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Dowry Death Allahabad high court Judgment लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

दहेज हत्या में उम्रकैद दुर्लभ से दुर्लभतम मामलों में ही - इलाहाबाद हाइकोर्ट लखनऊ खंडपीठ

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  इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने फैसला सुनाया कि  IPC की धारा 304-B ​​के तहत दहेज हत्या के अपराध के लिए अधिकतम सज़ा, यानी आजीवन कारावास, को "सामान्य प्रक्रिया" के तौर पर नहीं थोपा जाना चाहिए। इसके बजाय, यह 'कठोरतम' सज़ा केवल "दुर्लभतम से दुर्लभ" मामलों में ही दी जानी चाहिए। जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने 2012 के एक दहेज हत्या मामले में पति और उसके माता-पिता की दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए यह टिप्पणी की। हालांकि, खंडपीठ ने 'आनुपातिक सज़ा' के सिद्धांत को लागू करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई उनकी सज़ाओं को कम किया। ट्रायल कोर्ट ने सास को आजीवन कारावास और पति व ससुर को 20 साल की सज़ा सुनाई थी; खंडपीठ ने इस सज़ा को घटाकर उस अवधि के बराबर कर दिया, जितनी अवधि वे पहले ही जेल में बिता चुके थे। खंडपीठ के सामने मुख्य सवाल यह था कि  " क्या मौजूदा मामले की परिस्थितियों में आजीवन कारावास की कठोरतम सज़ा देना उचित है?" हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि  IPC की धारा 304-B ​​के तहत दोष/अपराध मुख्य रूप से साक्ष्य अधिनियम (Evide...