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दूसरे वकील को आवंटित चैंबर का इस्तेमाल करने वाले वकील का कैसा अधिकार -सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फ़ैसले में दखल देने से इनकार किया, जिसमें कहा गया था कि  बार एसोसिएशन संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत "राज्य" या राज्य की कोई संस्था नहीं है, क्योंकि यह वकीलों का एक निजी निकाय है जो सार्वजनिक कार्य नहीं करता। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की बेंच ने वकील संगीता राय द्वारा दायर SLP (विशेष अनुमति याचिका) को खारिज कर दिया, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के फ़ैसले को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया और निर्देश दिया कि यह राशि पटियाला कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन को दी जाए। कोर्ट ने एक चैंबर पर कब्ज़े को लेकर हुए विवाद पर रिट याचिका दायर करने के लिए राय की आलोचना की। जस्टिस नरसिम्हा ने टिप्पणी की, "सिर्फ़ इसलिए कि आपको वकील होने का विशेषाधिकार मिला है, आपके हर काम को अधिकार के तौर पर नहीं देखा जाएगा। हम किसी अन्य मुवक्किल की याचिका पर भी विचार नहीं करते। वकीलों को दो कदम पीछे और दो कदम नीचे रहना चाहिए, इस अर्थ में कि आप वकील होने के विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसलिए आपके कंधों पर एक बड़ी ज़िम्मेदारी ...