वेस्ट यूपी में हाईकोर्ट बेंच रोकना अब किसी के बस में नहीं
संविधान का अनुच्छेद २१४ कहता है कि प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय होगा और १९५४ में गठित शीतलवाड़ लॉ कमीशन ने भी अपनी रिपोर्ट में साफ किया कि न्याय प्रशासनके उच्च मानदंडों को बनाये रखने के लिए यह आवश्यक है कि हाईकोर्ट एक ही स्थान पर कार्य करे .उच्च न्यायालय द्वारा सम्पादित किये जाने वाले कार्य की गुणवत्ता को बनाये रखने के लिए ऐसा आवश्यक है .लेकिन जो संवैधानिक स्थिति है वह स्पष्ट तौर पर शीतलवाड़ आयोग की सलाह को हमेशा दरकिनार करती हुई दिखाई देती है . इलाहाबाद हाईकोर्ट की ऐसा नहीं है कि यह पहली बार किसी बेंच के सम्बन्ध में मांग हो .इलाहाबाद हाईकोर्ट की पहले से ही एक खंडपीठ लखनऊ बेंच के रूप में कार्य कर रही है ,हालाँकि यह सत्य है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ शीतलवाड़ आयोग की रिपोर्ट से पहले की है . लेकिन सभी जगह ऐसा नहीं है .शीतलवाड़ आयोग १९५४ में गठित हुआ था और इसकी रिपोर्ट के बाद भी हाईकोर्ट की बेंच मध्य प्रदेश में व् राजस्थान में बनायीं गयी . The first Chief Justice was Kamala Kant Verma. A bench was formed at Jaipur on 31 Januar...