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शामली जिले के व्यापारी बंधुओं की जागरुकता को सलाम

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  शामली में दिल्ली रोड स्थित एक मेटल फैक्ट्री में पर्यावरण अधिकारी बनकर वसूली करने वाले गिरोह के दो फर्जी सदस्यों, आबिद और ऋषिराज, को उद्यमियों ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। आरोपी प्रदूषण जांच के नाम पर फैक्ट्री संचालकों से अवैध वसूली कर रहे थे, जबकि तीसरा आरोपी जीशान फरार है। पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है.  ➡️  शामली फर्जी अधिकारी प्रकरण के मुख्य विवरण: ✒️ घटनास्थल : शामली के दिल्ली रोड स्थित सुखमाल चंद मेटल इंडस्ट्रीज। ✒️ आरोपी : आबिद (कैराना निवासी) और ऋषिराज मलिक (बड़ौत, बागपत निवासी) गिरफ्तार, जीशान (कैराना) फरार। ✒️ कार्यशैली : तीनों सफेद गाड़ी में आकर खुद को पर्यावरण आयोग के अधिकारी बताकर फैक्ट्री में छापेमारी करते थे। ✒️ उद्देश्य: प्रदूषण नियमों के उल्लंघन का डर दिखाकर फैक्ट्री मालिकों से अवैध वसूली करना। ✒️ पर्दाफाश : संदिग्ध लगने पर उद्यमियों (लघु उद्योग भारती) ने उनके आई-कार्ड और पूछताछ में फर्जीवाड़े का खुलासा किया।  फर्जी अधिकारी की पहचान कैसे करें? ⚫ धैर्य और शांति बनाए रखें और वेरिफिकेशन (सत्यापन) मांगें :  आम जनता को चाहिए ...

बिजली कनेक्शन अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार - इलाहाबाद हाइकोर्ट

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  इस बात पर ज़ोर देते हुए कि बिजली कनेक्शन पाना भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकार है, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे वैवाहिक विवाद के बीच एक नई घरेलू बिजली कनेक्शन के लिए एक बहू द्वारा दायर आवेदन पर कार्रवाई करें। जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत प्रीति शर्मा द्वारा दायर एक रिट याचिका पर यह आदेश पारित किया। संक्षेप में मामला याचिकाकर्ता (शर्मा) प्रतिवादी नंबर 7 की बहू है और प्रतिवादी नंबर 6 की पत्नी है। उसका पक्ष यह था कि वह रायबरेली जिले में एक साझा घर में 20 वर्षों से अधिक समय से रह रही है और उसके छोटे बच्चे हैं। हालांकि, उसके ससुराल वाले एक वैवाहिक विवाद के कारण उसे उक्त घर से अवैध तरीके से निकालने की कोशिश कर रहे हैं। हाईकोर्ट के समक्ष यह प्रस्तुत किया गया कि उसकी बिजली की आपूर्ति काट दी गई, भले ही वह नियमित रूप से बिजली के बिलों का भुगतान करती थी। इसलिए उसने फरवरी, 2026 में बिजली विभाग के पास एक नए कनेक्शन के लिए आवेदन दायर किया। चूंकि इस आव...

महिला आरक्षण कानून लागू

 केंद्र सरकार ने संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 को 16 अप्रैल 2026 से लागू कर दिया है, जिसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण का प्रावधान है। विधि एवं न्याय मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर इस तारीख को कानून के लागू होने की तिथि घोषित किया। गौरतलब है कि इस कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी 2023 में ही मिल गई थी, लेकिन इसकी धारा 1(2) के तहत इसे लागू करने की तारीख केंद्र सरकार की अधिसूचना पर निर्भर थी, जिसके कारण यह अब तक लागू नहीं हुआ था।  यह अधिसूचना ऐसे समय में आई है जब संसद में परिसीमन (delimitation) और महिला आरक्षण के क्रियान्वयन से जुड़े नए संवैधानिक संशोधनों पर चर्चा चल रही है। 2023 के कानून के अनुसार, महिला आरक्षण अगले जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही लागू होना था। इसी बीच, केंद्र सरकार ने 16 अप्रैल को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पेश किया है, जिसमें लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने और महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने वाली शर्त में बदलाव का प्रस्ताव है, ताकि इसे जल्द लागू किया जा सके। हालांकि, विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण का...

