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स्कूलों में हिजाब की अनुमति नहीं-इलाहाबाद हाई कोर्ट

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  इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्कूलों में तयशुदा यूनिफॉर्म के साथ हिजाब या सिर पर स्कार्फ पहनने की अनुमति देने से इंकार करते हुए एक मुस्लिम छात्रा की याचिका को खारिज कर दिया है। ➡️ पक्षकार (Parties involved) ⚫ याचिकाकर्ता (Student):  सुकैना रिजवी (प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल की 11वीं कक्षा की नाबालिग छात्रा, जो अपनी मां के माध्यम से पेश हुई)। ⚫ प्रतिवादी (Respondent):  टैगोर पब्लिक स्कूल, अत्तारसुइया, प्रयागराज (स्कूल प्रबंधन) और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी। ➡️ न्यायालय पीठ (Bench):  न्यायमूर्ति जे. जे. मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ। ➡️ निर्णय की मुख्य बातें और कोर्ट की टिप्पणियां: ⚫ अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं:  अदालत ने स्पष्ट किया कि हिजाब या हेडस्कार्फ पहनना इस्लाम धर्म का कोई अनिवार्य या आवश्यक धार्मिक हिस्सा (Essential Religious Practice) नहीं है, जिसके बिना किसी व्यक्ति की आस्था खतरे में पड़ जाए। ⚫ यूनिफॉर्म की अनिवार्यता:  कोर्ट ने कहा कि स्कूल में एक समान ड्रेस कोड (यूनिफॉर्म) लागू करने का उद्देश्य अनुशासन बनाए रखना, बच्चों के बीच समान...

चमार शब्द का इस्तेमाल अपमानजनक नहीं

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  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टिप्पणी की: "केवल 'चमार' शब्द का इस्तेमाल करने मात्र से यह साबित नहीं होता कि याचिकाकर्ताओं ने पीड़िता के अनुसूचित जाति या जनजाति समुदाय से होने के कारण उसका अपमान करने या नीचा दिखाने की मंशा या जानकारी के साथ इस शब्द का प्रयोग किया था।" अदालत ने आगे जोड़ा: "इसलिए, रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री याचिकाकर्ताओं की किसी विशिष्ट, स्पष्ट या पर्याप्त भूमिका को उजागर नहीं करती है।" ..................................  मामले का शीर्षक: वेगराज सिंह एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य  वाद संख्याः आपराधिक अपील संख्या 4882 / 2025 पीठः जस्टिस संतोष राय निर्णय की तिथि: 13 अगस्त 2026 ................................................. द्वारा शालिनी कौशिक एडवोकेट कैराना (शामली) 

भारत में नया श्रमिक कल्याण

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  भारत सरकार ने पुराने 29 श्रम कानूनों को मिलाकर 4 नए लेबर कोड (श्रम संहिता) के रूप में बड़े सुधार लागू किए हैं।  ➡️ ये चार नए लेबर कोड हैं:  1️⃣ वेतन संहिता (Code on Wages),  2️⃣ सामाजिक सुरक्षा संहिता (Code on Social Security), 3️⃣ औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code), और  4️⃣ व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं संहिता (Occupational Safety, Health and Working Conditions Code)। 1️⃣ वेतन संहिता (Code on Wages):    कुल वेतन (CTC) का कम से कम 50% हिस्सा मूल वेतन (Basic Salary) होना अनिवार्य।इससे पीएफ (PF) और ग्रेच्युटी (Gratuity) का हिस्सा बढ़ेगा, जिससे भविष्य में मिलने वाला फंड अधिक होगा।सभी क्षेत्रों के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन (Minimum Wage) तय करने का प्रावधान। 2️⃣ सामाजिक सुरक्षा संहिता (Code on Social Security): असंगठित क्षेत्र (Unorganized Sector), गिग वर्कर्स (Gig Workers) और प्लेटफॉर्म वर्कर्स (जैसे फूड डिलीवरी या कैब ड्राइवर) को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना।इनके लिए बीमा, स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य कल्याणकारी य...

