संदेश

तू ------बस सोचकर बोलना

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जातिगत टिप्पणी और वह भी फोन पर ,आप यकीन नहीं करेंगे कि यह भी कोई अपराध हो सकता है ,पर आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि यह अपराध है अगर जातिगत टिप्पणी सार्वजानिक स्थल पर की गयी है ,ऐसा सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक हालिया जजमेंट में कहा है -



         अनुसूचित जाति व् जनजाति समुदाय के व्यक्ति के खिलाफ सार्वजानिक जगह पर फोन पर की गयी जातिगत टिप्पणी अपराध है ,इसमें पांच साल की सजा हो सकती है,व्यक्ति पर एक दलित समुदाय की महिला पर जातिगत टिप्पणी का आरोप था और उसने याचिका दायर कर महिला की प्राथमिकी रद्द करने की मांग की थी ,सुप्रीम कोर्ट ने यह साबित करने का भर भी उसी पर डाला कि वह यह साबित करे कि उसने सार्वजानिक स्थल पर बात नहीं की,
       तो अब संभल जाइये और अपनी बातचीत को कानूनी दायरे में ही रखकर कीजिये ,अन्यथा फंस सकते हैं और फंसने पर सबूत भी खुद देना होगा कि आपने ऐसी बातचीत की ही नहीं / 
शालिनी कौशिक
     [कानूनी ज्ञान ]


ई -रिक्शा चालकों के लिए खुशखबरी

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धारा 154 Cr.P.C.-पुलिस करे कड़ा अनुपालन

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विशाल अग्रवाल बनाम छत्तीसगढ़ स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड [2014 ]3 .एस.सी.सी.696 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रथम सूचना रिपोर्ट को पंजीकृत करना पुलिस प्राधिकारियों का कर्तव्य तथा उत्तरदायित्व है .पुलिस प्राधिकारी उसका अन्वेषण करने और इसके पश्चात् मजिस्ट्रेट के समक्ष इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए बाध्य होते हैं ,जो अन्वेषण के समाप्ति पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173 के अधीन पुलिस रिपोर्ट पर अपराध का संज्ञान लेने के लिए सशक्त होता है .
            इसी प्रथम सूचना रिपोर्ट के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 154  में कहा गया है कि -
[1 ] संज्ञेय अपराध किये जाने से संबंधित प्रत्येक इत्तिला यदि पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को मौखिक दी गयी है तो उसके द्वारा या उसके निदेशाधीन लेखबद्ध कर ली जाएगी और इत्तिला देने वाले को पढ़कर सुनाई जाएगी और प्रत्येक ऐसी इत्तिला पर ,चाहे वह लिखित रूप में दी गयी हो या पूर्वोक्त रूप में लेखबद्ध की गयी हो ,उस व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर किये जायेंगे ,जो उसे दे और उसका सार ऐसी पुस्तक में ,जो उस अधिकारी द्वारा ऐसे रूप में रखी जाएगी ,जिसे राज्य सरकार इस निमित्त …

अपहरण का दंड नहीं

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आमतौर पर आये दिन हम अपहरण -व्यपहरण सुनते रहते हैं .कानून में अपहरण के लिए Abduction व्  व्यपहरण के लिए Kidnapping शब्द है .हम अपहरण व् Kidnapping शब्द का ही इस्तेमाल करते हैं जबकि दोनों अलग-अलग शब्द हैं हमारे कानून भारतीय दंड संहिता में .
     भारतीय दंड संहिता की धारा 359 में व्यपहरण का वर्णन है जिसे अंग्रेजी में Kidnapping कहते हैं जबकि धारा 362 में अपहरण का वर्णन है जिसे अंग्रेजी में Abduction कहते हैं .व्यपहरण व् अपहरण दोनों अलग अपराध हैं ,वैसे हम आम तौर पर जो देखते हैं वह अपहरण Abduction होता है जिसके लिए धारा 362 में कहा गया है -
''जो कोई किसी व्यक्ति को किसी स्थान से जाने के लिए बल द्वारा विवश करता है, या किन्हीं प्रवंचनापूर्ण उपायों द्वारा उत्प्रेरित करता है ,वह उस व्यक्ति का अपहरण करता है ,यह कहा जाता है .''
     और कमाल इस बात का है कि इसे दंड संहिता में अपराध तो माना गया पर इसके लिए दंड निर्धारित नहीं किया गया .इसलिए यह अपराध ऐसा है जिसका भारतीय दंड संहिता में कोई दंड नहीं है ,यदि अपहरण का मकसद हत्या करना नहीं है ,यदि अपहरण का मकसद फिरौती मांगना नहीं है …