रजिस्टर्ड एडवोकेट को ही वकालत का अधिकार - इलाहाबाद हाइकोर्ट

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ़ तौर पर कहा कि  कोई भी व्यक्ति, भले ही उसके पास पावर ऑफ़ अटॉर्नी हो, एडवोकेट्स एक्ट, 1961 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए मुक़दमे लड़ने वालों की ओर से और उनकी तरफ़ से एक वकील या अटॉर्नी के तौर पर अधिकार के तौर पर पेश होकर बहस नहीं कर सकता।  एडवोकेट्स एक्ट 1961 की धारा 29 और 33 का ज़िक्र करते हुए जस्टिस विनोद दिवाकर की बेंच ने साफ़ तौर पर कहा कि   सिर्फ़ "रजिस्टर्ड वकील" ही किसी दूसरे व्यक्ति की ओर से कोर्ट के सामने पेश होकर बहस कर सकते हैं। बेंच ने आगे कहा कि  हालांकि कोई भी व्यक्ति कोर्ट की मंज़ूरी से किसी सीमित मकसद के लिए किसी दूसरे व्यक्ति का केस पेश कर सकता है और बहस कर सकता है, लेकिन अधिकार के तौर पर ऐसा नहीं कर सकता [धारा 32]।  इन टिप्पणियों के साथ बेंच ने एक याचिका खारिज की, जिसमें याचिकाकर्ता ने मुक़दमे लड़ने वालों की ओर से और उनकी तरफ़ से केस लड़ने और बहस करने की इजाज़त माँगी थी, जबकि वह न तो क़ानून का जानकार ग्रेजुएट था और न ही बार काउंसिल में रजिस्टर्ड था। संक्षेप में केस -  याचिकाकर्ता [विश्राम सिंह] ने दावा किया कि व...

बाईक से पटाखा फोड़ने वाले हो जाएं सावधान

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हिन्दुस्तान दैनिक 18 अप्रैल 2026 मे प्रकाशित समाचार के अनुसार ध्वनिप्रदूषण और सड़क सुरक्षा को लेकर परिवहन - आयुक्त ने निर्देशों के क्रम में महकमे ने वाहन डीलरों व मोटर गैराज/वर्कशॉप संचालकों की बैठक बुलाकर कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि मोडिफाइड साइलेंसर, प्रेशर हॉर्न (हूटर) की बिक्री या फिटिंग करने वालों पर मोटरयान अधिनियम के तहत प्रति मामले एक, लाख रुपये तक का जुर्माना लगेगा। यही नहीं, यदि कोई वाहन स्वामी अपने वाहन में पुर्जों की फिटिंग द्वारा इस प्रकार का अवैध परिवर्तन करता है, तो उसे 6 माह तक की जेल या 5 हजार रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। इसके साथ ही जो कोई व्यक्ति किसी सार्वजानिक स्थान में ऐसा मोटर यान चलाएगा, अथवा चलाने देगा जिससे सड़क सुरक्षा, शोर नियंत्रण एवं वायु प्रदूषण के सम्बन्ध में विहित मानकों का उल्लंघन होता हैं, उनके विरूद्ध भी मोटरयान अधिनियम के तहत विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। इसमें संबंधित व्यक्ति, पहले अपराध के लिए ही तीन माह तक की जेल या दस हजार रूपये तक के जुमनि या दोनों से दंडित किया जाएगा और उसका लाइसेंस, तीन माह की अवधि के लिए निरर्हित कर दिया ज...

