बाईक से पटाखा फोड़ने वाले हो जाएं सावधान



हिन्दुस्तान दैनिक 18 अप्रैल 2026 मे प्रकाशित समाचार के अनुसार ध्वनिप्रदूषण और सड़क सुरक्षा को लेकर परिवहन - आयुक्त ने निर्देशों के क्रम में महकमे ने वाहन डीलरों व मोटर गैराज/वर्कशॉप संचालकों की बैठक बुलाकर कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि मोडिफाइड साइलेंसर, प्रेशर हॉर्न (हूटर) की बिक्री या फिटिंग करने वालों पर मोटरयान अधिनियम के तहत प्रति मामले एक, लाख रुपये तक का जुर्माना लगेगा। यही नहीं, यदि कोई वाहन स्वामी अपने वाहन में पुर्जों की फिटिंग द्वारा इस प्रकार का अवैध परिवर्तन करता है, तो उसे 6 माह तक की जेल या 5 हजार रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। इसके साथ ही जो कोई व्यक्ति किसी सार्वजानिक स्थान में ऐसा मोटर यान चलाएगा, अथवा चलाने देगा जिससे सड़क सुरक्षा, शोर नियंत्रण एवं वायु प्रदूषण के सम्बन्ध में विहित मानकों का उल्लंघन होता हैं, उनके विरूद्ध भी मोटरयान अधिनियम के तहत विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। इसमें संबंधित व्यक्ति, पहले अपराध के लिए ही तीन माह तक की जेल या दस हजार रूपये तक के जुमनि या दोनों से दंडित किया जाएगा और उसका लाइसेंस, तीन माह की अवधि के लिए निरर्हित कर दिया जाएगा।

➡️ एआरटीओ प्रशासन मानवेंद्र प्रताप सिंह ने वाहन चालकों से की अपील-

एआरटीओ प्रशासन मानवेंद्र प्रताप सिंह ने वाहन स्वामियों से अपील करते हुए कहा है कि मोडिफाइड साइलेंसर, प्रेशर हॉर्न (हूटर) आदि को अपनी वाहनों पर न लगाये अन्यथा विधिक कार्यवाही और जेल व जुर्माना होना तय है।

➡️ मॉडिफाइड साइलेंसर (Modified Silencer) क्या है - 

मॉडिफाइड साइलेंसर (Modified Silencer) वाहन के मूल (Stock) साइलेंसर को हटाकर लगाया गया एक आफ्टरमार्केट एग्जॉस्ट सिस्टम है, जो बाइक या कार से बहुत तेज, गूंजने वाली या पटाखों जैसी आवाज (120 डेसिबल तक) निकालता है। यह स्टाइल और तेज आवाज के लिए लगवाया जाता है, लेकिन भारत में यह गैरकानूनी है और इससे भारी जुर्माना या कानूनी कार्रवाई हो सकती है। 

➡️ मॉडिफाइड साइलेंसर के बारे में मुख्य बातें:

आवाज: ये सामान्य साइलेंसर की तुलना में बहुत ज्यादा शोर करते हैं, जो ध्वनि प्रदूषण फैलाते हैं।

प्रकार: कोबरा, डॉल्फिन, शार्क, मिनी पंजाब, और इंदौरी जैसे नामों से बाजार में उपलब्ध हैं।

नुकसान: इनके इस्तेमाल से वायु प्रदूषण बढ़ता है और ये इंजन के परफॉर्मेंस पर भी असर डाल सकते हैं।

कानूनी स्थिति: भारत में मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicle Act) के तहत ऐसे बदलाव अवैध हैं, और पुलिस इनके खिलाफ चालान की कार्यवाही करती है।

➡️ मॉडिफाइड साइलेंसर (Modified Silencer) को लेकर कानूनी स्थिति - 

भारत में वाहनों में मॉडिफाइड साइलेंसर (Modified Silencer) या तेज आवाज (Loud Exhaust) वाले साइलेंसर लगवाना पूरी तरह से गैरकानूनी (Illegal) है। मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) के तहत ऐसे बदलाव करना अपराध माना जाता है। 

इससे जुड़े प्रमुख कानूनी प्रावधान, जुर्माना और नियम नीचे दिए गए हैं:

1. कानूनी प्रावधान (Legal Provisions)

मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (धारा 190(2)): यह धारा वाहन में ऐसे किसी भी बदलाव को प्रतिबंधित करती है जो निर्धारित मानकों (emission standards/noise levels) का उल्लंघन करते हैं।

केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 (नियम 110): यह नियम वाहनों के लिए शोर की सीमा निर्धारित करता है। मॉडिफाइड साइलेंसर इस सीमा से अधिक ध्वनि (Noise Pollution) पैदा करते हैं, जो अवैध है।

पर्यावरण (संरक्षण) नियम, 1986: इसके अनुसार, दोपहिया वाहनों के लिए ध्वनि की अधिकतम सीमा 80 डेसिबल है, जबकि मॉडिफाइड साइलेंसर अक्सर 120 डेसिबल से अधिक आवाज करते हैं।

न्यायालय के निर्देश: उच्च न्यायालयों ने भी ध्वनि प्रदूषण को देखते हुए तेज आवाज वाले साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. 

2. जुर्माना और दंड (Penalty and Fine)

     मॉडिफाइड साइलेंसर के इस्तेमाल पर भारी जुर्माना लग सकता है: 

✒️ जुर्माना: धारा 190(2) और अन्य प्रावधानों के तहत ₹10,000 से ₹15,000 तक का चालान काटा जा सकता है।

✒️ वाहन जब्ती: ट्रैफिक पुलिस मॉडिफाइड साइलेंसर वाली बाइक को जब्त (Impound) कर सकती है।

✒️ साइलेंसर की जब्ती: पुलिस अवैध साइलेंसर को मौके पर ही निकलवाकर जब्त कर सकती है और उसे नष्ट भी कर सकती है।

   इसलिए अब मॉडिफाइड साइलेंसर के इस्तेमाल करने वाले सावधान हो जाएं और पटाखा छोड़ने के लिए अपनी बाईक का उपयोग बंद कर दें, अन्यथा कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. 

प्रस्तुति 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट 

कैराना (शामली) 


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