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संविधान पीठ के हवाले -सुप्रीम कोर्ट के सवाल-कानूनी स्थिति प्रश्न -7

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संविधान पीठ के हवाले -सुप्रीम कोर्ट के सवाल-कानूनी स्थिति प्रश्न -6

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प्रश्न -६ -क्या सरकार स्वयं से माफ़ी देने के अधिकार का इस्तेमाल कर सकती है या इसके लिए कानून में तय प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है ?
कानूनी स्थिति -सरकार स्वयं से माफ़ी देने के अधिकार का इस्तेमाल कर सकती है .इस सम्बन्ध में धारा ४३२ [१] में कहा गया है कि-
''जब किसी व्यक्ति को किसी अपराध के लिए दंडादेश दिया जाये तब समुचित सरकार किसी समय ,शर्तों के बिना या ऐसी शर्तों पर जिन्हें दण्डादिष्ट व्यक्ति स्वीकार करे ,उसके दंडादेश के निष्पादन का निलंबन या जो दंडादेश उसे दिया गया है उसका पूरे का या उसके किसी भाग का परिहार कर सकती है .''
      किन्तु जहाँ उसके लिए आवेदन किया गया है वहां धारा ४३२ कहती है -
[२] जब कभी समुचित सरकार के दंडादेश के निलंबन या परिहार के लिए आवेदन किया जाया तब समुचित सरकार उस न्यायालय के पीठासीन न्यायाधीश से ,जिसके समक्ष दोषसिद्धि हुई थी या जिसके द्वारा उसकी पुष्टि की गयी थी ,अपेक्षा कर सकेगी कि वह इस बारे में कि आवेदन मंजूर किया जाये या नामंजूर किया जाये ,अपनी राय ऐसी राय के लिए अपने कारणों सहित कथित करे और अपनी राय के कथन के साथ विचारण के अभिलेख की या उ…

संविधान पीठ के हवाले -सुप्रीम कोर्ट के सवाल-कानूनी स्थिति प्रश्न -5

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प्रश्न -५ -क्या सीआर.पी.सी.की धारा ४३२ [७] में माफ़ी देने में दो सरकारों [केंद्र और राज्य ] को उचित सरकार माना जायेगा ?
कानूनी स्थिति -धारा ४३२[७] कहती है -
[७] -इस धारा में और धारा ४३३ में 'समुचित सरकार '' पद से -
[क] उन दशाओं में जिनमे दंडादेश ऐसे विषय से सम्बद्ध किसी विधि के विरुद्ध अपराध के लिए है या उपधारा [६] में निर्दिष्ट आदेश ऐसे विषय से सम्बद्ध किसी विधि के अधीन पारित किया गया है ,जिस विषय पर संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार है ,केंद्रीय सरकार अभिप्रेत है ;
[२]-अन्य दशाओं में ,उस राज्य की सरकार अभिप्रेत है जिसमे अपराधी दण्डादिष्ट किया गया है या उक्त आदेश पारित किया गया है .
और संविधान का  अनुच्छेद २५४ कहता है कि यदि राज्य विधानमंडल द्वारा किसी समवर्ती सूची के विषय पर कानून बनाया जाता है ,जो कि संसद द्वारा इससे पूर्व या बाद में बनाये गए नियम के विरोध में है ,तो अनुच्छेद २५४ के खंड [२] के उपबंधों के अधीन रहते हुए संसद द्वारा निर्मित विधि प्रभावी होगी तथा राज्य विधान मंडल द्वारा निर्मित विधि विरोध की मात्रा तक शून्य होगी .
अनुच्छेद २५४ के खंड [२] के अनुसार यदि राज्य…

संविधान पीठ के हवाले -सुप्रीम कोर्ट के सवाल-कानूनी स्थिति प्रश्न -4

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संविधान पीठ के हवाले -सुप्रीम कोर्ट के सवाल-कानूनी स्थिति प्रश्न -3

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