संपत्ति की कुर्की से पूर्व नोटिस देना जरूरी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि 'बीएनएसएस की धारा 106 के तहत पुलिस द्वारा संपत्ति कुर्क करने के लिए संबंधित व्यक्ति को पहले से कोई नोटिस देना ज़रूरी नहीं है। कोर्ट ने धारा 106 औरं धारा 107 के बीच अंतर स्पष्ट किया। धारा 107 में विशेष रूप से यह प्रावधान है कि मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति को नोटिस जारी करेगा, जिसकी संपत्ति बीएनएसएस की धारा 107 के तहत कुर्क की जानी है।  बीएनएसएस की धारा 106 पुलिस को ऐसी किसी भी संपत्ति को ज़ब्त करने का अधिकार देती है, जिसके बारे में यह आरोप हो या संदेह हो कि वह चोरी की है, या जो ऐसी परिस्थितियों में पाई गई हो, जिनसे किसी अपराध के होने का संदेह पैदा होता हो।  धारा 107 भी संपत्ति कुर्क करने की बात करती है, जिसके तहत पुलिस संपत्ति कुर्क करने के लिए पुलिस अधीक्षक या पुलिस आयुक्त से पहले अनुमति लेने के बाद अपने अधिकार क्षेत्र वाले मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रार्थना पत्र देती है। मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस जारी करने और उसे अपनी बात रखने का उचित अवसर देने के बाद, जिसकी संपत्ति कुर्क की जानी है, कुर्की के संबंध में आदेश कर सकता है।...

आपसी सहमति से तलाक मे वापसी नहीं : सुप्रीम कोर्ट

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  सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि   भले ही आपसी सहमति से तलाक के मामलों में कोई भी पक्ष अंतिम डिक्री से पहले अपनी सहमति वापस ले सकता है, लेकिन यदि पति-पत्नी के बीच सभी विवादों का पूर्ण और अंतिम समझौता (Full & Final Settlement) हो चुका हो, तो उस समझौते की शर्तों से पीछे हटना स्वीकार्य नहीं है।  जस्टिस राजेश बिंडल और जस्टिस विजय बिश्नोई की खंडपीठ ने यह टिप्पणी उस मामले में की, जिसमें पत्नी द्वारा अदालत-मान्य मध्यस्थता समझौते से पीछे हटने पर कड़ी नाराज़गी जताई गई। ➡️ पूरा मामला :  विवादित पक्षों की शादी वर्ष 2000 में हुई थी। वर्ष 2023 में पति ने तलाक की याचिका दायर की, जिसके बाद फैमिली कोर्ट ने मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा। मध्यस्थता में दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ, जिसके तहत उन्होंने आपसी सहमति से तलाक लेने और सभी विवादों का निपटारा करने पर सहमति जताई। समझौते के अनुसार, पति ने पत्नी को ₹1.5 करोड़ दो किश्तों में देने, ₹14 लाख कार खरीद के लिए देने और कुछ आभूषण सौंपने पर सहमति दी। वहीं, पत्नी ने संयुक्त व्यवसाय खाते से ₹2.5 करोड़ पति को ट्रांसफ...

अविवाहित सरकारी कर्मचारी-मृत्यु - अनुकम्पा नियुक्ति

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  अविवाहित सरकारी कर्मचारी की मृत्यु होने पर, अनुकंपा नियुक्ति उनके परिवार के आश्रित सदस्य को मिलती है। प्राथमिकता के क्रम में आमतौर पर माता-पिता या भाई-बहन (यदि अविवाहित सरकारी कर्मचारी पर पूरी तरह आश्रित हों) हकदार होते हैं या यदि मृतक व्यक्ति द्वारा किसी को अपने वारिस के तौर पर नामांकित किया गया हो तो वह हकदार होता है. यह नियुक्ति परिवार की आर्थिक मदद के लिए दी जाती है, न कि अधिकार के तौर पर।  ➡️ नगर पंचायत निदेशक बनाम एम जयबाल (2025) के केस में   भारत के सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ के न्यायमूर्ति मनमोहन व न्यायमूर्ति राजेश बिंदल ने इस तथ्यात्मक संरचना का उपयोग करते हुए, समेकित और सशक्त तरीके से, कानून के चार केंद्रीय सिद्धांतों को दोहराया: 1️⃣ अनुकंपा नियुक्ति कोई निहित अधिकार नहीं है , बल्कि यह अचानक आए वित्तीय संकट से निपटने के लिए दी जाने वाली एक बार की रियायत है । 2️⃣ एक बार आश्रित व्यक्ति अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति का प्रस्ताव स्वीकार कर लेता है, तो विचार करने का अधिकार "पूर्ण" हो जाता है ; दोबारा मौका नहीं मिल सकता या " अनंत करुणा " का कोई अवसर नहीं हो सक...

