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प्रतिबंधित जनसेवक एडवोकेट

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 दिनांक 30 अगस्त 2026 की अमर उजाला मीडिया रिपोर्ट के अनुसार देश की राजधानी नई दिल्ली में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के 13वें दीक्षांत समारोह के दौरान सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ जज वीवी नागरत्ना ने एक बड़ा और गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि  " हमारी अदालतें मुकदमों के अंबार, लगातार होती देरी और वकीलों की भारी-भरकम फीस से कराह रही हैं। ऐसे में अब समय आ गया है कि देश का वकीलों का समुदाय (बार) अपने रवैये में सुधार करे, अपने कामकाज पर विचार करे और एक सुर में न्याय व्यवस्था को संभालने के लिए आगे आए।"  वकीलों से अपील करते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि " वे अपनी सोच बदलें। वकालत को सिर्फ पैसा कमाने का जरिया बनाने के बजाय इसे जनता की सेवा के रूप में देखें। अगर वकील ऐसा नहीं करेंगे, तो आने वाले समय में आम जनता के बीच उनकी अहमियत खत्म हो जाएगी। उन्होंने वकीलों को लोकतंत्र का 'सेफ्टी वाल्व' बताया। उनका कहना था कि वकीलों को मिली आजादी किसी व्यक्तिगत फायदे के लिए नहीं है, बल्कि इसलिए है ताकि वे बिना किसी सरकार, बाजार या ग्राहक के दबाव के सच के लिए खड़े हो सकें।" इस प्रकार सुप्...

सुप्रीम कोर्ट ने ससुराल वालों पर दर्ज वैवाहिक क्रूरता का मामला ख़ारिज किया.

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  सुप्रीम कोर्ट द्वारा शुक्रवार (26 सितंबर) को एक महिला के ससुराल पक्ष के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी गई । महिला द्वारा अपने ससुर, सास और ननद पर घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए गए थे. मामले का अवलोकन कर सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि " ये आरोप केवल अस्पष्ट और सामान्य थे और इनमें कोई ठोस तथ्य नहीं है।"    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बी.आर. गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने अपील स्वीकार करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसने पहले इन आरोपों को ख़ारिज करने से इनकार कर दिया था। FIR में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए (क्रूरता), धारा 377 (अप्राकृतिक यौन संबंध), धारा 506 (धमकी) और धारा 34 (समान आशय) के तहत अपराध दर्ज किए गए। अदालत ने कहा कि " शिकायत में केवल सामान्य आरोप हैं, जिनमें कोई विशेष विवरण नहीं दिया गया। महिला ने अपने पति पर अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था लेकिन ये आरोप सिर्फ पति तक सीमित थे ससुराल पक्ष पर नहीं। " पीठ ने दिगंबर बनाम महाराष्ट्र राज्य (2024) मामले का ...

2020 में COP नम्बर प्राप्त सभी अधिवक्ताओं की सूचनार्थ

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  बार कॉन्सिल ऑफ़ उत्तर प्रदेश द्वारा 2020 में जिन अधिवक्ताओं को COP नंबर जारी किये गए हैं , वे सभी अधिवक्ता COP re-issue form जल्द से जल्द सभी वांछित डाक्यूमेंट्स के साथ बार कॉन्सिल ऑफ़ उत्तर प्रदेश के आधिकारिक पते पर या माननीय चेयरमेन सर के पते पर भेज दें, ताकि वे समय से COP re-issue प्रक्रिया में सम्मिलित हो सकें और उन्हें विलम्ब शुल्क का भुगतान न करना पड़े. आपके COP कार्ड की एक्सपायरी date I-d कार्ड के पीछे लिखी है, आप वहां देखिये और निम्न फॉर्म के साथ निम्नलिखित डाक्यूमेंट्स संलग्न कर उपरोक्त पते पर भेज दीजिये 🙏🙏 🌑 *5 वकालत नामों की कॉपी *आधार कार्ड की कॉपी *250 रुपये का ड्राफ़्ट - BCUP CERTIFICATE AND PRACTICE VARIFICATION के नाम *हाई स्कूल से लेकर ENROLLMENT, COP की कॉपी तक के documents की कॉपी self attested  * तीन फोटो कोट एन्ड टाई में -2 फोटो फॉर्म पर चिपकाने हैँ - एक envelope में attach करना है फॉर्म पर.  * सभी signature full name के साथ, initial नहीं 🌑 वकालत नामों की फोटो कॉपी लगेंगी और 2021,2022,2023,2024,2025 की एक एक कॉपी लगेगी. द्वारा  शालिनी कौशिक ...

पत्नी की परिभाषा दस्तावेज से बड़ी -इलाहाबाद हाईकोर्ट

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( shalini kaushik law classes ) इलाहाबाद हाई कोर्ट का मानना है कि जो पुरुष और महिला एक लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह साथ रहे हैं तो पत्नी का भरण-पोषण का हक बनता है। इसलिए भरण-पोषण के लिए विवाह को साबित करना जरूरी नहीं है। भरण पोषण के एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि  " भरण-पोषण के मामले में पत्नी की परिभाषा दस्तावेज से बड़ी है। पुरुष और महिला लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह साथ रहे हैं तो भरण-पोषण का हक बनता है। लिहाजा, भरण-पोषण के लिए विवाह को साबित करना जरूरी नहीं है। कानून का मकसद न्याय है न कि ऐसे रिश्तों को नकारना जो समाज में पति-पत्नी की तरह माने जाते है।" इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की अदालत ने देवरिया निवासी याची की पुनरीक्षण याचिका स्वीकार कर ली। कोर्ट ने पारिवारिक न्यायालय का आदेश रद्द कर नए सिरे से मामले की सुनवाई करने के लिए वापस भेज दिया। साथ ही कांस्टेबल पति को मामले के निस्तारण होने तक याची को 8,000 रुपये प्रति माह अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया है। मामले में याची ने 2017 में पति के निधन के बाद कांस्टेबल देवर संग शादी होने का दा...

