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शनिवार, 30 नवंबर 2013

पति का धर्म परिवर्तन व् दूसरे विवाह पर हिन्दू महिला का अधिकार


मेरे एक आलेख पर जो कि जब मैं नारी ब्लॉग की सदस्या थी पर मेरे आलेख विवाह विच्छेद /तलाक और महिला अधिकारपर टिप्पणी कर प्राची पाराशर पूछती हैं -
[prachi parashar-
November 28, 2013 at 6:48 PM
after 16 yrs of my happy love merrige life my husband indulge with a muslim widow lady with her 3 own children.now i have stopped crying and put my application in mahila help line .please help me for the further steps .i dont want to live a compromising life .i have my 3 children ,out of which my eldest daughter has compleated her14th and the youngest one is going towards his5th .plz guide me about my rights which i can get if there is any condition of divorce.]
और इनकी समस्या को देखते हुए हिन्दू विधि में निम्न उपचार प्रदान किये गए हैं -
* विवाह विधि संशोधन अधिनियम १९७६ के पश्चात् यदि किसी हिन्दू महिला का पति धर्म परिवर्तन द्वारा हिन्दू नहीं रह गया है तो वह पत्नी तलाक की आज्ञप्ति प्राप्त कर सकती है अर्थात तलाक ले सकती है .धर्म परिवर्तन से तलाक खुद ही नहीं हो जाता इसके लिए उसे याचिका दायर करनी होगी और आज्ञप्ति प्राप्त करनी होगी आज्ञप्ति के बाद ही तलाक होगा .
*साथ ही हिन्दू दत्तक तथा भरण पोषण अधिनियम १९५६ के अंतर्गत वह और उसके बच्चे पोषण के अधिकारी भी हैं .इस अधिनियम की धारा १८ के अधीन पत्नियों को दो प्रकार के अधिकार दिए गए हैं -
१- भरण पोषण ;
२-पृथक निवास का अधिकार .
कोई भी हिन्दू पत्नी बिना पोषण का अधिकार खोये हुए अपने पति से उसके धर्म त्याग के आधार पर पृथक निवास की अधिकरणी होगी .
* इसके साथ ही दंड प्रक्रिया संहिता १९७३ की धारा १२५ भी उसे और उसके बच्चों को ये अधिकार देती है -
दंड प्रक्रिया सहिंता १९७३ की धारा १२५ [१] के अनुसार ''यदि पर्याप्त साधनों वाला कोई व्यक्ति -
[क] अपनी पत्नी का ,जो अपना भरण पोषण करने में असमर्थ है ,
[ख] अपनी धर्मज या अधर्मज अव्यस्क संतान का चाहे विवाहित हो या न हो ,जो अपना भरण पोषण करने में असमर्थ है ,या
[ग] -अपने धर्मज या अधर्मज संतान का [जो विवाहित पुत्री नहीं है ],जिसने वयस्कता प्राप्त कर ली है ,जहाँ ऐसी संतान किसी शारीरिक या मानसिक असामान्यता या क्षति के कारण अपना भरण -पोषण करने में असमर्थ है
भरण पोषण करने की उपेक्षा करता है या भरण पोषण करने से इंकार करता है तो प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट ,ऐसी उपेक्षा या इंकार साबित होने पर ,ऐसे व्यक्ति को ये निर्देश दे सकेगा कि वह अपनी ऐसी पत्नी या ऐसी संतान को ऐसी मासिक दर पर जिसे मजिस्ट्रेट उचित समझे भरण पोषण मासिक भत्ता दे .
शालिनी कौशिक
[कानूनी ज्ञान ]

रविवार, 10 नवंबर 2013

कम से कम कानून तो जाने भारतवासी .क्योंकि.......

कम से कम कानून तो जाने भारतवासी .क्योंकि.......
भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार श्री नरेंद्र मोदी ही नहीं उनके बहुत से समर्थक भी ऐसे हैं जो देश की व्यवस्था के बारे में बहुत कम जानकारी रखते हैं और हर स्थिति जिसका सामना आज देश कर रहा है उसके लिए एकपक्षीय रूप से कॉंग्रेस सरकार को उत्तरदायी ठहराना शुरू कर देते हैं .
किस्सा है आज दिन का जब मैं अपने पापा व् अंकल के साथ गाड़ी में जा रही थी कि एकाएक गाड़ी में सड़कों के गड्ढों के कारण धक्के लगने लगे और अंकल ने शुरू किया कॉंग्रेस को कोसना ,''भाईसाहब !कॉंग्रेस ने देश का सत्यानाश कर दिया ,देख लीजिये सड़कों का हाल और ऐसा वे तब कह रहे हैं जब एक लम्बे समय से कॉंग्रेस उत्तर प्रदेश में सत्ता से बाहर है और यहाँ कथित योग्य व् ईमानदार भाजपा [केवल तब तक जब तक सत्ता न मिले ] सपा व् बसपा का ही शासन रहा है देखिये सही स्थिति [विकिपीडिया से साभार ]-

