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समलैंग‌िकता पर SC ने खार‌िज की याच‌िका-एक सराहनीय कदम

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समलैंग‌िकता पर SC ने खार‌िज की याच‌िका
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए ११ दिसंबर को भारतीय दंड सहिंता की धारा ३७७ को जायज़ ठहराया और समलैंगिक सम्बन्धों को अपराध .भारतीय दंड सहिंता की धारा ३७७ जिसमे कहा गया है कि -
''जो कोई किसी पुरुष ,स्त्री या जीव-जंतु के साथ प्रकृति की व्यवस्था के विरुद्ध स्वेच्छया इन्द्रिय भोग करेगा ,वह आजीवन कारावास से ,या दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी ,दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा .''
इस प्रकार यह एक ऐसा सम्भोग को अपराध घोषित करता है जो कि एक पुरुष दुसरे पुरुष के साथ ,एक स्त्री दूसरी स्त्री के साथ या एक पुरुष या स्त्री किसी पशु या जीव-जंतु के साथ गठित करता है .
और हद है कि जिस निर्णय की सर्वत्र तारीफ होनी चाहिए वह आलोचना का शिकार हो रहा है .
लोक व्यवस्था वह मुख्य प्रतिबन्ध है जिसे बनाये रखने के लिए नागरिकों के मूल अधिकारों में स्वतंत्रता के अधिकारों पर प्रतिबन्ध लगाया जा सकता है फिर ऐसे कृत्य को यदि विधायिका द्वारा या जनता के एक वर्ग के समर्थन द्वारा कानूनी जामा पह…

दिल्ली वापस केंद्रशासित हो

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संविधान के ६९ वे संशोधन अधिनियम १९९१ द्वारा संविधान में दो नए अनुच्छेद २३९ क क और २३९ क ख जोड़े गए हैं जिनके अधीन दिल्ली को एक नया दर्जा प्रदान किया गया .अनु.२३९ क क कहता है -
''कि संघ राज्य क्षेत्र दिल्ली को अब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के नाम से जाना जायेगा और अनुच्छेद २३९ के अधीन नियुक्त इसके प्रशासक को अब उपराज्यपाल कहा जायेगा .''
अनुच्छेद २३९ क क राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र के लिए एक विधान सभा सृजित करता है .विधान सभा में सदस्यों की संख्या और इसके कार्यों से सम्बंधित सभी मामलों को संसद विधि द्वारा विनियमित करेगी .
विधान सभा को राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र के सम्पूर्ण अथवा किसी भाग के लिए राज्य सूची अथवा समवर्ती सूची में विनिर्दिष्ट विषयों में से किसी के सम्बन्ध में विधि बनाने की शक्ति होगी किन्तु उसे राज्य सूची की प्रविष्टि १,२,१८ और ६४ ,६५ तथा ६६ के सम्बन्ध में विधि बनाने की शक्ति नहीं होगी .उपखण्ड [१] में का कुछ भी ,संघ राज्य क्षेत्र या उसके किसी भाग के मामले के सम्बन्ध में विधि बनाने के लिए संसद की शक्तियों का अल्पीकरण नहीं करेगी .
और राज्य सूची की …

धारा ३७५ -भारतीय दंड संहिता :एक आलोचनात्मक विश्लेषण

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The Indian Penal Code, 1860CitationAct No. 45 of 1860Territorial extentWhole of India except the State of Jammu and KashmirEnacted byParliament of IndiaDate enacted6 October 1860Date assented to6 October 1860Date commenced6 October 1860भारतीय दंड संहिता १८६० का अध्याय १६ का उप-अध्याय ''यौन अपराध ''से सम्बंधित है जिसमे धारा ३७५ कहती है-
[I.P.C.]
Central Government Act
Section 375 in The Indian Penal Code, 1860
375. Rape.-- A man is said to commit" rape" who, except in the case hereinafter excepted, has sexual intercourse with a woman under circumstances falling under any of the six following descriptions:-
First.- Against her will.
Secondly.- Without her consent.
Thirdly.- With her consent, when her consent has been obtained by putting her or any person in whom she is interested in fear of death or of hurt.
Fourthly.- With her consent, when the man knows that he is not her husband, and that her consent is given because she believes that he is another man to whom she i…

प्रधानमंत्री चयन सांसदों का विशेषाधिकार

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