साप्ताहिक बंदी में बाजार - क्या कहता है कानून

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  कांधला कस्बे में साप्ताहिक बंदी के दौरान चार खंबा रोड पर बाजार लगाए जाने की समस्या स्थानीय व्यापार मंडल के समक्ष उपस्थित हुई है और इसे लेकर व्यापारी भाइयों का बैठकों का दौर जारी हो गया है.      उत्तर प्रदेश में किसी व्यापार मंडल के क्षेत्र में दूसरा व्यापार मंडल या कोई भी पक्ष कानूनी रूप से साप्ताहिक बंदी के दिन बाजार या दुकानें नहीं लगा सकता। साप्ताहिक बंदी का निर्धारण व्यापार मंडलों द्वारा नहीं, बल्कि जिला प्रशासन द्वारा उत्तर प्रदेश दुकान एवं वाणिज्यिक अधिष्ठान अधिनियम, 1962 के तहत किया जाता है। ➡️ कानूनी स्थिति और नियम: ⚫ प्रशासनिक आदेश:  जिले के जिलाधिकारी (District Magistrate) तय करते हैं कि किस क्षेत्र में बाजार या दुकानें किस दिन बंद रहेंगी। यह आदेश पूरे क्षेत्र के सभी व्यापारियों और बाजारों पर समान रूप से लागू होता है। ⚫ व्यापार मंडल की भूमिका:  व्यापार मंडल केवल व्यापारियों की संस्थाएं होती हैं। इन्हें सरकार या प्रशासन के तय किए गए साप्ताहिक बंदी के नियमों को बदलने या तोड़ने का कोई कानूनी अधिकार नहीं होता है। ⚫ दूसरा व्यापार मंडल:  यदि क्ष...

बी सी आई बैकफुट पर

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  हैदराबाद की NALSAR University of Law के 2026 बैच के छात्रों के वकील के रूप में एनरोलमेंट (नामांकन) पर रोक का मामला दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को बुलाए जाने के विरोध से जुड़ा था। हालांकि, भारी विरोध और स्थिति स्पष्ट होने के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने यह रोक तुरंत वापस ले ली है और सभी छात्रों को एनरोल करने की अनुमति दे दी है। विवाद की वजह सीजेआई का विरोध: नलसार यूनिवर्सिटी के छात्रों ने दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में CJI सूर्यकांत को आमंत्रित किए जाने का विरोध किया था।   बयानों से नाराजगी: छात्र दिल्ली में हुए कुछ प्रदर्शनों और मुकदमों की सुनवाई के दौरान CJI की टिप्पणियों तथा पुलिस कार्रवाई संबंधी मामलों को लेकर नाखुश थे।   विरोध पत्र: यूनिवर्सिटी के सैकड़ों छात्रों ने प्रशासन को पत्र लिखकर इस निमंत्रण पर पुनर्विचार करने की मांग की थी।   बार काउंसिल (BCI) का एक्शन और फैसला एनरोलमेंट पर रोक: इस विरोध प्रदर्शन और अभियानों का संज्ञान लेते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन ने शुरुआती आदे...

युवा और नए वकीलों के लिए अनिवार्य पोस्ट-एनरोलमेंट ट्रेनिंग

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  बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद देश के वकीलों के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण (Compulsory Training) का आदेश दिया है। इसके तहत गोवा स्थित IIULER परिसर में एक नेशनल लीगल एकेडमी (National Legal Academy) बनाई जाएगी, जहां वकीलों को पेशेवर ट्रेनिंग दी जाएगी। ➡️ प्रशिक्षण से जुड़ी मुख्य बातें- ⚫ प्रशिक्षण का स्थान:  गोवा के IIULER परिसर में नेशनल लीगल एकेडमी बनेगी। ⚫ अवधि :  वकीलों के लिए यह ट्रेनिंग प्रोग्राम 10 दिन से लेकर 2 हफ्ते तक का हो सकता है। ⚫ किसे करनी होगी :  यह मुख्य रूप से देश के युवा और नए वकीलों के लिए अनिवार्य पोस्ट-एनरोलमेंट ट्रेनिंग होगी। ⚫ विशेषज्ञ :  ट्रेनिंग सत्रों में सुप्रीम कोर्ट व अन्य न्यायालयों के न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिवक्ता, प्रोफेसर और कानूनी विशेषज्ञ लेक्चर देंगे। ⚫ उद्देश्य और जरूरत -  वकीलों की पेशेवर दक्षता और कानूनी कौशल को मजबूत करना।कानूनी आचरण, नैतिकता (Ethics) और आधुनिक तकनीकों (जैसे AI और डिजिटल कोर्ट प्रक्रिया) से वकीलों को अवगत कराना।जिस प्रकार न्यायाधीशों के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था होती है, उसी...

