साप्ताहिक बंदी में बाजार - क्या कहता है कानून

 


कांधला कस्बे में साप्ताहिक बंदी के दौरान चार खंबा रोड पर बाजार लगाए जाने की समस्या स्थानीय व्यापार मंडल के समक्ष उपस्थित हुई है और इसे लेकर व्यापारी भाइयों का बैठकों का दौर जारी हो गया है.

     उत्तर प्रदेश में किसी व्यापार मंडल के क्षेत्र में दूसरा व्यापार मंडल या कोई भी पक्ष कानूनी रूप से साप्ताहिक बंदी के दिन बाजार या दुकानें नहीं लगा सकता। साप्ताहिक बंदी का निर्धारण व्यापार मंडलों द्वारा नहीं, बल्कि जिला प्रशासन द्वारा उत्तर प्रदेश दुकान एवं वाणिज्यिक अधिष्ठान अधिनियम, 1962 के तहत किया जाता है।

➡️ कानूनी स्थिति और नियम:

प्रशासनिक आदेश:

 जिले के जिलाधिकारी (District Magistrate) तय करते हैं कि किस क्षेत्र में बाजार या दुकानें किस दिन बंद रहेंगी। यह आदेश पूरे क्षेत्र के सभी व्यापारियों और बाजारों पर समान रूप से लागू होता है।

व्यापार मंडल की भूमिका:

 व्यापार मंडल केवल व्यापारियों की संस्थाएं होती हैं। इन्हें सरकार या प्रशासन के तय किए गए साप्ताहिक बंदी के नियमों को बदलने या तोड़ने का कोई कानूनी अधिकार नहीं होता है।

दूसरा व्यापार मंडल:

 यदि क्षेत्र में कोई दूसरा व्यापार मंडल या उसका कोई सदस्य बंदी के दिन बाजार लगाता है या दुकानें खोलता है, तो वह सरकारी आदेश का उल्लंघन माना जाएगा।

➡️ उल्लंघन पर कार्रवाई:

कानूनी कार्रवाई: 

साप्ताहिक बंदी के नियमों को तोड़ने पर श्रम विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा उत्तर प्रदेश दुकान एवं वाणिज्यिक अधिष्ठान अधिनियम के प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है या जुर्माना लगाया जा सकता है।

अपवाद

यदि प्रशासन द्वारा कुछ विशेष श्रेणियों या ऑनलाइन अनुमति प्राप्त प्रतिष्ठानों को छूट दी गई हो, तभी बाजार खुल सकता है, अन्यथा सामान्य स्थिति में बंदी अनिवार्य है।

द्वारा 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट 

कैराना (शामली) 



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