 Varansi Ghat

Ex. CHIEF MINISTERS OF UTTAR PRADESH

Ms. Mayawati
Party:BSP
Period:13.05.07 to 14.03.12
Party:BSP-BJP
Period:03.05.02 to 28.08.03
21.03.97 to 21.09.97
03.06.95 to 17.10.95
  
  
 
Sri Mulayam Singh Yadav
Party:SP+
Period:29.08.03 to 12.05.07
Party:SP-BSP,SP
Period:SP-BSP
04.12.93 to 03.06.95
SP
05.12.89 to 24.06.91
 
Sri. Ram Prakash Gupta
Party:BJP - Alliance
Period:12.11.99 to 28.10.2000
Sri Kalyan Singh
Party:BJP-Alliance
Period:21.09.97 to 11.11.99
24.06.91 to 06.12.92
 
Sri Rajnath Singh
Party:BJP - Alliance
Period:28.10.2000 to 7.3.2002
 
Sri N.D. Tiwari
Party:INC
Period:25.06.88 to 05.12.89
21.01.76 to 30.04.77
03.08.84 to 10.03.85
11.03.85 to 24.09.85
Sri Vir Bahadur Singh
Party:INC
Period:24.09.85 to 24.06.88
 
Sri Sripati Misra
Party:INC
Period:19.7.82 to 3.8.84
 
Sri V.P. Singh
Party:INC
Period:9.6.80 to 18.7.82
Sri Banarasi Das
Party:JP
Period:28.2.79 to 17.2.80
 
Sri Ram Naresh yadav
Party:JP
Period:23.6.77 to 27.2.79
 
Sri Hemvati Nandan Bahuguna
Party:INC
Period:15.3.74 to 29.11.75,
8.11.73 to 4.3.74
Pt. Kamlapati Tripathi
Party:INC
Period:4.4.71 to 12.06.73
 
Sri T N Singh
Party:INC
Period:18.10.70 to 3.4.71
 
Sri Charan Singh
Party:BLD
Period:03.04.67 to 25.02.68 ,
17.02.70 to 01.10.70
Sri Chandrabhanu Gupta
Party:INC
Period:26.02.69 to 17.02.70,
14.03.67 to 02.04.67,
14.03.62 to 01.10.63,
07.12.60 to 14.03.62
 
Ms Sucheta Kriplani
Party:INC
Period:02.10.63 to 13.03.67
 
Sri Sampoornananda
Party:INC
Period:28.12.54 to 06.12.60
Sri Govind Ballabh Pant
Party:INC
Period:01.04.46 to 27.12.54
   

और यह भी कि सड़कें राज्य सूची के विषय में आती हैं और राज्य सूची के बारे में हमारा संविधान कहता है -
-अनु.२४६-[३] खंड [१] और खंड [२] के अधीन रहते हुए ,किसी राज्य के विधान मंडल को सातवीं अनुसूची की सूची [२] में [ जिसे इस संविधान में राज्य सूची कहा गया है ] प्रगणित किसी भी विषय के सम्बन्ध में उस राज्य या उसके किसी भी भाग के लिए विधि बनाने की अनन्य शक्ति है .
और सातवीं अनुसूची की सूची -२ राज्य सूची के १३- भाग में कहा गया है कि
१३- संचार साधन ,अर्थात सड़कें ,पुल फैरी और अन्य संचार साधन जो सूची १ में विनिर्दिष्ट नहीं हैं ;नगर पालिका ट्राम ,रज्जुमार्ग ,अंतर्देशीय जलमार्गों के सम्बन्ध में सूची १ और सूची ३ के उपबंधों के अधीन रहते हुए ,अंतर्देशीय जलमार्ग और उन पर यातायात ,यंत्र नोदित यानों से भिन्न यान .
ऐसे में कम से कम आम जनता को तो नरेंद्र मोदी बनने से बचना चाहिए क्योंकि वे तो चुनाव जीतने की लालसा में जो भी जैसे भी बोलकर जनता का पागल बनाने में लगे हैं और भले ही राहुल गांधी हों या नरेंद्र मोदी वे चुनाव आयोग में शिकायत होने के बावजूद कानून से साफ बचकर निकल जायेंगे किन्तु जनता की कानून को लेकर अनभिज्ञता क्षम्य नहीं है और इस तरह जनता ऐसी बाते कर स्वयं अपना ही पागल बना रही है .
शालिनी कौशिक
[कानूनी ज्ञान ]