उत्तर प्रदेश में एडवोकेट इंटर्नशिप का सच

 


     उत्तर प्रदेश में अधिवक्ताओं के लिए एक नई सूचना आज चर्चाओं में है कि उत्तर प्रदेश में नए अधिवक्ताओं के लिए 6 महीने की इंटर्नशिप अनिवार्य कर दी गई है. 

       जिसमें कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में नए वकीलों के लिए वकालत की डिग्री मिलने के बाद सीधे प्रैक्टिस करने पर रोक लगाते हुए बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने 6 महीने की इंटर्नशिप (लॉ ट्रेनिंग) अनिवार्य कर दी है।

⚫ मुख्य नियम और विशेषताएं:

• लागू होने की तिथि: यह नया नियम 1 नवंबर 2026 से लागू होगा।

• प्रमाण पत्र (Certificate): 6 महीने की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद अभ्यर्थी को संबंधित सीनियर अधिवक्ता के लेटर हेड पर जारी प्रमाण पत्र लेना होगा।

• सत्यापन: इस प्रमाण पत्र का सत्यापन बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के किसी सदस्य से कराना अनिवार्य होगा।

• सीओपी (COP) के लिए अनिवार्यता: सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (COP) के लिए ऑनलाइन आवेदन करते समय इस प्रमाण पत्र को अपलोड करना होगा; इसके बिना सीओपी जारी नहीं किया जाएगा।

• सीनियर अधिवक्ताओं पर सीमा: 10 साल या उससे अधिक का अनुभव रखने वाला कोई भी वरिष्ठ अधिवक्ता एक वर्ष में अधिकतम 2 लॉ ट्रेनी अभ्यर्थियों को ही प्रमाण पत्र जारी कर सकेगा। इससे अधिक देने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।

⚫ किन पर यह नियम नहीं लागू होगा?

 पहली नवंबर 2026 से पहले सीओपी के लिए आवेदन कर चुके अभ्यर्थियों पर यह नियम लागू नहीं होगा।

🟥 अब आते हैं वास्तविक स्थिति पर -

बार काउंसिल ऑफ उप्र ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था बार काउंसिल ऑफ इंडिया से अनुमोदन की प्रत्याशा में लागू की गई है. 

🟥 स्वीकृति की स्थिति: यह नियम बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की अंतिम स्वीकृति के अधीन है।

🟥 सामान्य नियम (BCI): बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के अनुसार लॉ की पढ़ाई के दौरान (3-वर्षीय और 5-वर्षीय एलएलबी में) इंटर्नशिप पहले से ही अनिवार्य होती है, लेकिन उत्तर प्रदेश बार काउंसिल का यह नया प्रस्ताव वकालत का लाइसेंस जारी करने से ठीक पहले 6 महीने के विशेष व्यावहारिक प्रशिक्षण (Practical Training) से संबंधित है।

    इस प्रकार 1 नवंबर 2026 से लागू होने वाली नए वकीलों की 6 महीने की अनिवार्य इंटर्नशिप (ट्रेनिंग) योजना को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) से अभी अंतिम स्वीकृति मिलना बाकी है।

यह नियम बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश (Bar Council of Uttar Pradesh) द्वारा प्रस्तावित किया गया है, लेकिन इसकी पूर्ण वैधता और क्रियान्वयन BCI की मंजूरी के अधीन (Subject to approval) है।

द्वारा 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट 

कैराना (शामली) 

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