गैर कानूनी है न्यायालय परिसर में बार एसोसिएशन कार्यकारिणी सदस्यों का नाम फोटो सहित बैनर
न्यायालय परिसर में बार एसोसिएशन के कार्यकारिणी सदस्यों का नाम और फोटो सहित बड़े-बड़े बैनर या फ्लेक्स लगाना कानूनी रूप से प्रतिबंधित और नियमों के खिलाफ है। भारतीय विधिज्ञ परिषद (Bar Council of India) के नियम और विभिन्न उच्च न्यायालयों (जैसे इलाहाबाद हाईकोर्ट) के आदेशों के अनुसार,
कोर्ट परिसर की गरिमा, सुरक्षा और वकीलों के पेशेवर आचरण को बनाए रखने के लिए ऐसे किसी भी प्रकार के प्रचार या प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक है।
इस विषय पर कानूनी प्रावधान और न्यायालयों के रुख को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:
1. बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियम (विज्ञापनों पर रोक)नियम 36 (अध्याय II, भाग VI):
इस नियम के तहत वकीलों द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी प्रकार के विज्ञापन या प्रचार (Soliciting/Advertising) पर पूर्ण प्रतिबंध है।
⚫ सीमित बोर्ड का आकार:
वकीलों को केवल अपने चेंबर या कार्यालय के बाहर एक सामान्य आकार का नेमप्लेट लगाने की अनुमति है।
⚫ पद का प्रचार वर्जित:
BCI के नियमों के अनुसार, कोई भी अधिवक्ता अपने लेटरहेड, साइन-बोर्ड या स्टेशनरी पर यह प्रदर्शित नहीं कर सकता कि वह बार एसोसिएशन या बार काउंसिल का अध्यक्ष या सदस्य है या रहा है। इसलिए, कार्यकारिणी के नाम पर बड़े-बड़े फोटो वाले बैनर लगाना अप्रत्यक्ष रूप से मुवक्किलों (Clients) को आकर्षित करने का प्रयास माना जाता है, जो पेशेवर दुराचरण (Professional Misconduct) की श्रेणी में आता है।
2. उच्च न्यायालयों के कड़े आदेश (चुनाव और सामान्य दिनों में)इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: न्यायालय परिसर और उसकी सुरक्षा के संबंध में स्वतः संज्ञान लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि हाईकोर्ट और उत्तर प्रदेश की सभी जिला अदालतों (District Courts) के भीतर या बाहर उम्मीदवारों या बार पदाधिकारियों द्वारा कोई भी पोस्टर, बैनर, फोटो या प्रचार सामग्री नहीं लगाई जाएगी।
⚫ स्वेच्छा से हटाना अनिवार्य:
यदि ऐसे बैनर लगे हैं, तो उन्हें तुरंत हटाने के निर्देश हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिवक्ताओं के खिलाफ राज्य बार काउंसिल द्वारा दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है और इसे 'न्यायालय की अवमानना' (Contempt of Court) भी माना जा सकता है।
⚫ मद्रास हाईकोर्ट का रुख:
मद्रास हाईकोर्ट ने भी सार्वजनिक स्थानों पर जीवित व्यक्तियों की तस्वीरों वाले बड़े होर्डिंग्स और फ्लेक्स बैनर लगाने पर कड़ा रुख अपनाया है, क्योंकि इससे सार्वजनिक संपत्ति की सुंदरता खराब होती है और सुरक्षा को खतरा पैदा होता है।
3. न्यायालय परिसर की गरिमा और सुरक्षा सरकारी/न्यायिक संपत्ति:
कोर्ट परिसर एक उच्च सुरक्षा वाला क्षेत्र है। वहां किसी भी निजी या अर्ध-निजी संस्था (जैसे बार एसोसिएशन) को बिना जिला जज या उच्च न्यायालय प्रशासन की अनुमति के दीवारों या परिसरों पर फ्लेक्स लगाने का अधिकार नहीं है।
⚫ पब्लिक प्रॉपर्टी डिफेसमेंट एक्ट:
सार्वजनिक संपत्ति विरूपण अधिनियम (Defacement of Public Property Act) के तहत भी सरकारी भवनों और परिसरों पर अनधिकृत बैनर-पोस्टर लगाना एक दंडनीय अपराध है।
⚫ निष्कर्ष
कानूनन, बार एसोसिएशन चुनाव जीतने के बाद या सामान्य दिनों में कार्यकारिणी के सदस्यों का फोटोयुक्त बड़ा बैनर कोर्ट परिसर में लगाना पूरी तरह गैर-कानूनी है। बार एसोसिएशन केवल अपने आधिकारिक नोटिस बोर्ड पर निर्वाचित सदस्यों के नामों की सूची की सूचना जारी कर सकती है, लेकिन राजनीतिक शैली में बड़े-बड़े फ्लेक्स और होर्डिंग्स लगाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
द्वारा
शालिनी कौशिक
एडवोकेट
कैराना (शामली)

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