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ये भी क्रूरता है संभलकर ....

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           आपका लिखा एक खत आपको क्रुर बताने और तलाक दिलाने के लिए काफी है। कोर्ट ने अपने पत्नी से अलग रह रहे एक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही।   द टाइम्स ऑफ इं‌‌डिया में छपी एक खबर के मुताबिक पीड़ित व्यक्ति 28 साल से अपनी पत्नी से अलग रह रहा था। 1990 में उसकी पत्नी ने गुस्से में आकर अपने पति को एक चिट्ठी लिखी। चिट्ठी में पत्नी ने कहा कि वह तलाक चाहती है। उसे अपना एक पूर्व प्रेमी वापस मिल गया है, और वह उससे शादी करना चाहता है।   पत्नी ने पत्र में यह भी बताया कि वह उनकी बेटी को भी अपनाने को तैयार है। उस वक्त महिला का पति विदेश में नौकरी करता था जबकि उसकी पत्नी भारत में ही थी।   यह मामला ट्रायल कोर्ट में चल रहा था। अब इस मामले में दिल्‍ली हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए पति को तलाक की अनुमति दे दी। कोर्ट ने व्यक्ति को तलाक की अनुमति के साथ कहा कि एक पत्र भी जिसमें मानसिक कष्ट हो उसे भी क्रुरता का व्यवहार का आधार माना जा सकता है। दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश नाजमी वजीरी ने ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार र...

धारा 375-भारतीय दंड संहिता

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The Indian Penal Code, 1860 Citation Act No. 45 of 1860 Territorial extent Whole of India except the State of  Jammu and Kashmir Enacted by Parliament of India Date enacted 6 October 1860 Date assented to 6 October 1860 Date commenced 6 October 1860 भारतीय दंड संहिता १८६० का अध्याय १६ का उप-अध्याय ''यौन अपराध ''से सम्बंधित है जिसमे धारा ३७५ कहती है- [ I.P.C. ] Central Government Act Section 375 in The Indian Penal Code, 1860 375. Rape.-- A man is said to commit" rape" who, except in the case hereinafter excepted, has sexual intercourse with a woman under circumstances falling under any of the six following descriptions:- First.- Against her will. Secondly.- Without her consent. Thirdly.- With her consent, when her consent has been obtained by putting her or any person in whom she is interested in fear of death or of hurt. Fourthly.- With her consent, when the man knows that he is not her husband, and that her consent is given becau...

गैंगरेप में मृत्यु दंड हो

मृत्युदंड एक ऐसा दंड जिसका समर्थन और विरोध हमेशा से होता रहा है पर जब जब इसके विरोध की आवाज़ तेज हुई है तब तब कोई न कोई ऐसा अपराध सामने आता रहा है जिसने इसकी अनिवार्यता पर बल दिया है हालाँकि इसका  समर्थन और विरोध न्यायपालिका में भी रहा है किन्तु अपराध की नृशंसता इस दंड की समाप्ति के विरोध में हमेशा से खड़ी रही है और इसे स्वयं माननीय न्यायमूर्ति ए.पी.सेन ने ''कुंजू कुंजू बनाम आंध्र प्रदेश राज्य क्रिमिनल अपील ५११ [१९७८] में स्वीकार किया है .     ''कुंजू कुंजू बनाम आंध्र प्रदेश राज्य के वाद में अभियुक्त एक विवाहित व्यक्ति था जिसके दो छोटे बच्चे भी थे .उसका किसी युवती से प्रेम हो गया और उससे विवाह करने की नीयत से उसने अपनी पत्नी और दोनों बच्चों की रात में सोते समय निर्मम हत्या कर दी .''      इस वाद में यद्यपि न्यायाधीशों ने 2:1 मत से इन तीन हत्याओं के अभियुक्त की मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदल दिया जाना उचित समझा परन्तु न्यायमूर्ति ए .पी. सेन ने अपना विसम्मत मत व्यक्त करते हुए अवलोकन किया -   '' अभियुक्त ने एक राक्षसी कृत्य किया है तथा अपनी पत्नी त...

'पत्नी की तलाक और दूसरी शादी की धमकी क्रूरता

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आपका लिखा एक खत आपको क्रुर बताने और तलाक दिलाने के लिए काफी है। कोर्ट ने अपने पत्नी से अलग रह रहे एक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही।   द टाइम्स ऑफ इं‌‌डिया में छपी एक खबर के मुताबिक पीड़ित व्यक्ति 28 साल से अपनी पत्नी से अलग रह रहा था। 1990 में उसकी पत्नी ने गुस्से में आकर अपने पति को एक चिट्ठी लिखी। चिट्ठी में पत्नी ने कहा कि वह तलाक चाहती है। उसे अपना एक पूर्व प्रेमी वापस मिल गया है, और वह उससे शादी करना चाहता है।   पत्नी ने पत्र में यह भी बताया कि वह उनकी बेटी को भी अपनाने को तैयार है। उस वक्त महिला का पति विदेश में नौकरी करता था जबकि उसकी पत्नी भारत में ही थी।   यह मामला ट्रायल कोर्ट में चल रहा था। अब इस मामले में दिल्‍ली हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए पति को तलाक की अनुमति दे दी। कोर्ट ने व्यक्ति को तलाक की अनुमति के साथ कहा कि एक पत्र भी जिसमें मानसिक कष्ट हो उसे भी क्रुरता का व्यवहार का आधार माना जा सकता है। दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश नाजमी वजीरी ने ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार रखते हुए कहा है कि अपनी पत्नी� से दूर रह रहे...