ग्राम न्यायालय को भरण पोषण मामले तय करने का अधिकार-इलाहाबाद हाई कोर्ट

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम निर्णय में स्पष्ट किया कि   ग्राम न्यायालयों को भरण-पोषण से जुड़े मामलों की सुनवाई और निष्पादन करने का पूरा अधिकार है। अदालत ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 से 128 तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 144 से 147 के तहत आने वाले मामलों पर भी ग्राम न्यायालय निर्णय ले सकते हैं। जस्टिस अब्दुल शाहिद की पीठ ने यह टिप्पणी एक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें उसने अपने भरण-पोषण आदेश के क्रियान्वयन के लिए लंबित प्रार्थना पत्र के शीघ्र निस्तारण की मांग की थी। मामले के अनुसार  महिला ने वर्ष 2018 में भरण-पोषण के लिए आवेदन किया, जिस पर 30 नवंबर 2024 को ग्राम न्यायालय के न्यायाधिकारी ने उसके पक्ष में आदेश दिया। इसके बाद महिला ने उसी न्यायालय में BNSS की धारा 147 के तहत आदेश के क्रियान्वयन के लिए याचिका दाखिल की, जो लंबित है। हाईकोर्ट ने कहा कि  भरण-पोषण से जुड़े मामलों के लिए दो कानून प्रावधान करते हैं, फैमिली कोर्ट एक्ट, 1984 और ग्राम न्यायालय अधिनियम, 2008। अदालत ने विशेष रूप से ग्राम न्यायालय अधिनियम की धारा 12 का ...

Census 2027 मकान सूचीकरण एवं आवास जनगणना प्रश्न

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मकान की जानकारी लाइन नंबर बिल्डिंग नंबर जनगणना मकान नंबर मकान के फर्श की मुख्य सामग्री मकान की दीवार की मुख्य सामग्री मकान की छत की मुख्य सामग्री मकान का उपयोग (रहने/दुकान/अन्य) मकान की स्थिति (अच्छी/सामान्य/खराब) परिवार (Household) की जानकारी परिवार संख्या परिवार में सामान्यतः रहने वाले लोगों की कुल संख्या परिवार के मुखिया का नाम परिवार के मुखिया का लिंग क्या परिवार का मुखिया SC / ST / अन्य वर्ग से है। मकान का स्वामित्व (अपना/किराया/अन्य) परिवार के कब्जे में रहने वाले कमरों की संख्या परिवार में विवाहित जोड़ों की संख्या घर में उपलब्ध सुविधाएँ... पीने के पानी का मुख्य स्रोत पीने के पानी की उपलब्धता रोशनी का मुख्य स्रोत शौचालय की सुविधा शौचालय का प्रकार गंदे पानी की निकासी स्नानघर की सुविधा रसोई और LPG/PNG कनेक्शन की उपलब्धता खाना बनाने में उपयोग होने वाला मुख्य ईंधन परिवार की संपत्ति (Assets) रेडियो / ट्रांजिस्टर टेलीविजन इंटरनेट की सुविधा लैपटॉप / कंप्यूटर टेलीफोन / मोबाइल / स्मार्टफोन साइकिल / स्कूटर / मोटरसाइकिल / मोपेड कार / जीप / वैन अन्य जानकारी परिवार में मुख्य रूप से खाया जाने व...