उत्तर प्रदेश में प्रेक्टिस करने वाले एडवोकेट के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के कड़े निर्देश

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      इलाहाबाद हाईकोर्ट में जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने निर्णय दिया है कि  शैक्षणिक सत्र 2009-10 या उसके बाद उत्तीर्ण होने वाले लॉ ग्रेजुएट, जो अनंतिम (प्रोविजनल) नामांकन के दो वर्षों के भीतर ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) पास करने में विफल रहते हैं, उन्हें किसी भी अदालत, ट्रिब्यूनल या राजस्व प्राधिकरण के समक्ष वकालत करने का अधिकार नहीं है।  अधिवक्ताओं के नामांकन और प्रैक्टिस से जुड़े प्रक्रियात्मक व वैधानिक पहलुओं को स्पष्ट करते हुए हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि  अधिवक्ता पांच वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद भी तब तक बिना नवीनीकृत प्रैक्टिस प्रमाण पत्र (COP) के प्रैक्टिस जारी रख सकते हैं, जब तक कि राज्य बार काउंसिल बार काउंसिल ऑफ इंडिया सर्टिफिकेट एंड प्लेस ऑफ प्रैक्टिस (वेरिफिकेशन) रूल्स, 2015 के नियम 20.4 के तहत गैर-प्रैक्टिसिंग वकीलों की सूची आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं कर देती। 1️⃣ . 2009-10 के बाद प्रैक्टिस का अधिकार:  2009-10 के शैक्षणिक सत्र से लॉ पास करने वाले ग्रेजुएट राज्य बार काउंसिल द्वारा जारी प्रोविजनल नामांकन प...

वंदे मातरम भी अब कानूनी संरक्षण में

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 संसद के मानसून सत्र में Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 की धारा 3 में संशोधन किया गया है। जिस के अनुसार,  " यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गान या राष्ट्रीय गीत के गायन में बाधा डालता है या ऐसे किसी समारोह में व्यवधान उत्पन्न करता है, तो उसे तीन साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।  पहले यह प्रावधान केवल राष्ट्रीय गान " जन-गण-मन" के लिए लागू था, लेकिन अब राष्ट्रीय गीत "वंदे मातरम्" को भी इसी दायरे में शामिल कर लिया गया है। द्वारा  शालिनी कौशिक एडवोकेट कैराना (शामली) 

वकीलों के अवैध चेम्बर हटाने से पहले नगर निगम दे नया नोटिस-हाईकोर्ट ऑफ जुडिकेचर एट इलाहाबाद (लखनऊ पीठ)

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  सार्वजनिक जमीन पर अवैध कब्जे और अधिवक्ताओं द्वारा अदालती कामकाज के गैर-कानूनी बहिष्कार से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ऑफ जुडिकेचर एट इलाहाबाद (लखनऊ पीठ) के जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राजीव भारती की पीठ ने लखनऊ नगर निगम को निर्देश दिया है कि  स्वास्थ्य भवन के पास सार्वजनिक उपयोग की जमीन और रास्तों पर काबिज 72 अतिक्रमणकारियों-जिनमें मुख्य रूप से अधिवक्ता शामिल हैं-को अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई से पहले नए सिरे से लिखित नोटिस दिए जाएं।  हाईकोर्ट ने दोहराया कि  अधिवक्ताओं द्वारा हड़ताल और काम से विरत रहना प्रत्यक्ष रूप से आपराधिक अवमानना है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी अधिवक्ता या बार एसोसिएशन को न्यायिक कार्यवाही को बाधित करने या सार्वजनिक रास्तों को अवरुद्ध करने का अधिकार नहीं है। ➡️ मामले का शीर्षक:  अनुराधा सिंह और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य वाद संख्याः क्रिमिनल रिट-पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन नंबर 4 / 2026 पीठः जस्टिस राजेश सिंह चौहान, जस्टिस राजीव भारती निर्णय की तिथिः 4 अगस्त 2026 स्रोत-LAW. TREND प्रस्तुति  शा...

