पत्नी को अंतरिम गुज़ारा-भत्ता देने से इनकार किया जा सकता है-सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई 2026 को कहा कि
CrPC की धारा 125 के तहत पत्नी को अंतरिम गुज़ारा-भत्ता देने से इनकार किया जा सकता है, अगर पति शुरुआती स्तर पर ही पत्नी के एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर (व्यभिचार) को साबित कर देता है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि पति CrPC की धारा 125(4) के तहत शुरुआती स्तर पर ही पुख्ता सबूतों से पत्नी का व्यभिचार (एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर) साबित कर देता है, तो पत्नी को अंतरिम गुज़ारा-भत्ता पाने का अधिकार नहीं है।
⚫ मामले की पृष्ठभूमि:
पति ने 2014 में शादी के बाद 2020 में अलग होने के बाद पत्नी पर व्यभिचार का आरोप लगाया था; निचली अदालत व हाईकोर्ट ने कहा था कि एडल्टरी का मुद्दा मुख्य सुनवाई के दौरान ही परखा जाएगा, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बदल दिया।
➡️ मुख्य बिंदु और अदालत का फैसला पक्षकार :
⚫ हिमांशु चौरड़िया (पति) बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य (पत्नी)।
⚫ पीठ (Bench): जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली।
⚫ निर्णय का आधार: अदालत ने कहा कि निचली अदालतें और हाईकोर्ट यह मानकर गलती नहीं कर सकते कि व्यभिचार के आरोपों पर केवल अंतिम फैसले के वक्त ही विचार होगा। यदि शुरुआती स्तर पर ही साक्ष्य उपलब्ध हैं, तो अंतरिम गुजारा-भत्ता तय करने से पहले इस पर विचार करना जरूरी है।
➡️ निजी जासूसों पर टिप्पणी: कोर्ट ने matrimonial विवादों में सबूत जुटाने के लिए प्राइवेट डिटेक्टिव (निजी जासूसों) के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताई.
⚫ कानून आयोग को निर्देश: कोर्ट ने केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय और भारतीय विधि आयोग (Law Commission) को निजी डिटेक्टिव एजेंसियों के नियमन और गोपनीयता के सुरक्षा उपायों की जांच करने का निर्देश दिया।
द्वारा
शालिनी कौशिक
एडवोकेट
कैराना (शामली)

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