वसीयत सम्बन्धी हिन्दू विधि
वसीयत सम्बन्धी हिन्दू विधि वसीयत अर्थात इच्छा पत्र एक हिन्दू द्वारा अपनी संपत्ति के सम्बन्ध में एक विधिक घोषणा के समान है जो वह अपनी मृत्यु के बाद सम्पन्न होने की इच्छा करता है। प्राचीन हिन्दू विधि में इस सम्बन्ध में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं होती किन्तु आधुनिक विद्वानों के अनुसार हिन्दू इच्छा पत्र द्वारा अपनी संपत्ति किसी को दे सकता है . वसीयत किसी जीवित व्यक्ति द्वारा अपनी संपत्ति के बारे में कानूनी घोषणा है जो उसके मरने के बाद प्रभावी होती है . वसीयत का पंजीकृत होना आवश्यक नहीं है पर दो साक्षियों द्वारा प्रमाणित होना आवश्यक है [माधव्य बनाम अचभा २ एम.एल.जे ७१६ ] प्रत्येक स्वस्थ मस्तिष्क वाला वयस्क व्यक्ति जिसने भारतीय वयस्कता अधिनियम १८७५ के अंतर्गत वयस्कता की आयु प्राप्त की है ,इच्छापत्र द्वारा अपनी संपत्ति का निवर्तन कर सकता है अर्थात किसी को दे सकता है [हरद्वारी लाल बनाम गौरी ३३ इलाहाबाद ५२५ ] वसीयत केवल उस संपत्ति की ही की जा सकती है जिसे अपने जीवित रहते दान रीति द्वारा अंतरित किया जा सकता हो ,ऐसी संपत्ति की वसीयत नहीं की जा सकती जिससे पत्नी का कानूनी अ...