LADC कान्ट्रेक्ट रिन्यू नहीं होंगे-NALSA

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  नेशनल लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी (NALSA) ने निर्देश दिया है कि पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में 'लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम' (LADCS) स्कीम के तहत नियुक्त 'लीगल एड डिफेंस काउंसिल्स' (LADCs) के कॉन्ट्रैक्ट सितंबर 2026 से आगे रिन्यू नहीं किए जाएंगे। 4 अगस्त 2026 को सभी राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों (State Legal Services Authorities) के सदस्य सचिवों को भेजे गए एक पत्र में NALSA के सदस्य सचिव संजीव पांडे ने बताया कि यह फ़ैसला 3 अगस्त 2026 को पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ के बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के बाद लिया गया। इन प्रतिनिधियों ने LADCS स्कीम को लागू करने के तरीके पर चिंता जताई थी। पत्र के अनुसार, सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) ने बार प्रतिनिधियों से स्कीम के कामकाज में मौजूद कमियों पर ठोस और रचनात्मक सुझाव देने का आग्रह किया। साथ ही यह भी बताया गया कि LADCS स्कीम की समीक्षा के लिए पहले से ही एक समिति गठित की जा चुकी है। इस समीक्षा के लंबित रहने के दौरान, सक्षम प्राधिकारी ने निर्देश दिया: 1. पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ...

Enrollment के बाद एडवोकेट दो साल तक पूरी प्रेक्टिस का हकदार - BCI

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  बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) ने साफ़ किया कि प्रोविज़नल तौर पर एनरोल हुए वकील, एनरोलमेंट के तुरंत बाद और तय दो साल की अवधि के दौरान, ऑल-इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) पास किए बिना भी पूरी तरह से वकालत की प्रैक्टिस करने के हकदार हैं। BCI ने साफ़ किया कि स्टेट बार काउंसिल द्वारा एनरोल किए गए वकील तय दो साल की अवधि के दौरान पूरी तरह से वकालत की प्रैक्टिस कर सकते हैं - जिसमें वकालतनामा पर साइन करना और कोर्ट में पेश होना शामिल है - भले ही उन्होंने AIBE पास न किया हो। BCI ने कहा, "एक वकील एनरोलमेंट के तुरंत बाद और AIBE पास करने तक तय दो साल की अवधि के लिए वकालत का पेशा अपनाने का पूरा हकदार है। इस अधिकार में मुकदमे से जुड़े और मुकदमे से न जुड़े सभी कानूनी काम शामिल हैं। 'प्रोविज़नल' शब्द का मतलब उन दो सालों के दौरान प्रैक्टिस के दायरे को कम करना नहीं है। यह सिर्फ़ दो साल के बाद भी प्रैक्टिस करने के अधिकार को AIBE पास करने पर निर्भर बनाता है... प्रैक्टिस करने के अधिकार के अलावा, वकील के पास वोट देने का अधिकार, बार एसोसिएशन चुनाव लड़ने का अधिकार या कल्याणकारी लाभ पाने का अधिकार तब...

इस्लाम अपनाने वाली बहनों को अदालत में पेश करें - इलाहाबाद हाईकोर्ट

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 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वेच्छा से इस्लाम अपनाने और अपनी पसंद से विवाह करने की इच्छा रखने वाली दो वयस्क सगी बहनों को 6 अगस्त 2026 को अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह आदेश एक बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है, जिसमें उनके पिता द्वारा उन्हें अवैध रूप से कैद रखने का आरोप लगाया गया है। ➡️ पक्षकार (Parties)याचिकाकर्ता (बहनें):  ⚫ दिव्या भाटिया उर्फ जोया दीया भाटिया (आयु लगभग 20 वर्ष) और अंशु भाटिया उर्फ अमीना अंशु भाटिया (आयु लगभग 35 वर्ष)। ⚫ प्रतिवादी/अन्य पक्ष: उत्तर प्रदेश राज्य, संबंधित पुलिस अधिकारी और युवतियों के पिता (अनिल कुमार भाटिया)। ➡️ मामले के मुख्य बिंदु और आरोप स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन:  याचिकाकर्ताओं के वकील (अली बिन सैफ और कैफ हसन) ने तर्क दिया कि दोनों बहनों ने बिना किसी बल, दबाव, धोखाधड़ी या प्रलोभन के अपनी स्वतंत्र इच्छा से हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम धर्म स्वीकार किया है और वे अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करना चाहती हैं। ⚫ अवैध कैद का आरोप : याचिका में आरोप लगाया गया है कि उनके पिता इस फैसले से नाराज है...

