गुजरात UCC 2026 -बंद हो जायेगा हलाला


गुजरात सरकार ने बुधवार को 'गुजरात समान नागरिक संहिता (UCC), 2026' विधेयक विधानसभा में पेश कर दिया। इसके साथ ही गुजरात ने यूसीसी लागू करने वाला दूसरा राज्य बनने की ओर तेजी से कदम बढ़ा दिया है। विधानसभा से बिल के पारित होने के बाद धर्म, जाति या पंथ की परवाह किए बिना विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और सहजीवन संबंध से संबंधित कानून एक जैसे होंगे।

गुजरात समान नागरिक संहिता UCC 2026 विधेयक के मसौदे में शादी, तलाक, लिव इन रिलेशनशिप जैसे मामलों में कई अहम प्रावधान किए गए हैं। बिल में मुस्लिम महिलाओं को ध्यान में रखकर भी कुछ प्रावधान किए गए हैं। खासकर हलाला प्रथा पर रोक लगाने की व्यवस्था की गई है। मसौदे में कहा गया है कि कोई दंपति तलाक के बाद बिना किसी शर्त दोबारा विवाह कर सकता है। इसमें कहा गया है, 'दोबारा विवाह के अधिकार में तलाक लेने वाले साथी से ही फिर विवाह का अधिकार शामिल है और इसके लिए किसी तरह की शर्त नहीं होगी, जैसे दोबारा मिलन से पहले किसी तीसरे से शादी करना।' सूत्रों का कहना है कि मुस्लिम समाज में प्रचलित हलाला प्रथा को रोकने के लिए इस तरह का प्रावधान किया गया है। यदि कोई इस नियम का उल्लंघन करता है तो तीन साल तक की जेल हो सकती है या एक लाख रुपये का जुर्माना देना पड़ सकता है।

🌑 हलाला प्रथा

    मुस्लिम समाज में निकाह हलाला नाम की एक प्रथा प्रचलित है। जिसमें ज़ब कोई मुस्लिम पुरुष अपनी पत्नी को तलाक दे देता है और फिर वह महिला या पुरुष दोबारा निकाह करना चाहते हैँ तो निकाह करने से पहले हलाला की प्रक्रिया से गुजरना होता है। इसके तहत महिला को पहले किसी तीसरे मर्द से निकाह करना होता है और शारीरिक संबंध भी स्थापित करना होता है। इसके बाद उस तीसरे पुरुष द्वारा तलाक दिए जाने पर वह अपने पहले पति से निकाह कर सकती है।

🌑 विधेयक के अन्य प्रमुख प्रावधान

इस विधेयक के प्रमुख प्रावधानों में वैध विवाह के लिए शर्तें निर्धारित की गई हैं

1️⃣  द्विविवाह पर प्रतिबंध, 

2️⃣ पुरुषों के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष निर्धारित करना 

3️⃣ लिव इन रिलेशनशिप के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य ।

🌑 गुजरात के बाहर रहने वाले नागरिक भी दायरे में, किन्हें दी गई छूट

'गुजरात समान नागरिक संहिता, 2026' नामक प्रस्तावित कानून पूरे राज्य में लागू होगा और गुजरात की सीमा से बाहर रहने वाले निवासी भी इसके दायरे में होंगे। हालांकि, विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किए गए विधेयक के दस्तावेज में कहा गया है कि यह अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों और कुछ ऐसे समूहों पर लागू नहीं होगा, जिनके पारंपरिक अधिकार संविधान के तहत संरक्षित हैं। इसमें कहा गया है,'वर्तमान विधेयक धर्म, जाति, पंथ या लैंगिक भेदभाव के बिना राज्य के सभी नागरिकों के लिए नागरिक मामलों को नियंत्रित करने वाला एक समान कानूनी ढांचा प्रदान करके इन सिफारिशों को प्रभावी बनाने का प्रयास करता है। इसका उद्देश्य धर्मनिरपेक्षता, लैंगिक न्याय और सामाजिक सुधार के सिद्धांतों को कायम रखना है, जिससे समाज की एकता एवं अखंडता मजबूत हो.

इस प्रकार प्राप्त जानकारी के अनुसार उम्मीद है कि इस विधेयक पर बजट सत्र के अंतिम दिन यानी 25 मार्च को चर्चा और अनुमोदन के लिए विचार किया जाएगा। इसलिए 25 मार्च 2026 को विधेयक के पास होने की संभावना है.

स्रोत -हिंदुस्तान न्यूज़ 19 मार्च 2026

प्रस्तुति 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट 

कैराना (शामली )

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