दागी वकीलों पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की सख्त कार्रवाई
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जघन्य अपराधों के आरोपी वकीलों की वकालत पर मुकदमा खत्म होने तक रोक लगाने का सख्त निर्देश दिया है।
⚫ यह फैसला मोहम्मद कफील बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (Mohammad Kafeel v. State of UP) के मामले में दिया गया है।
➡️ मुख्य नियम और निर्देशप्रैक्टिस पर रोक:
7 साल या उससे अधिक सजा वाले गंभीर/जघन्य अपराधों के आरोपी वकील कोर्ट में पेश नहीं हो सकेंगे और उनका एनरोलमेंट/वकालत का काम मामले के फैसले तक निलंबित रहेगा.
⚫ छूट:
यह नियम पारिवारिक और वैवाहिक मामलों पर लागू नहीं होगा।
⚫ केस ट्रांसफर:
ऐसे दागी वकीलों से जुड़े आपराधिक मुकदमे सुनवाई के लिए उनके गृह जिले से लगभग 100 किलोमीटर दूर दूसरे जिले की नामित अदालत में ट्रांसफर किए जाएंगे।
⚫ मुवक्किलों की सुरक्षा:
मुवक्किल को अपनी पसंद का दूसरा वकील चुनने का पूरा मौका दिया जाएगा। आर्थिक रूप से कमजोर मुवक्किलों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) द्वारा मुफ्त कानूनी सहायता दी जाएगी।
⚫ लागू कराने की जिम्मेदारी:
संबंधित जिलों के जिला जज (District Judge), डीएम (DM) और एसएसपी/पुलिस कमिश्नर को इस आदेश का सख्ती से पालन कराने का निर्देश दिया गया है।
⚫ फर्जी डिग्रियां:
कोर्ट ने बार काउंसिल को फर्जी डिग्री वाले 105 वकीलों पर एफआईआर दर्ज करने और कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया है।
द्वारा
शालिनी कौशिक
एडवोकेट
कैराना (शामली)
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