पत्नी को अंतरिम गुज़ारा-भत्ता देने से इनकार किया जा सकता है-सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई 2026 को कहा कि  CrPC की धारा 125 के तहत पत्नी को अंतरिम गुज़ारा-भत्ता देने से इनकार किया जा सकता है, अगर पति शुरुआती स्तर पर ही पत्नी के एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर (व्यभिचार) को साबित कर देता है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि पति CrPC की धारा 125(4) के तहत शुरुआती स्तर पर ही पुख्ता सबूतों से पत्नी का व्यभिचार (एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर) साबित कर देता है, तो पत्नी को अंतरिम गुज़ारा-भत्ता पाने का अधिकार नहीं है।  ⚫ मामले की पृष्ठभूमि:  पति ने 2014 में शादी के बाद 2020 में अलग होने के बाद पत्नी पर व्यभिचार का आरोप लगाया था; निचली अदालत व हाईकोर्ट ने कहा था कि एडल्टरी का मुद्दा मुख्य सुनवाई के दौरान ही परखा जाएगा, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बदल दिया। ➡️ मुख्य बिंदु और अदालत का फैसला पक्षकार :  ⚫ हिमांशु चौरड़िया (पति) बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य (पत्नी)। ⚫ पीठ (Bench): जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली। ⚫ निर्णय का आधार: अदालत ने कहा कि निचली अदालतें और हाईकोर्ट यह मानकर गलती नहीं कर सकते कि व्यभिचार के आरोपों पर केवल अंतिम फैसले के वक्त...

You tuber फैला रहे भ्रम COP को लेकर

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     AIBE पास सभी अधिवक्ताओं की सूचना के लिए यह जानकारी दे रही हूँ कि COP FORM भरने के लिए बार काउन्सिल ऑफ उत्तर प्रदेश द्वारा कोई ऑनलाइन प्रक्रिया आरंभ नहीं की गई है. इसके लिए आपको DECLARATION FORM ही भरना होगा. बार काउन्सिल ऑफ उत्तर प्रदेश द्वारा केवल रजिस्ट्रेशन और COP कार्ड डाउनलोड करने की सुविधा वेबसाइट पर उपलब्ध करायी गयी है किन्तु वह भी तब जब आप रजिस्ट्रेशन और COP का फॉर्म भरकर बार काउन्सिल ऑफ उत्तर प्रदेश में जमा करा देते हैं. ⚫ COP FORM ऐसे भरें- AIBE पास सभी अभ्यर्थी COP NUMBER के लिए निम्न प्रक्रिया का अनुसरण करें- 🌑 हाई स्कूल से लेकर एनरोलमेंट तक सर्टिफिकेट की फोटो कॉपी. सभी को self attested कीजिए.  🌑 आधार कार्ड की कॉपी  🌑 AIBE पास सर्टिफिकेट की फोटो कॉपी.  🌑 दो पासपोर्ट साइज कलर फोटो कोट एन्ड बैंड में जिसमें से एक फॉर्म पर लगाना है और एक पन्नी में रखकर फॉर्म से संलग्न करना है.ध्यान रहे कि फोटो के ऊपर पिन न आये.  🌑 250/-रुपये एक लिफाफे मे यह लिखकर (आवेदन फीस इसमे है) भेज सकते हैं.  ⚫ आप जिस बार एसोसिएशन के सदस्य हैं उस बार एसोसिएश...