विवाह विच्छेद /तलाक और महिला अधिकार

आज मैं आप सभी को जिस विषय में बताने जा रही हूँ उस विषय पर बात करना भारतीय परंपरा में कोई उचित नहीं समझता क्योंकि मनु के अनुसार कन्या एक बार ही दान दी जाती है किन्तु जैसे जैसे समय पलटा वैसे वैसे ये स्थितियां भी परिवर्तित हो गयी .महिलाओं ने इन प्रथाओं के कारण [प्रथाओं ही कहूँगी कुप्रथा नहीं क्योंकि कितने ही घर इन प्रथाओं ने बचाएं भी हैं] बहुत कष्ट भोगा है .हिन्दू व मुस्लिम महिलाओं के अधिकार इस सम्बन्ध में अलग-अलग हैं .   सर्वप्रथम हम मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की बात करते हैं.पहले मुस्लिम महिलाओं को तलाक के केवल दो अधिकार प्राप्त थे १-पति की नपुंसकता ,२-परपुरुशगमन का झूठा आरोप[लियन] किन्तु न्यायिक विवाह-विच्छेद [मुस्लिम विवाह-विच्छेद  अधिनियम१९३९]द्वारा मुस्लिम महिलाओं को ९ आधार प्राप्त हो गए हैं: १-पति की अनुपस्थिति, २-पत्नी के भरण-पोषण में असफलता, ३-पति को सात साल के कारावास की सजा, ४-दांपत्य दायित्वों के पालन में असफलता, ५-पति की नपुंसकता , ६-पति का पागलपन, ७-पत्नी द्वारा विवाह की अस्वीकृति[यदि विवाह के समय लड़की १५ वर्ष से काम उम्र की हो तो वह १८ वर्ष की होन...

अमर उजाला पर कार्यवाही हो

अमर उजाला हिंदी दैनिक समाचारपत्र का पृष्ठ -13 पर आज प्रकाशित एक समाचार भारतीय दंड संहिता -१८६० के अधीन उसे अर्थात अमर उजाला को कानून के उल्लंघन का दोषी बनाने हेतु पर्याप्त है जिस पर अमर उजाला ने बाँदा चित्रकूट में हारने वाली एक प्रत्याशी शीलू को गैंगरेप पीड़ित लिख प्रचारित किया है जो कि भारतीय दंड संहिता की धारा २२८-क के अधीन अपराध है और जिसका अवलोकन आप सभी कर अमर उजाला के इस अपराध को स्वीकार कर सकते हैं जिसके मुद्रण या प्रकाशन के सम्बन्ध में भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत कई पाबंदियां लगायी गयी हैं जो इस प्रकार हैं - भारतीय दंड संहिता की धारा २२८-क कहती है - [१] - जो कोई किसी नाम या अन्य बात को ,जिससे किसी ऐसे व्यक्ति की [ जिसे इस धारा में इसके पश्चात पीड़ित व्यक्ति कहा गया है ] पहचान हो सकती है , जिसके विरुद्ध धारा ३७६ , धारा ३७६-क ,धारा ३७६-ख , या धारा ३७६-घ के अधीन किसी अपराध का किया जाना अभिकथित है या किया गया पाया गया है , मुद्रित या प्रकाशित करेगा वह दोनों में किसी भांति के कारावास से , जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी , दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दंडन...

सबूत का भार सुब्रमणियम स्वामी पर

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भारतीय राजनीति में ऐसे लोग कम नहीं जिनकी राजनीतिक रोटियां केवल और केवल गांधी परिवार की बुराई के चूल्हे पर ही सिंकती हैं और केवल इस परिवार की बुराई करकर ही वे स्वयं को बहुत बड़ा देशभक्त साबित करते हैं और इन्हीं नेताओं में से सर्वप्रमुख नेता हैं ''माननीय सुब्रमणियम स्वामी'' अभी हाल ही में वे एक बहुत बड़ा मुद्दा [केवल उनकी नज़रों में ] लेकर आये हैं और वह है राहुल गांधी के ब्रिटिश नागरिक होने का मुद्दा ,वे कहते हैं कि - ''राहुल ब्रिटिश नागरिक हैं '' Rahul Gandhi is a British citizen, Subramanian Swamy says; NEW DELHI:  BJP leader Subramanian Swamy on Monday alleged that Congress vice-president Rahul Gandhi has claimed himself to be a British national  before the authorities there and has demanded that he be stripped of Indian citizenship and Lok Sabha membership. और अब वे कह रहे हैं कि ''राहुल साबित करें , वह ब्रिटिश नागरिक नहीं ''और अपने इस दावे के समर्थन में वे ब्रिटिश सरकार की आधिकारिक वेबसाइट से उपलब्ध दस्तावेज का हवाला देते हुए कहत...