दूर के ढोल सुहावने नामित सभासदों के

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 बोर्ड की मजबूती, विकास कार्यों की शपथ आदि न जाने कितनी लुभावनी राजनीतिक बयानबाजी से भरपूर हैं आजकल के नगरपालिका प्रशासन मे राज्य सरकार द्वारा मनोनीत सभासदों के शपथ ग्रहण समारोह, पहले भी होते रहे हैं आगे भी होते रहेंगे किन्तु चुनावी बेला में ऐसे समारोहों में बहुत कुछ ऐसा मनगढंत प्रचारित किया जाता है जिससे कानून भी बगलें झांकता नजर आता है. उत्तर प्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1916 की धारा 9 जिसे उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 12 सन 1994 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया की उपधारा (1) घ में कहा गया है कि ( घ) नाम निर्दिष्ट सदस्य जो राज्य सरकार द्वारा, सरकारी गजट में विज्ञप्ति द्वारा, नगरपालिका प्रशासन में विशेष ज्ञान या अनुभव रखने वाले व्यक्तियों में से नामित किये जायेंगे और जिनकी संख्या- (एक) नगर पंचायत की दशा में, दो से कम और तीन से अधिक नहीं होगी; (दो) नगरपालिका परिषद् की दशा में तीन से कम और पाँच से अधिक नहीं होगी। इसके साथ ही अधिनियम मे यह भी उल्लिखित किया गया है कि - "किन्तु प्रतिबंध यह है कि खण्ड (घ) में निर्दिष्ट व्यक्तियों को नगरपालिका की बैठकों में मत देने का अधिकार नहीं होगा. साथ ही, 2...

न्याय - मदुरै की सेशन कोर्ट ने 9 पुलिसकर्मियों को दी फांसी की सजा

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  तमिलनाडु में पुलिसकर्मियों का मामला तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले के सातानुकुलम में 2020 में हुए एक मामले में 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा सुनाई गई है। यह मामला पिता-पुत्र की पुलिस हिरासत में मौत से जुड़ा है। पीड़ित जयराज और उनके बेटे बेनिक्स को लॉकडाउन के दौरान दुकान खुली रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने दोनों के साथ बुरी तरह मारपीट की, जिससे उनकी मौत हो गई। मामले की मुख्य बातें: 1️⃣ गिरफ्तारी और मौत: जयराज और बेनिक्स को 19 जून 2020 को गिरफ्तार किया गया था और 22 जून को बेनिक्स की मौत हो गई, जबकि अगले दिन जयराज की भी मौत हो गई। 2️⃣ पुलिस पर आरोप: परिजनों ने पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाया और जांच में यह आरोप सही पाया गया। 3️⃣ सजा : मदुरै की सेशन कोर्ट ने 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा सुनाई और मृतक परिवार को 1 करोड़ 40 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। 4️⃣ दोषी पुलिसकर्मी : इनमें इंस्पेक्टर एस. श्रीधर, सब-इंस्पेक्टर पी. रघु गणेश और के. बालकृष्णन समेत 9 पुलिसकर्मी शामिल हैं। 5️⃣ कोर्ट का फैसला: कोर्ट ने कहा कि यह मामला सत्ता के दुरुपयोग और ब...

जनगणना 2027-कैसे होगी चरणों मे

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हमने आपसे कहा था कि हम पहले जनगणना 2027 मे पूछे जाने वाले प्रश्न लेकर आयेंगे, किन्तु उससे पहले हम आपके लिए देश के विभिन्न राज्यों में होने वाली चरणबद्ध जनगणना की जानकारी ले आए हैं जिससे आप जान सके कि आपके क्षेत्र में जनगणना 2027 कब होने वाली है.       भारत में जनगणना (2026-27) में अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तारीखें रखी गई हैं. जिस के पीछे मुख्य कारण भौगोलिक स्थितियाँ, मौसम, प्रशासनिक सुविधा और लॉजिस्टिक चुनौतियाँ हैं। यह प्रक्रिया एक साथ पूरे देश में न होकर चरणों में आयोजित की जाती है।  ➡️ अलग अलग तारीख रखने के कारण -  इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं: ✒️ मौसम और भौगोलिक स्थितियाँ (Snow-bound Areas):   लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे बर्फबारी वाले क्षेत्रों में जनगणना पहले (अक्टूबर 2026) कर ली जाती है, क्योंकि सर्दियों में वहां भारी बर्फबारी के कारण सामान्य जीवन और आवागमन रुक जाता है। ✒️ प्रशासनिक और चुनावी व्यस्तता:   कुछ राज्यों में चुनाव, स्थानीय त्योहार या अन्य प्रशासनिक कारण हो सकते हैं, जिसके चलते जनगणना की तारीखों को र...