कुछ वकील काली भेड़-इलाहाबाद हाई कोर्ट

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 इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने वकीलों के वेश में मौजूद उन लोगों को "काली भेड़" (Black Sheep) कहा है जो हिंसा, मारपीट या अवैध गतिविधियों में शामिल होकर न्याय व्यवस्था और न्यायपालिका की गरिमा को नुकसान पहुँचाते हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने वकीलों के वेश में मौजूद कुछ भ्रष्ट और हिंसक आचरण वाले वकीलों को "काली भेड़ें" (Black Sheep) कहा है। यह टिप्पणी लखनऊ जिला अदालत परिसर के अंदर एक वादकारी (मुवक्किल) और बाहर से आए वकीलों के साथ मारपीट तथा न्यायिक कार्य में बाधा डालने के मामले में की गई है। ➡️ मामले से जुड़े मुख्य विवरण ⚫ घटना की तिथि : 21 जुलाई 2026, जब दिल्ली के कुछ अधिवक्ता अपने मुवक्किल मोहम्मद शाकिर के संपत्ति विवाद के सिलसिले में लखनऊ जिला न्यायालय पहुंचे थे। ⚫ आरोप : स्थानीय विपक्षी वकीलों द्वारा अदालत में पेश होने से रोकना, गाली-गलौज और मारपीट करना। ⚫ हाईकोर्ट की कार्रवाई :न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की विशेष पीठ ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया। ⚫ हाई कोर्ट की सख्ती: Allahabad High Court की पीठ (न्यायमूर्ति राजन राय और न...

मातृत्व अवकाश रोका नहीं जा सकता-इलाहाबाद हाई कोर्ट

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  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि  दूसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) केवल इस आधार पर नहीं रोका जा सकता कि पहली बार मिले मातृत्व अवकाश के बाद दो वर्ष पूरे नहीं हुए हैं।...... सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Code on Social Security, 2020) के प्रावधान उत्तर प्रदेश फाइनेंशियल हैंडबुक के नियमों पर प्रभावी होंगे । इस प्रकार इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि दो प्रसवों (गर्भधारण) के बीच दो साल का अंतराल न होने के आधार पर महिला कर्मचारी को मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) देने से इनकार नहीं किया जा सकता है। ➡️ वाद विवरण एवं मुख्य पक्षकार (Case Details) ⚫ अदालत :  इलाहाबाद उच्च न्यायालय ( Allahabad High Court ) ⚫ न्यायाधीश :  न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन (एकल पीठ) ⚫ मुख्य पक्षकार (याचिकाकर्ता):  शिखा यादव और अन्य (कानपुर नगर की स्टाफ नर्स) ⚫ विपक्षी प्राधिकारी:  चिकित्सा शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार ➡️ निर्णय के मुख्य बिंदु ⚫ दो साल की शर्त का खंडन:  अदालत ने स्पष्ट किया कि यूपी वित्तीय हैंडबुक या पुराने...

पहली शादी छिपाकर शादी करने वाला दूसरी पत्नी को गुजारा भत्ता देने के लिए बाध्य-इलाहाबाद हाई कोर्ट

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 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि  जिस महिला को पति की पहले से मौजूद शादी की बात छिपाकर शादी के लिए राजी किया गया, वह CrPC की धारा 125 के तहत गुज़ारा-भत्ता पाने की हकदार है, भले ही दोनों के बीच हुई शादी कानूनी रूप से अमान्य (void) हो। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी पहली शादी की बात छिपाकर दूसरी शादी करता है, तो वह महिला (दूसरी पत्नी) CrPC की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता पाने की हकदार है।  कोर्ट ने कहा कि  पति अपने धोखाधड़ी वाले आचरण का लाभ नहीं उठा सकता। ➡️ निर्णय की मुख्य बातें धोखाधड़ी का बचाव नहीं: कोर्ट ने माना कि यदि पत्नी को पहले से मौजूद विवाह की जानकारी नहीं थी और उसे धोखे में रखकर शादी के लिए राजी किया गया, तो विवाह शून्य (void) होने के बावजूद पति भरण-पोषण देने से मना नहीं कर सकता। ⚫ सुप्रीम कोर्ट के दृष्टांत:  जस्टिस प्रसाद ने 'बादशाह बनाम सौ उर्मिला बादशाह गोडसे (2013)' और 'कमला व अन्य बनाम एमआर मोहन कुमार (2018)' में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसलों का हवाला देते हुए कहा कि  जब कोई पति अपनी ...

