तीसरे पक्ष को पितृत्व पर प्रश्न उठाने का अधिकार नहीं-ओड़िशा हाईकोर्ट
संपत्ति बंटवारे के मामले में डीएनए टेस्ट की मांग को लेकर हुई सुनवाई के दौरान ओडिशा हाईकोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की है। इसके साथ ही ओडिशा हाई कोर्ट की एकल पीठ के न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.पी. राउत्रे ने मामले में कई और मार्गदर्शक सिद्धांत भी स्थापित किये जिनका पालन क़ानून के क्षेत्र में एक लम्बे समय तक किया जायेगा. उन सभी मार्गदर्शक सिद्धांतो को 1️⃣2️⃣3️⃣ 4️⃣5️⃣ से चिन्हित किया गया है. हाईकोर्ट ने कहा कि 1️⃣ " मां के बयान के बावजूद बच्चे का डीएनए परीक्षण कराना उसके मातृत्व का अपमान है। इतना ही नहीं यह कानून के भी विरुद्ध है। " ओडिशा हाई कोर्ट की एकल पीठ के न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.पी. राउत्रे ने यह टिप्पणी करते हुए निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा। ➡️ मामला संक्षेप में - संपत्ति बंटवारे के एक मामले में विरोधी पक्ष के 58 साल के व्यक्ति के पिता का पता लगाने के लिए उसका डीएनए परीक्षण का निर्देश देने की मांग की गई थी। जिसे निचली अदालत ने खारिज कर दिया था। जिसके बाद निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए मामला हाईकोर्ट पहुंचा। वहीं अब हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के आदेश को ...