जनगणना 2027-1 अप्रैल से शुरू

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  1 अप्रैल 2026 से जनगणना का पहला चरण आरम्भ होने जा रहा है. डिजिटल तरीके से संकलित और सम्पन्न होने वाले जनगणना कार्यक्रम में आंकड़े डिजिटल रूप से ही संग्रहित होंगे और देश के नागरिको से उनके घर जाकर जनगणना कर्मी 34 सवाल पूछेंगे.       संविधान के आर्टिकल 69 के तहत होने वाली जनगणना 16 वीं जनगणना है. ये पूरी तरीके से गोपनीय रहेगी और आरटीआई से भी इसकी जानकारी प्राप्त करने का किसी को अधिकार नहीं होगा.  ⚫ Census 2027 - जनगणना 2027 नोटिफिकेशन -  1️⃣ जनगणना 2027 गजट अधिसूचना 16 जून 2025 को जारी की गई.  2️⃣ पहले चरण (First Phase) की अवधि की अधिसूचना 07 जनवरी 2026 को जारी.  3️⃣ हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन ( HOL) अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच 30 दिनों में पूरा किया जाएगा.  4️⃣ सेल्फ एन्यूमरेशन (Self Enumeration) हाउस लिस्टिंग से ठीक पहले 15 दिनों की अवधि में होगा.  5️⃣ पहले चरण के प्रश्नों की अधिसूचना 22 जनवरी 2026 को जारी की गई.  6️⃣ दूसरे चरण की अवधि और प्रश्नों की अधिसूचना बाद में जारी की जाएगी.  7️⃣ जाति गणना (Caste Enumeration) जनगणना के...

विवाह संस्था का स्थायित्व खत्म करते कोर्ट निर्णय -शालिनी कौशिक एडवोकेट

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इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने एक बार फिर से बहस का मुद्दा छेड़ दिया है लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक अहम निर्णय देते हुए. जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की पीठ ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कहा कि  " अदालत का काम कानून के अनुसार फैसला देना है, न कि सामाजिक या पारिवारिक नैतिकता के आधार पर। अगर कोई काम कानून के तहत अपराध नहीं है, तो सिर्फ समाज की सोच के कारण कोर्ट उसे गलत नहीं ठहरा सकता।" दैनिक जनवाणी की रिपोर्ट में कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि   "कोई शादीशुदा पुरुष यदि किसी वयस्क महिला के साथ उसकी सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा है, तो यह अपने आप में कोई आपराधिक कृत्य नहीं है। जब तक किसी कानून का उल्लंघन नहीं हो रहा, तब तक अदालत इस तरह के रिश्ते को अपराध नहीं मानेगी। "  न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें एक लिव इन जोड़े ने महिला के परिवार से मिल रही धमकियों के खिलाफ सुरक्षा की मांग की थी. समाचार पत्रों की रिपोर्टिंग के अनुसार  महिला के परिवार ने प्राथमिकी दर्ज कराते हुए ...

सोशल मीडिया पर बैन हो " बॉडी शेमिंग "

