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अगर पति पत्नि की तरह साथ रहे हैं तो भरण पोषण भी देना होगा - इलाहाबाद हाई कोर्ट

  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि  यदि कोई पुरुष और महिला लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह साथ रहे हों और उनका वैवाहिक संबंध अन्य परिस्थितियों से स्थापित होता हो, तो भरण-पोषण (Maintenance) के दावे को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि वैध विवाह का सख्त दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। इस प्रकार इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई पुरुष और महिला लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह साथ रहे हों, तो पुरुष भरण-पोषण (Maintenance) देने से इनकार नहीं कर सकता। कोर्ट ने माना कि ऐसे मामलों में भरण-पोषण के दावे को केवल वैध विवाह के ठोस दस्तावेजी प्रमाण न होने के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। ⚫ केस की डिटेल्स और महत्वपूर्ण बिंदु: पार्टीज के नाम: यह फैसला संतोष कुमार (पति) और उनकी पत्नी/महिला (चित्रकूट) के बीच के मामले में जस्टिस अचल सचदेव की बेंच द्वारा दिया गया। ⚫ तथ्य: महिला ने फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की थी कि 2017 में कोर्ट मैरिज के लिए आवेदन के बाद वह पति के साथ रहने लगी थी, जिससे एक पुत्र भी हुआ। लेकिन फैमिली कोर्ट ने सख्त दस्तावेज (Marriage Certificate) न हो...

भरण पोषण के लिए पत्नी पति की पेंशन नहीं रुकवा सकती - मद्रास हाईकोर्ट

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मद्रास हाईकोर्ट ने अपने हालिया निर्णय (जिसमें पत्नी द्वारा पति की पेंशन रोकने की मांग को खारिज किया गया था) में कहा  "हाईकोर्ट को निष्पादन अदालत या फैमिली कोर्ट नहीं बनाया जा सकता। यदि याचिकाकर्ता भरण-पोषण मामले में सफल हुई है तो आदेश के पालन के लिए उसे उचित कानूनी कार्यवाही शुरू करनी होगी। वह इस रिट याचिका के माध्यम से न तो आदेश का क्रियान्वयन करा सकती है और न ही पति-पत्नी के विवाद का निपटारा करवा सकती है।" ➡️ प्रमुख पक्ष और विवरण : ✒️ याचिकाकर्ता (पत्नी): राजम्मल (Rajammal) ✒️ प्रतिवादी 1 (पति): एन. तमिलमणि (N. Tamilmani) ✒️ प्रतिवादी 2: तमिलनाडु राज्य परिवहन निगम (Tamil Nadu State Transport Corporation ➡️ मामले से जुड़ी मुख्य बातें:विवाद:  पत्नी ने अदालत में याचिका दायर कर मांग की थी कि उसके पति के सेवानिवृत्ति लाभ (पेंशन और अन्य फंड) जारी करने पर रोक लगा दी जाए, क्योंकि पति ने अदालत द्वारा आदेशित भरण-पोषण (मेंटेनेंस) की राशि का भुगतान नहीं किया था। ➡️ अदालत का निर्णय:  जस्टिस मुम्मिनेनी सुधीर कुमार ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि हाईकोर्ट को 'फैमिली कोर्ट' या...

गुजारा भत्ता न देने पर सजा

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पुरानी सीआरपीसी की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता न देने पर सजा दी जा सकती थी अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 144 के तहत गुजारा भत्ता अदा न करने पर सजा का प्रावधान है। ये धारा पति, पत्नी और माता-पिता के भरण-पोषण से संबंधित है। अदालतें, इस धारा के तहत, भरण-पोषण आदेश का उल्लंघन करने पर विभिन्न कानूनी उपायों का सहारा ले सकती हैं, जिनमें सिविल हिरासत, संपत्ति की कुर्की आदि शामिल हैं.  🌑 सिविल हिरासत:- अगर कोई व्यक्ति भरण-पोषण आदेश का पालन नहीं करता है, तो उसे कुछ समय के लिए जेल में रखा जा सकता है.  🌑 संपत्ति की कुर्की:- अदालतें, व्यक्ति की संपत्ति कुर्क कर सकती हैं ताकि भरण-पोषण की बकाया राशि वसूल की जा सके.  🌑 गैर-जमानती वारंट:- अगर भरण-पोषण आदेश का उल्लंघन किया जाता है, तो न्यायालय पति के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर सकता है.  🌑 उदाहरण :- एक मामले में, एक व्यक्ति को अपनी पत्नी और बच्चों को गुजारा भत्ता नहीं देने के कारण 3210 दिन की जेल की सजा सुनाई गई थी.  🌑 एक अन्य मामले में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक व्यक्ति को भरण-पोषण की राशि न देने के कारण लगभग ...