उत्तर प्रदेश सरकार तीन माह में पंचायत चुनाव कराने के लिए बाध्य-इलाहाबाद हाई कोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को 3 महीने के भीतर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव संपन्न कराने का आदेश दिया है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के तहत ही कराए जाएंगे, जिसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण भी शामिल है। पिछड़ा वर्ग आरक्षण तय करने के लिए गठित समर्पित आयोग की जांच, रिपोर्ट या उसकी सिफारिशों को लागू करने की प्रक्रिया के नाम पर पंचायत चुनाव अनिश्चितकाल तक नहीं टाले जा सकते।
मुख्य डिटेल्स:
• पीठ (Bench): जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिवीजन बेंच
• आदेश की तिथि: 14 अक्टूबर 2026
• मुख्य फैसला:
• कोर्ट ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।
• जब तक नए चुनाव नहीं होते, तब तक निवर्तमान (outgoing) ग्राम प्रधान ही प्रशासक के रूप में कार्य करते रहेंगे। सरकार के 25 मई के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को कोर्ट ने खारिज करते हुए प्रशासक व्यवस्था को जारी रखने की अनुमति दी है।
• कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ओबीसी (OBC) आयोग अपना काम करता रहेगा, लेकिन चुनाव की प्रक्रिया आयोग की रिपोर्ट पर निर्भर नहीं रहेगी और मौजूदा नियमों तथा 27% आरक्षण के प्रावधानों के तहत चुनाव कराए जाएंगे।
प्रमुख पक्षकार (Parties Involved):
• मुख्य याचिकाकर्ता: इम्तियाज हुसैन (जिन्होंने पंचायत चुनाव समय पर कराने के लिए मुख्य याचिका दाखिल की थी) और राय साहब यादव।
• कुल 11 याचिकाएं (जिनमें 6 जनहित याचिकाएं/PIL शामिल थीं) इस मामले में एक साथ सुनी गईं।
• प्रतिवादी / सरकार एवं प्रशासन पक्ष: उत्तर प्रदेश सरकार (योगी आदित्यनाथ सरकार), निदेशक पंचायती राज, जिला मजिस्ट्रेट/जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी (CDO), और जिला पंचायती राज अधिकारी (DPRO), तथा राज्य निर्वाचन आयोग।
द्वारा
शालिनी कौशिक
एडवोकेट
कैराना (शामली)

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