12 वर्ष बाद अनुकम्पा नियुक्ति रद्द नहीं की जा सकती-इलाहाबाद हाईकोर्ट

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 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि   यदि अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) देते समय विभाग को आवेदक के पिता की सरकारी नौकरी की जानकारी थी और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद नियुक्ति दी गई थी, तो लगभग 12 वर्ष बाद यह कहते हुए सेवा समाप्त नहीं की जा सकती कि आवेदक ने तथ्य छिपाए थे। इस प्रकार इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 12 साल पहले मां की मृत्यु के बाद मिली अनुकंपा नियुक्ति को इस आधार पर नहीं छीना जा सकता कि पिता की सरकारी नौकरी की जानकारी छिपाई गई थी, क्योंकि विभाग को नियुक्ति के समय ही यह तथ्य पता था। ⚫ निर्णय के पक्षकार (Parties) याचिकाकर्ता: उपासना अग्रवाल (वरिष्ठ लिपिक पद पर कार्यरत कर्मचारी) विपक्ष/प्रतिवादी: उत्तर प्रदेश सरकार एवं अन्य संबंधित जिला अधिकारी/जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मामले का विवरण नियुक्ति का वर्ष: याचिकाकर्ता को करीब 12 वर्ष पूर्व अपनी माता की मृत्यु के बाद अनुकंपा के आधार पर नौकरी दी गई थी।सेवा समाप्ति का आदेश: जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा 11 अगस्त 2025 को एक शिकायत के आधार पर याचिकाकर्ता की सेवा यह कहते हुए समाप्त...

दागी वकीलों पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की सख्त कार्रवाई

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  इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जघन्य अपराधों के आरोपी वकीलों की वकालत पर मुकदमा खत्म होने तक रोक लगाने का सख्त निर्देश दिया है।  ⚫ यह फैसला मोहम्मद कफील बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (Mohammad Kafeel v. State of UP) के मामले में दिया गया है। ➡️ मुख्य नियम और निर्देशप्रैक्टिस पर रोक:  7 साल या उससे अधिक सजा वाले गंभीर/जघन्य अपराधों के आरोपी वकील कोर्ट में पेश नहीं हो सकेंगे और उनका एनरोलमेंट/वकालत का काम मामले के फैसले तक निलंबित रहेगा.  ⚫  छूट:  यह नियम पारिवारिक और वैवाहिक मामलों पर लागू नहीं होगा। ⚫ केस ट्रांसफर :  ऐसे दागी वकीलों से जुड़े आपराधिक मुकदमे सुनवाई के लिए उनके गृह जिले से लगभग 100 किलोमीटर दूर दूसरे जिले की नामित अदालत में ट्रांसफर किए जाएंगे। ⚫ मुवक्किलों की सुरक्षा:  मुवक्किल को अपनी पसंद का दूसरा वकील चुनने का पूरा मौका दिया जाएगा। आर्थिक रूप से कमजोर मुवक्किलों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) द्वारा मुफ्त कानूनी सहायता दी जाएगी। ⚫ लागू कराने की जिम्मेदारी:  संबंधित जिलों के जिला जज (District Judge), डीएम (DM) और एसएसपी/पुलिस कमिश्न...

बंदरों के आतंक और मानव बन्दर संघर्ष पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त

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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में बंदरों के बढ़ते आतंक और मानव-बंदर संघर्ष पर सख्त रुख अपनाते हुए हाल ही में राज्य सरकार द्वारा गठित 13 सदस्यीय हाई-पावर्ड कमेटी को केवल कागजों तक सीमित न रहकर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।अदालत ने कहा कि समिति नियमित बैठकें करें और सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे. ➡️ कोर्ट के मुख्य निर्देश और अपडेट ⚫ मुख्य पक्षकार (Parties Involved) ⚫ याचिकाकर्ता (Petitioners):  विनीत शर्मा और प्रजाक्ता सिंहल, जिनकी ओर से वकील पवन कुमार तिवारी और आकाश वशिष्ठ पैरवी कर रहे हैं। ⚫ प्रतिवादी/विपक्षी (Respondents):  उत्तर प्रदेश सरकार (अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल), नगर निकाय, वन विभाग और अन्य संबंधित अधिकारी। ⚫ कमेटी की सक्रियता:  अदालत ने स्पष्ट किया कि 15 जुलाई 2026 को गठित 13 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति नियमित बैठकें करे और याचिकाकर्ताओं द्वारा सुझाई गई कार्ययोजना पर जल्द से जल्द ठोस निर्णय ले। ⚫ कार्रवाई रिपोर्ट तलब:  कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह अगली सुनवाई पर समिति की बैठकों की कार्यवाही (मिनट्स) और अब तक हुई प...