिम्मत बढे और आप अपना और अपनी और बहनों का जीवन प्यार व विश्वास से सजा सकें...

शुक्रवार, 19 नवंबर 2010

women right

महिला  अधिकारों  के बारे में आगे मैं आपको जानकारी दूँगी आप ये जानकारी इस लिंक पर चटका कर ले सकते हैं;
1-women right-२
2-women right-३
3-women right-४
४-women right-5
5-women right-६
6-women right-७
 आप आज इन लिंक्स का अध्ययन करें,आगे मैं आपके लिए और जानकारी जल्दी ही लाऊँगी.

मंगलवार, 16 नवंबर 2010

women right in india

भारत  में  महिलाओं  की  स्थिति देखते हुए ये आवश्यक है कि उन्हें अपने अधिकारों का पता हो .आज से मैं आपको इस सम्बन्ध में मुझे जो अल्प जानकारी है दूँगी,कृपया बताएं कि सही कर रही हूँ या नहीं;आप इसके लिए मेरे इस लिंक का अध्ययन  करें ---women right in india 
         आप का यदि कोई प्रश्न  हो तो ज़रूर पूछें इस तरह आप मेरे ही ज्ञान में वृद्धि में सहयोग करेंगे.

शुक्रवार, 12 नवंबर 2010

rashtra vidhik sewa pradhikaran-2

पहली पोस्ट में मैने आपको निशुल्क कानूनी सहायता के विषय में बताया था,अब आज मैं आपको राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रदान की गयी अन्य सहायता की जानकारी दूँगी;आशा है आप लाभान्वित होंगे ;
निवारक एवं अन्य कानूनी सहायता-
  • कानूनी जागरूकता कार्यक्रम,
  • मुकदमेबाजी रहित गाँव,
  • कानूनी सहायका क्लिनिक,
  • पेरा लीगल स्वयं सेवक,
लोक अदालत का आयोजन निम्नलिखित मामलों के लिए किया जाता है-
  • १-वैवाहिक मामले,
  • २-वाहन दुर्घटना मामले,
  • ३-सिविल मामले,
  • ४-आपराधिक[शम्नीय अपराध] मामले ,
  • ५-वरिष्ठ नागरिकों की शिकायतें,
  • ६-श्रम सम्बन्धी विवाद,
  • ७-बैंक रिकवरी  मामले,
  • ८-मोबाइल सेलुलर कंपनियों  से विवाद,
  • ९-भूमि अधिग्रहण मामले,
  • १०-पेंशन  मामले,
  • ११-श्रमिकों के मुआवजे सम्बन्धी मामले,
  • १२-उपभोक्ता शिकायत मामले,
  • १३-हाऊसिंग;एवं स्लम को हटाने के मामले,
  • १४-बिजली के मामले ,
  • १५-टेलीफोन बिल विवाद,
  • १६-संपत्ति कर मामलों सहित नगर निगम मामले,
  • १७-महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम सम्बन्धी मामले
  • १८-असंगठित क्षेत्र  में कार्यरत श्रमिकों की शिकायतें,
  • १९-भारत के उच्चतम-न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों के समक्ष लंबित सिविल एवं शम्नीय आपराधिक मामले.
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:
सदस्य सचिव,राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण,
१२/११,जामनगर हाउस ,शान्ह्जहाँ रोड नई दिल्ली-११०००१
फोन-०११-२३३८६१७६,२३३८२७७८
उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों के सदस्य सचिव से संपर्क -०५२२-२२८६३९५
उच्चतम न्यायालय कानूनी सेवा समिति-०११-२३३८८३१३
   अभी तक प्राप्त जानकारी के अनुसार इतना ही ;

मंगलवार, 9 नवंबर 2010

rashtriya vidhik sewa pradhikaran

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण ९ नवम्बर को राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस के रूप में मनाता है.आज इसी दिन मैं अपने कानूनी ज्ञान ब्लॉग पर अपनी प्रथम प्रस्तुति के जरिये आपके लिए कुछ कानूनी जानकारियां एकत्र कर प्रस्तुत कर रही हूँ,यदि ये जानकारियां आपके किसी भी काम आ सकें तो मेरे लिए ख़ुशी की बात होगी:
  • राष्ट्रीय  विधिक सेवा प्राधिकरण का लक्ष्य है-"आर्थिक अथवा अन्य अक्षमताओं के कारण किसी भी व्यक्ति को न्याय प्रदान करने से वंचित नहीं किया जायेगा."
  • राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण निम्न तीन प्रकार से जनता की सेवा करता है -
  • १-कानूनी जानकारी द्वारा.
  • २-निशुल्क कानूनी सहायता द्वारा 
  • ३-लोक अदालत द्वारा
  • राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा निम्नलिखित को निशुल्क कानूनी सेवाएँ प्रदान की जाती हैं; 
  • महिलाओं  और बच्चों को,
  • अनुसूचित जाति एवं  janjati के  लोगों को
  • श्रमिकों को
  • हिरासत में लिए गए तथा मनोचिकित्सा अस्पतालों में भरती व्यक्तियों को ,
  • मानव खरीद फरोख्त गतिविधियों से पीड़ित व्यक्तियों को ,
  • आपदा,जातीय हिंसा,जातीय अत्याचार ,बढ़ ,सूखे भूकंप अथवा औद्योगिक आपदाओं से पीड़ित व्यक्तियों को ,
  • विकलांग व्यक्ति अधिनियम ,१९९५ के अनुसार विकलांग व्यक्तियों को,
  • वे व्यक्ति जिनकी वार्षिक आमदनी ५०,००० रूपये से अधिक न हो[उच्चतम न्यायालय में],
  • निशुल्क कानूनी सहायता में निम्न सेवाएँ सम्मिलित हैं:-
  • वकील की सेवाएँ;
  • न्यायालय की फीस;
  • टायपिंग तथा याचिकाएं/दस्तावेज बनवाने का खर्च;
  • संमन जारी करने एवं गवाही से सम्बंधित खर्च;
  • मुक़दमे से सम्बंधित अन्य आकस्मिक खर्च;
 आज के लिए बस इतना ही शेष आगे की पोस्ट में बताऊंगी आप यदि कुछ पूछना चाहें तो पूछ कर अनुग्रहित करें.