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  आजकल सोशल मीडिया पर एक शब्द चर्चा में है " बॉडी शेमिंग "बॉडी शेमिंग (Body Shaming) जिस का अर्थ है किसी व्यक्ति के शारीरिक रूप-रंग, वजन, आकार या बनावट को लेकर नकारात्मक टिप्पणी करना, उसका मजाक उड़ाना या उसे शर्मिंदा करना। यह एक प्रकार की मानसिक बदमाशी है जो उस व्यक्ति के आत्मविश्वास को कम करती है, जिसकी बॉडी शेमिंग की जाती है मतलब जिसकी शारीरिक बनावट का उपहास उड़ाया जाता है और यह मोटापे से लेकर दुबलेपन तक, या किसी भी शारीरिक विशेषता से संबंधित हो सकती है। उत्तर प्रदेश की IPS अधिकारी अपर्णा रजत कौशिक पिछले दिनों एक इनामी बदमाश की गिरफ्तारी को लेकर सोशल मीडिया पर ब्रीफिंग कर रही थीं. अपर्णा कौशिक आईपीएस बनने से पहले गुरुग्राम में एक प्राइवेट कंपनी में बिजनेस एनालिस्ट थीं, जहां उनका सालाना पैकेज करीब 18 लाख रुपये का था. अपर्णा द्वारा बाद में यह आरामदायक नौकरी छोड़कर सिविल सेवा की तैयारी करने का फैसला लिया गया और अपनी कड़ी मेहनत के बदौलत यूपीएससी परीक्षा पास की और फिर वह 2015 बैच की आईपीएस अधिकारी बनीं. आईपीएस के तौर पर अपर्णा रजत कौशिक यूपी के अमेठी जिले में भी पुलिस अधीक्षक पद ...

गुजरात UCC 2026 -बंद हो जायेगा हलाला

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गुजरात सरकार ने बुधवार को 'गुजरात समान नागरिक संहिता (UCC), 2026' विधेयक विधानसभा में पेश कर दिया। इसके साथ ही गुजरात ने यूसीसी लागू करने वाला दूसरा राज्य बनने की ओर तेजी से कदम बढ़ा दिया है। विधानसभा से बिल के पारित होने के बाद धर्म, जाति या पंथ की परवाह किए बिना विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और सहजीवन संबंध से संबंधित कानून एक जैसे होंगे। गुजरात समान नागरिक संहिता UCC 2026 विधेयक के मसौदे में शादी, तलाक, लिव इन रिलेशनशिप जैसे मामलों में कई अहम प्रावधान किए गए हैं। बिल में मुस्लिम महिलाओं को ध्यान में रखकर भी कुछ प्रावधान किए गए हैं। खासकर हलाला प्रथा पर रोक लगाने की व्यवस्था की गई है। मसौदे में कहा गया है कि कोई दंपति तलाक के बाद बिना किसी शर्त दोबारा विवाह कर सकता है। इसमें कहा गया है, 'दोबारा विवाह के अधिकार में तलाक लेने वाले साथी से ही फिर विवाह का अधिकार शामिल है और इसके लिए किसी तरह की शर्त नहीं होगी, जैसे दोबारा मिलन से पहले किसी तीसरे से शादी करना।' सूत्रों का कहना है कि मुस्लिम समाज में प्रचलित हलाला प्रथा को रोकने के लिए इस तरह का प्रावधान किया गया है। यदि कोई इस...

नमाजियों की संख्या सीमित करने का प्रशासन को अधिकार नहीं -इलाहाबाद हाईकोर्ट

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  इलाहाबाद हाइकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के संभल जिले में रमज़ान के दौरान एक मस्जिद में नमाज़ पढ़ने वालों की संख्या सीमित करने के प्रशासनिक फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य की जिम्मेदारी है और इसके नाम पर लोगों के धार्मिक अधिकारों पर रोक नहीं लगाई जा सकती। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने 27 फरवरी को सुनवाई के दौरान कहा कि यदि संभल के पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी को कानून-व्यवस्था की स्थिति संभालने में कठिनाई महसूस होती है तो उन्हें या तो अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर स्थानांतरण मांग लेना चाहिए। अदालत ने कहा, “राज्य के वकील ने कहा कि संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण नमाज़ियों की संख्या सीमित की गई। हम इस दलील को पूरी तरह खारिज करते हैं। हर परिस्थिति में कानून का शासन बनाए रखना राज्य का कर्तव्य है।” खंडपीठ ने आगे कहा, “यदि स्थानीय अधिकारी यानी पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर को लगता है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती है, इसलिए वे नमाज़ियों की संख्या सीमित करना चाहते हैं, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे द...