और बचा लो इज़्ज़त -बेटी तो फालतू है ना

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छेड़खानी महिलाओं विशेषकर स्कूल-कॉलेज जाने वाली छात्राओं के साथ प्रतिदिन होने वाला अपराध है जिससे परेशानी महसूस करते करते भी पहले छात्राओं द्वारा स्वयं और बाद में अपने परिजनों को बताने पर उनके द्वारा दरकिनार कर दिया जाता है किन्तु यही छेड़खानी कभी छात्रा के विरोध या छात्रा द्वारा पहले लड़के की पिटाई ,यहाँ तक की चप्पलों तक से पिटाई तक जाती है ,कभी कभी छात्रा के परिजनों द्वारा विरोध या फिर परिजनों के व् छेड़छाड़ करने वाले लड़के व् उसके समूह की मार-पिटाई तक पहुँच जाती है .कभी कभी रोज-रोज की छेड़छाड़ से तंग आ छात्रा आत्महत्या कर लेती है और कभी लड़के द्वारा छात्रा की हत्या की परिस्थिति भी सबके समक्ष यह चुनौती बन खड़ी हो जाती है कि अब हम अपनी बेटियों को कैसे पढ़ाएं ?
    अभी 10  दिसंबर 2017 को ही कांधला कस्बे में स्टेट बैंक के पास कोचिंग सेंटर में जाती छात्रा को छेड़ने पर लड़के को छात्रा से ही चप्पलों से पिटना पड़ा था किन्तु अभी कल 13  दिसंबर 2017 को कांधला के गांव गढ़ीश्याम में गांव के अमरपाल ने गांव की ही 16 वर्षीय सोनी को 50  छात्राओं के बीच से खींचकर बलकटी से मार दिया और वहशीपन इतना ज्यादा था कि …

कानूनन भी नारी बेवकूफ कमजोर ,पर क्या वास्तव में ?

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नारी की कोमल काया व् कोमल मन को हमारे समाज में नारी की कमजोरी व् बेवकूफी कह लें या काम दिमाग के रूप में वर्णित किये जाते हैं .नारी को लेकर तो यहाँ तक कहा जाता है कि इसका दिमाग घुटनों में होता है और नारी की यही शारीरिक व् मानसिक स्थिति है जो उसे पुरुष सत्ता के समक्ष झुके रहने को मजबूर कर देती है लेकिन ऐसा नहीं है कि केवल हमारे समाज की नज़रों में ही नारी कमजोर व् बेवकूफ है बल्कि हमारा कानून भी उसे इसी श्रेणी में रखता है और कानून की नज़रें दिखाने को भारतीय दंड संहिता की ये धाराएं हमारे सामने हैं -
*धारा 493 -हर पुरुष जो किसी स्त्री को ,जो विधि पूर्वक उससे विवाहित न हो ,प्रवंचना से यह विश्वास कारित करेगा कि वह विधिपूर्वक उससे विवाहित है और इस विश्वास में उस स्त्री का अपने साथ सहवास या मैथुन कारित करेगा ,वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से ,जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी ,दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा .
*धारा 497 -जो कोई ऐसे व्यक्ति के साथ ,जो कि किसी अन्य पुरुष की पत्नी है ,और जिसका किसी अन्य पुरुष की पत्नी होना वह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है ,उस पुरुष…