वकीलों के लिए यूनिफाइड वेरिफिकेशन सिस्टम हेतु याचिका

 


वकीलों के लिए यूनिफाइड और राष्ट्रव्यापी वेरिफिकेशन सिस्टम (Unified Verification System) लागू करने की मांग वाली याचिका भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) में दायर की गई है。 

➡️ जनहित याचिका (PIL) से जुड़े कुछ मुख्य बिंदु :

याचिकाकर्ता: यह याचिका सुप्रीम कोर्ट की वकील योगमाया एम.जी. (Yogamaya M.G.) द्वारा एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड दीपक प्रकाश के माध्यम से दायर की गई है。

मुख्य मांग: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को एक पारदर्शी, राष्ट्रव्यापी और समान वेरिफिकेशन सिस्टम बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है, जिसमें वकीलों की शैक्षणिक योग्यता, नामांकन रिकॉर्ड और अभ्यास की स्थिति को प्रमाणित किया जा सके。

राष्ट्रीय डेटाबेस: इसके तहत बार काउंसिल ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर सभी सत्यापित वकीलों का निजता-अनुपालन (privacy-compliant) वाला एक केंद्रीकृत डेटाबेस तैयार करने की भी मांग की गई है。

पृष्ठभूमि: यह याचिका बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के उस हालिया बयान के बाद दायर की गई है, जिसमें देश में बड़ी संख्या में फर्जी वकीलों (Fake Advocates) के अभ्यास करने की बात सामने आई थी。

वकीलों के लिए यूनिफाइड वेरिफिकेशन सिस्टम (Unified Verification System) एक प्रस्तावित केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे देश भर के अधिवक्ताओं (Advocates) की साख, शैक्षणिक योग्यता और बार काउंसिल पंजीकरण को पारदर्शी तरीके से प्रमाणित और प्रबंधित करने के लिए परिकल्पना की गई है. जाली वकीलों और फर्जी डिग्री की समस्या से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं के अनुसार, इस प्रणाली में निम्नलिखित विशेषताएं शामिल होंगी: 

1️⃣ एकीकृत डेटाबेस (Unified Database): देश के सभी वकीलों का एक केंद्रीकृत और राष्ट्रीय स्तर का डिजिटल प्लेटफॉर्म होगा, जिसमें राज्यों के बार काउंसिल आपस में जुड़ेंगे。

2️⃣ डिजिटल पहचान (Digital Identity): सभी सत्यापित वकीलों को बार काउंसिल द्वारा एक डिजिटल एनरोलमेंट नंबर और एक विशिष्ट पहचान पत्र (Unified ID) जारी किया जाएगा。

3️⃣ शैक्षणिक जांच (Educational Background Checks): इसमें वकीलों की दसवीं से लेकर लॉ (LLB) तक की सभी डिग्री और शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच विश्वविद्यालयों और संबंधित शिक्षण संस्थानों से सीधे डिजिटल रूप से सत्यापित की जाएगी。

4️⃣ सत्यापन की स्थिति (Verification Status): यह प्रणाली वकीलों के पास मौजूद 'प्रैक्टिस का प्रमाणपत्र' (Certificate of Practice - COP) और उनके वास्तविक अभ्यास की स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाएगी。

5️⃣ निजता का ध्यान (Privacy Compliant): वकीलों के आधिकारिक विवरण को सार्वजनिक करने के साथ-साथ उनके व्यक्तिगत संवेदनशील डेटा की निजता (Privacy) सुनिश्चित की जाएगी。 

इस तरह के सिस्टम का मुख्य लक्ष्य न्याय व्यवस्था की अखंडता को बनाए रखना, फर्जी वकीलों पर लगाम लगाना और अदालतों के साथ-साथ आम जनता के बीच कानूनी पेशे की विश्वसनीयता को मजबूत करना है。

द्वारा 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट 

कैराना (शामली) 

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