ADVOCATE"S POWER
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक एडवोकेट के खिलाफ बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा की गई प्रतिकूल टिप्पणी (Adverse Remark) को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब संबंधित राज्य बार काउंसिल ने पेशेवर कदाचार (Professional Misconduct) की शिकायत को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया था और उस फैसले की पुष्टि खुद BCI ने भी कर दी थी, तब अधिवक्ता को चेतावनी देना पूरी तरह अनुचित था। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। मामला उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिला अदालतों में प्रैक्टिस करने वाले एक अधिवक्ता से जुड़ा था। अधिवक्ता के खिलाफ Advocates Act, 1961 की धारा 35 के तहत पेशेवर कदाचार की शिकायत दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता अधिवक्ता की बहन का पति था, जिसने आरोप लगाया था कि पारिवारिक विवाद और वैवाहिक तनाव के चलते अधिवक्ता ने उसे जान से मारने की धमकी दी और डराने-धमकाने का प्रयास किया। हालांकि, Uttar Pradesh State Bar Council ने शिकायत को झूठा और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए खारिज कर दिया था। राज्य बार काउंसिल ने माना कि शिकायत केवल अधिवक्ता को परेशान करने ...