फैमिली पेंशन कोई सरकारी खैरात या कृपा नहीं-सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने Maya Banerjee v. Union of India & Ors. मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि फैमिली पेंशन कोई सरकारी खैरात या कृपा नहीं, बल्कि एक मूल्यवान कानूनी अधिकार और संपत्ति है।
⚫ मुख्य पक्षकार (Case Parties)अपीलकर्ता (Petitioner/Widow):
माया बनर्जी (Maya Banerjee), जो एक दिवंगत रेलवे कर्मचारी की विधवा हैं।
⚫ प्रतिवादी (Respondents):
यूनियन ऑफ़ इंडिया एवं अन्य (रेलवे प्रशासन)।
➡️ मामले से जुड़ी मुख्य डिटेल्स और कोर्ट का निर्णय
⚫ पति की मृत्यु की तिथि:
12 नवंबर 2000।
⚫ अधिकार की तिथि:
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि विधवा को फैमिली पेंशन सीमित अवधि के बजाय उसके पति की मृत्यु की वास्तविक तिथि (12 नवंबर 2000) से दी जानी चाहिए।
⚫ बकाया और ब्याज:
कोर्ट ने आदेश दिया कि पूरे बकाए का भुगतान 6% वार्षिक ब्याज के साथ अगले तीन महीनों के भीतर किया जाए।
⚫ देरी पर टिप्पणी:
अदालत ने कहा कि यदि पेंशन मिलने में देरी के लिए विधवा किसी भी प्रकार से जिम्मेदार नहीं है, तो केवल अदालतों या ट्रिब्यूनल में याचिका दायर करने की तारीख से उसे बकाया देने तक सीमित नहीं किया जा सकता।
द्वारा
शालिनी कौशिक
एडवोकेट
कैराना (शामली)

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