पहली शादी छिपाकर शादी करने वाला दूसरी पत्नी को गुजारा भत्ता देने के लिए बाध्य-इलाहाबाद हाई कोर्ट



 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि 

जिस महिला को पति की पहले से मौजूद शादी की बात छिपाकर शादी के लिए राजी किया गया, वह CrPC की धारा 125 के तहत गुज़ारा-भत्ता पाने की हकदार है, भले ही दोनों के बीच हुई शादी कानूनी रूप से अमान्य (void) हो।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी पहली शादी की बात छिपाकर दूसरी शादी करता है, तो वह महिला (दूसरी पत्नी) CrPC की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता पाने की हकदार है। 

कोर्ट ने कहा कि 

पति अपने धोखाधड़ी वाले आचरण का लाभ नहीं उठा सकता।

➡️ निर्णय की मुख्य बातें

धोखाधड़ी का बचाव नहीं: कोर्ट ने माना कि यदि पत्नी को पहले से मौजूद विवाह की जानकारी नहीं थी और उसे धोखे में रखकर शादी के लिए राजी किया गया, तो विवाह शून्य (void) होने के बावजूद पति भरण-पोषण देने से मना नहीं कर सकता।

सुप्रीम कोर्ट के दृष्टांत: 

जस्टिस प्रसाद ने 'बादशाह बनाम सौ उर्मिला बादशाह गोडसे (2013)' और 'कमला व अन्य बनाम एमआर मोहन कुमार (2018)' में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसलों का हवाला देते हुए कहा कि

 जब कोई पति अपनी पहली शादी को छिपाकर किसी महिला से शादी करता है तो उसे उस महिला को गुज़ारा-भत्ता देने से इनकार करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती, जिसने पहली शादी के बारे में जाने बिना उससे शादी की थी।...... ऐसे मामलों में शोषण और बेसहारा होने की स्थिति को रोकने के लिए CrPC की धारा 125 की व्याख्या फ़ायदेमंद और मकसद को पूरा करने वाली होनी चाहिए। इसलिए कोर्ट ने फ़ैमिली कोर्ट के  निष्कर्ष को सही मानते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने माना कि 

पति ने धोखाधड़ी से अपनी मौजूदा शादी को छिपाया था और महिला को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी। नतीजतन, बेंच का निष्कर्ष यह है कि 

पत्नी को CrPC की धारा 125 के तहत गुज़ारा-भत्ता पाने का हकदार सही ठहराया गया, भले ही पर्सनल लॉ के तहत शादी अमान्य थी।

गुज़ारा-भत्ता बढ़ाने की पत्नी की याचिका पर कोर्ट ने गौर किया कि फ़ैमिली कोर्ट पहले ही यह मान चुका था कि पति रेवेन्यू डिपार्टमेंट में लेखपाल के तौर पर काम करता था और उसके पास पत्नी का खर्च उठाने के लिए पर्याप्त साधन थे। कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि संपत्ति, आय और खर्च से जुड़े अपने हलफ़नामे में पति ने अपनी मासिक आय लगभग 35,000 रुपये बताई। यह देखते हुए कि पति लेखपाल के तौर पर एक स्थायी सरकारी कर्मचारी है और उसकी आय का स्रोत स्थिर है। साथ ही 2018 में गुज़ारा-भत्ते की कार्यवाही शुरू होने के बाद से जीवन-यापन की लागत में बढ़ोतरी हुई, कोर्ट ने फ़ैमिली कोर्ट द्वारा तय किए गए 6,000 रुपये प्रति माह के गुज़ारा-भत्ते को अपर्याप्त पाया। इसके अनुसार, हाईकोर्ट ने महिला को दिए जाने वाले गुज़ारा-भत्ते को बढ़ाकर...24 नवंबर, 2023 से 12,000/- रुपये प्रति माह कर दिया. साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि बकाया राशि का भुगतान 6 महीनों में, 6 बराबर मासिक किस्तों में किया जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि बकाया राशि या मौजूदा मेंटेनेंस की किसी भी किस्त का भुगतान नहीं किया जाता है तो फैमिली कोर्ट पति की सैलरी और/या सैलरी अकाउंट को अटैच करके और कानून में उपलब्ध अन्य सभी सख्त उपाय अपनाकर यह राशि वसूल कर सकता है। 

भत्ते की राशि में वृद्धि:

 मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारी पति की अच्छी आय और बढ़ती महंगाई को देखते हुए पारिवारिक न्यायालय द्वारा तय किए गए 6,000 रुपये प्रतिमाह के शुरुआती गुजारा भत्ते को बढ़ाकर 12,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया।

बकाया भुगतान के निर्देश: 

अदालत ने पति को सभी बकाए राशि का भुगतान तय समय के भीतर समान मासिक किस्तों में करने का आदेश दिया और स्पष्ट किया कि आदेश न मानने पर वेतन कुर्क किया जा सकता है।

मामले का शीर्षक:

 श्रीमती मोनिका उर्फ सत्यवती बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य

वाद संख्या: क्रिमिनल रिवीजन संख्या 196/2024 एवं क्रिमिनल रिवीजन संख्या 491/2024

पीठ: जस्टिस गरिमा प्रसाद 

निर्णय की तिथि: 16 जुलाई 2026

द्वारा 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट 

कैराना (शामली) 


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