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April, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

संविधान पीठ के हवाले -सुप्रीम कोर्ट के सवाल-कानूनी स्थिति प्रश्न -2

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संविधान पीठ के हवाले -सुप्रीम कोर्ट के सवाल-कानूनी स्थिति प्रश्न -1

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Constitution bench to decide fate of Rajiv killers  राजीव गांधी के हत्यारों को फिलहाल जेल में ही रखने का उच्चतम न्यायालय ने फैसला किया है और इस सम्बन्ध में दोषियों की रिहाई का मसला संविधान पीठ को भेजते हुए अपने कुछ महत्वपूर्ण सवाल संविधान पीठ के सामने रखे हैं जिनका विवरण और उनके सम्बन्ध में कानूनी स्थिति कुछ इस प्रकार है - *उच्चतम न्यायालय का पहला प्रश्न ये है कि - प्रश्न-1 -क्या ताउम्र कैद की सजा भोग रहा उम्र कैदी रिहाई की मांग कर सकता है या फिर विशेष अपराधों में जिनमे फांसी की सजा ताउम्र कैद में तब्दील की गयी हो ऐसे दोषी की सजा माफ़ करने के बाद रिहा करने पर रोक लगायी जा सकती है ? कानूनी स्थिति -ताउम्र कैद की सजा भोग रहा उम्र कैदी रिहाई की मांग नहीं कर सकता .भारतीय दंड संहिता की धारा 57  में दिए गए आजीवन कारावास के प्रावधान के विषय में अभिमत व्यक्त करते हुए उच्चतम न्यायालय ने सुभाष चन्द्र बनाम कृष्णलाल एवं अन्य ए.आई.आर .2001  एस.सी.1903 में कहा -''कि इस दंड से दण्डित व्यक्ति को उसके जीवन पर्यन्त कारावास भोगना होगा जब तक कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा उसकी सजा लघुकरण या परिवर्तन न …

वसीयत सम्बन्धी हिन्दू विधि

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वसीयत सम्बन्धी हिन्दू विधि

श्रमजीवी महिलाओं को लेकर कानूनी जागरूकता.

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धारा ५०६ भारतीय दंड संहिता में दंडनीय है ये धमकी

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मोदी लहर में  ''हवा में उड़ता जाये मेरा लाल दुपट्टा  मलमल का '' की तर्ज़ पर लहराती इठलाती भाजपा ''यहाँ के हम सिकंदर ,चाहें तो रखें सबको अपनी जेब के अंदर ''गाने में मस्त थी की एकाएक लहर ने दिशा पलट दी ,फूलों के झौंके पत्थरों के टुकड़ों समान हो गए और भ्रम में डूबे भाजपाइयों के हंसगुल्लों की चाशनी इतनी मीठी हो गयी कि मुंह कड़वा करने लगी ऐसा हुआ तब जब भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार श्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव आयोग द्वारा अनिवार्य किये जाने पर बाध्य होकर अपनी वास्तविक स्थिति ,जो वैवाहिक की थी को नामांकन पत्र में भरा  ,उस वैवाहिक स्थिति को जिसे वे अपने चार विधानसभा चुनावों में नकारते आ रहे थे और जिसका खुलासा कॉंग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह जी ने किया नहीं तो संभव था कि वे अब भी चुनाव आयोग के निर्देश को दरकिनार कर स्वयं को अविवाहित दिखा देते क्योंकि चुनाव आयोग की उनके सामने क्या प्रास्थिति है सब जानते हैं और ऐसा वे और भाजपा इस बार ७ अप्रैल को अपना घोषणापत्र जारी कर दिखा चुके हैं . अब जब प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी के नशे में झूमते मोदी जी द्वारा स्व…

धारा ४९८-क भा. द. विधान 'एक विश्लेषण '

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धारा ४९८-क भा. द. विधान 'एक विश्लेषण '



विवाह दो दिलों का मेल ,दो परिवारों का मेल ,मंगल कार्य और भी पता नहीं किस किस उपाधि से विभूषित किया जाता है किन्तु एक उपाधि जो इस मंगल कार्य को कलंक लगाने वाली है वह है ''दहेज़ का व्यापार''और यह व्यापर विवाह के लिए आरम्भ हुए कार्य से आरम्भ हो जाता है और यही व्यापार कारण है उन अनगिनत क्रूरताओं का जिन्हें झेलने  को  विवाहिता स्त्री तो विवश है और विवश हैं उसके साथ उसके मायके के प्रत्येक सदस्य.कानून ने विवाहिता स्त्री की स्थति ससुराल में मज़बूत करने हेतु कई उपाय किये और उसके ससुराल वालों व् उसके पति  पर लगाम कसने को भारतीय दंड सहिंता में धारा ४९८-क स्थापित की और ऐसी क्रूरता करने वालों को कानून के घेरे में लिया, पर जैसे की भारत में हर कानून का सदुपयोग बाद में दुरूपयोग पहले आरम्भ   हो जाता है ऐसा ही धारा ४९८-क के साथ हुआ.दहेज़ प्रताड़ना के आरोपों में गुनाहगार के साथ बेगुनाह भी जेल में ठूंसे जा रहे हैं .सुप्रीम कोर्ट इसे लेकर परेशान है ही विधि आयोग भी इसे लेकर , धारा ४९८-क को यह मानकर कि यह पत्नी के परिजनों के हाथ में दबाव का एक ह…