सुप्रीम कोर्ट ने मनन मिश्रा को दे दिया अल्टीमेटम

 


सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा से कहा कि 

"आप लोकतांत्रिक रूप से चुने गए पदाधिकारी नहीं हैं, बल्कि केवल एक प्रो-टेम (अस्थाई) चेयरमैन हैं." 

इसी के साथ शीर्ष अदालत ने कहा कि 

राज्य बार काउंसिलों का गठन जल्द पूरा होने से BCI के नए पदाधिकारियों का चुनाव भी कराया जा सकेगा और मनन मिश्रा के कार्यकाल से जुड़े उठाए गए ज्यादातर सवालों का समाधान हो सकता है।

➡️ मुख्य बातें और निर्देश

✒️ दैनिक कामकाज: अदालत ने स्पष्ट किया कि 

प्रो-टेम चेयरमैन होने के नाते मनन मिश्रा केवल बीसीआई (BCI) के दिन-प्रतिदिन के कामकाज को ही संभाल सकते हैं।

✒️ नीतिगत फैसले: कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि 

बड़े और महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले लेते समय भारत के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को शामिल किया जाएगा।

✒️ चुनाव प्रक्रिया: सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बार काउंसिलों के गठन और नए पदाधिकारियों के चुनाव के लिए 5 सप्ताह की सख्त समयसीमा तय की है, ताकि जल्द से जल्द नए बीसीआई (BCI) पदाधिकारियों का चुनाव हो सके। कोर्ट ने कहा कि 

राज्य बार काउंसिलों का गठन जल्द पूरा होने से BCI के नए पदाधिकारियों का चुनाव भी कराया जा सकेगा और मिश्रा के कार्यकाल से जुड़े उठाए गए ज्यादातर सवालों का समाधान हो सकता है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से कहा कि

 वे दो सप्ताह के भीतर राज्य बार काउंसिलों में दो महिला सदस्यों का को-ऑप्शन पूरा करें। इसके बाद संबंधित राज्य बार काउंसिलों को एक सप्ताह के भीतर अपनी नई संरचना अधिसूचित करनी होगी। नई संरचना की अधिसूचना के बाद राज्य बार काउंसिलों को तीन सप्ताह के भीतर चेयरमैन, वाइस चेयरमैन, अन्य पदाधिकारियों और BCI के एक प्रतिनिधि का चुनाव करना होगा। 

कोर्ट ने कहा कि 

इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद वह BCI की नई संरचना के मुद्दे पर विचार करेगा। मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी और तब तक दिए गए निर्देशों के अनुपालन की स्थिति देखी जाएगी।

सुनवाई के दौरान BCI द्वारा यह अंडरटेकिंग देने पर कि

 बड़े नीतिगत फैसले लेने से पहले भारत के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को इसमें शामिल किया जाएगा। 

कोर्ट ने कहा कि

 दोनों पदाधिकारी BCI के पदेन सदस्य हैं और महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों में उनकी सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए। 

जस्टिस बागची ने कहा कि 

मनन कुमार मिश्रा फिलहाल नए निर्वाचित BCI के गठन तक प्रो-टेम चेयरमैन की भूमिका में हैं। ऐसे में उन्हें रोजमर्रा के कामकाज का अधिकार है, लेकिन महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को शामिल किया जाना चाहिए।

द्वारा 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट 

कैराना (शामली) 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मृतक का आश्रित :अनुकम्पा नियुक्ति

बार कौंसिल ऑफ़ उत्तर प्रदेश चुनाव 2025-26( सम्पूर्ण जानकारी )

COP लेना है, पर कैसे