चमार शब्द का इस्तेमाल अपमानजनक नहीं
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टिप्पणी की: "केवल 'चमार' शब्द का इस्तेमाल करने मात्र से यह साबित नहीं होता कि याचिकाकर्ताओं ने पीड़िता के अनुसूचित जाति या जनजाति समुदाय से होने के कारण उसका अपमान करने या नीचा दिखाने की मंशा या जानकारी के साथ इस शब्द का प्रयोग किया था।" अदालत ने आगे जोड़ा: "इसलिए, रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री याचिकाकर्ताओं की किसी विशिष्ट, स्पष्ट या पर्याप्त भूमिका को उजागर नहीं करती है।"
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मामले का शीर्षक: वेगराज सिंह एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य
वाद संख्याः आपराधिक अपील संख्या 4882 / 2025
पीठः जस्टिस संतोष राय
निर्णय की तिथि: 13 अगस्त 2026
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द्वारा
शालिनी कौशिक
एडवोकेट
कैराना (शामली)

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