मोदी सरकार ने 1 जुलाई से बदले रजिस्ट्री नियम

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  मोदी सरकार ने बदले रजिस्ट्री नियम-1 जुलाई से लागू Shalini kaushik law classes केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा जमीन और फ्लैट की रजिस्ट्री प्रक्रिया में 1 जुलाई 2025 से बड़े बदलाव किये गए हैं ताकि रजिस्ट्री प्रक्रिया में धोखाधड़ी को रोका जा सके, इसके साथ ही भूमि और फ्लैट का रजिस्ट्रेशन पारदर्शी, तेज़ और डिजिटल स्वरुप में सफलता पूर्वक हो सके. 1 जुलाई 2025 से रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में किये गए ये महत्वपूर्ण 4 बदलाव लागू होने जा रहे हैं जिनसे क्रेता और विक्रेता दोनों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने वाला है। इस तरह के बदलावों का सर्वप्रथम उद्देश्य धोखाधड़ी पर लगाम कसना है,इसके साथ ही पहले से चली आ रही लम्बी दस्तावेजी प्रक्रिया और उसके कारण आम जनता का इसमें लगने वाला लम्बा समय, इन दोनों में ही कटौती होने जा रही है. ➡️ रजिस्ट्रेशन के 4 बदलाव-  1️⃣ रजिस्ट्री के लिए सत्यापित आधार अनिवार्य-  जमीन या फ्लैट की रजिस्ट्री कराने के लिए अब हर व्यक्ति के आधार कार्ड का बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। 🌑 बदलाव से ये सम्भव होगा- 1️⃣ फर्जी पहचान के ज़रिए रजिस्ट्री होना सम्भव नहीं. 2️⃣ म...

व्हाट्सएप्प चैट सबूत क़े रूप में मान्य -मध्य प्रदेश हाई कोर्ट

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(व्हाट्सएप्प चैट सबूत के रूप में मान्य-मध्य प्रदेश हाई कोर्ट) व्हाट्सएप्प चैट को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा एक महत्वपूर्ण निर्णय में पति को अपनी पत्नी क़े व्यभिचार को साबित करने क़े लिए परिवार न्यायालय के समक्ष मान्य सबूत क़े रूप में प्रस्तुत करने की इज़ाज़त दी गई. जबकि फैमिली कोर्ट ने पति को सबूत के तौर पर पत्नी के व्हाट्सएप चैट को पेश करने पर रोक लगा दी थी।    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस आशीष श्रोती की एकल पीठ ने कहा- " कि यदि यह माना जाता है कि फैमिली कोर्ट के सामने पेश किए जाने वाले सबूत को गोपनीयता के अधिकार के उल्लंघन की आपत्ति के आधार पर बाहर रखा जाना चाहिए, तो धारा 14 के प्रावधान निरर्थक हो जाएंगे।कोर्ट ने कहा कि यह ध्यान में रखना चाहिए कि फैमिली कोर्ट की स्थापना ऐसे मामलों से निपटने के लिए की गई है जो अनिवार्य रूप से संवेदनशील हैं। जैसे- विवाह विच्छेद, वैवाहिक अधिकारों की बहाली, बच्चों की वैधता, संरक्षकता, हिरासत और नाबालिगों तक पहुंच से संबंधित व्यक्तिगत विवाद।इसलिए यह आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है कि फैमिली कोर्ट के समक्ष आने वाले अधिकांश मामलों में जिस सबूत को ...

#Ghibli_style_pic नया साइबर क्राइम

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साइबर क्राइम के दौर में एक नया ट्रेंड शुरू हो गया है जिसका नाम है - Ghibli   राजनीति, शिक्षा, व्यापार, युवा, वृद्ध सब दीवाने हुए जा रहे हैं, नहीं देख रहे हैं कि ये अच्छे दिन आने वाले हैं का समय नहीं है बल्कि यह समय है - डिजिटल अरेस्ट का, ऑनलाइन फ्रॉड का.   #Ghibli style pic फैशन बन गया है जबकि इस से हो सकते हैं आप साइबर अटैक के शिकार, Ghibli ट्रेंड हो सकता है सभी के लिए खतरनाक ➡️ डेटा तक फोटो के साथ चोरी हो सकता है- आप Ghibli ट्रेंड के लिए जब भी कोई फोटो एआई टूल पर अपलोड करते हैं, तब आप सिर्फ अपने चेहरे की डिटेल शेयर नहीं करते, बल्कि कई तरह का और डेटा भी शेयर करते हैं. इसमें स्थान, समय और आपके डिवाइस का मेटाडेटा शामिल होता है. जिससे आपकी प्राइवेसी को खतरा पहुंच सकता है.    एआई ऐप पर व्यक्तिगत फ़ोटो शेयर करते समय सावधानी बरतने की जरूरत होती है. जिसमें मजबूत पासवर्ड का उपयोग करना, प्रमाणीकरण सक्षम करना और अपलोड करने से पहले मेटाडेटा को हटाना शामिल है किन्तु ये सब नहीं सोच रहे हैं आज के #Ghibli के पीछे के पागल.  ज्यादा जानकारी के लिए जुड़े रहिए  ब्लॉग - ...