महिलाओं के रोजगार पर पड़ सकता है उल्टा असर -सुप्रीम कोर्ट

 सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सभी कार्यस्थलों में महिलाओं के लिए पेड मेंस्ट्रुअल लीव (मासिक धर्म अवकाश) की मांग करने वाली एक याचिका का निस्तारण करते हुए केंद्र सरकार से कहा कि वह याचिकाकर्ता की ओर से दिए गए प्रतिनिधित्व पर सभी हितधारकों से परामर्श करके नीति बनाने पर विचार करे। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी चिंता जताई कि यदि कानून बनाकर मासिक धर्म अवकाश को अनिवार्य कर दिया गया तो इसका महिलाओं के रोजगार पर उल्टा असर पड़ सकता है। कोर्ट ने कहा कि इससे नियोक्ता महिलाओं को नौकरी देने से हिचक सकते हैं, जिससे कार्यबल में उनकी भागीदारी प्रभावित हो सकती है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता शैलेन्द्र मणी त्रिपाठी की लोकस स्टैंडी (याचिका दायर करने के अधिकार) पर भी सवाल उठाया और कहा कि इस मुद्दे पर स्वयं कोई महिला अदालत के सामने नहीं आई है। यह इसी मुद्दे पर याचिकाकर्ता द्वारा दायर की गई तीसरी याचिका थी। पहली याचिका फरवरी 2023 में निस्तारित की गई थी, जिसमें याचिकाकर्ता को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के समक्ष प्रतिनिधित्व देने की अनुमति दी गई थी। इसके बाद 2...

राहुल गाँधी के खिलाफ दायर विनायक दामोदर सावरकर मानहानि मामला खत्म

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  महाराष्ट्र के नासिक कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर मानहानि मामले को बुधवार को समाप्त कर दिया। यह मामला हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के संबंध में दर्ज किया गया था। एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रुपाली नरवडिया की अदालत ने यह निर्णय शिकायतकर्ता द्वारा अपनी शिकायत वापस लेने की अर्जी स्वीकार करते हुए दिया। इसके साथ ही राहुल गांधी के खिलाफ चल रही पूरी कार्यवाही समाप्त कर दी गई। मामला 'निर्भया फाउंडेशन' नामक एक गैर-सरकारी संगठन के निदेशक की शिकायत पर दर्ज हुआ था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि  2022 की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने यह कहा था कि सावरकर ने ब्रिटिश सरकार के साथ काम करने का वादा किया था।  शिकायतकर्ता का कहना था कि  इस बयान से सावरकर की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची जिन्हें वह स्वतंत्रता सेनानी बताते हैं।  राहुल गांधी की ओर से पेश वकील जयंत जैभवे और गजेंद्र सनप ने बताया कि  अदालत ने पहले इस शिकायत पर स्थानीय पुलिस से जांच कराने का आदेश दिया। पुलिस की रिपोर्ट अदालत में दाखिल होने के बाद श...

UCC से ही मिलेगा मुस्लिम महिलाओं को उत्तराधिकार-सुप्रीम कोर्ट

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  सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक जनहित याचिका पर संक्षिप्त सुनवाई की, जिसमें मुस्लिम पर्सनल लॉ के कुछ प्रावधानों को महिलाओं के खिलाफ भेदभावपूर्ण बताते हुए चुनौती दी गई है।  चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश एडवोकेट प्रशांत भूषण से पूछा कि  क्या अदालत पर्सनल लॉ की संवैधानिक वैधता पर फैसला दे सकती है।  इसी के साथ जस्टिस बागची ने बॉम्बे हाईकोर्ट के प्रसिद्ध 'नरसू अप्पा माली' फैसले का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि  पर्सनल लॉ को संवैधानिक परीक्षण के अधीन नहीं लाया जा सकता. खंडपीठ ने यह भी सवाल उठाया कि   यदि अदालत शरीयत कानून के उत्तराधिकार संबंधी प्रावधानों को रद्द कर देती है, तो क्या इससे कानूनी शून्य (legal vacuum) पैदा नहीं होगा, क्योंकि मुस्लिम उत्तराधिकार को नियंत्रित करने वाला कोई अन्य विधिक कानून मौजूद नहीं है।  इस पर भूषण ने कहा कि  ऐसी स्थिति में भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम (Indian Succession Act) लागू हो सकता है।  प्रशांत भूषण ने यह भी कहा कि ...