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शनिवार, 19 जनवरी 2013

कई ब्लोगर्स भी फंस सकते हैं मानहानि में .......



Smriti Irani sends legal notice to Sanjay Nirupam over 'slur' on TV, BJP to boycott him

कई ब्लोगर्स भी फंस सकते हैं मानहानि  में .......

कांग्रेस सांसद संजय निरुपम  द्वारा भाजपा युवा नेत्री स्मृति ईरानी को असभ्य टिप्पणी को लेकर ईरानी ने उन्हें मानहानि के मामले में कानूनी नोटिस भेज है ये तो सभी जानते हैं पर ये नहीं जानते कि बहुत से ब्लोगर्स भी इसमें फंस सकते हैं वो कैसे इसके लिए आइये जानते हैं भारतीय दंड सहिंता की धारा ४९९ को -

धारा ४९९-मानहानि-जो कोई बोले गए या पढ़े जाने के लिए आशयित शब्दों द्वारा ,या संकेतों द्वारा ,या ऐसे दृश्य रूप्णों  द्वारा किसी व्यक्ति के बारे में कोई लांछन इस आशय से लगाता या प्रकशित करता है कि ऐसे लांछन से ऐसे व्यक्ति की ख्याति की अपहानि की जाये या यह जानते हुए या विश्वास करने का कारण रखते हुए लगाता या प्रकाशित करता है कि ऐसे लांछन से ऐसे व्यक्ति की ख्याति की अपहानि होगी ,ऐतस्मिन पश्चात् अपवादित दशाओं के सिवाय उसके बारे में कहा जाता है कि वह उस व्यक्ति की मानहानि करता है .

स्पष्टीकरण १ -किसी मृत व्यक्ति को कोई लांछन लगाना मानहानि की कोटि में आ सकेगा यदि वह लांछन उस व्यक्ति की ख्याति की,यदि वह जीवित होता ,अपहानि करता और उसके परिवार या अन्य निकट सम्बन्धियों की भावनाओं को उपहत करने के लिए आशयित हो .
स्पष्टीकरण २ -किसी कंपनी या संगम या व्यक्तियों के समूह के सम्बन्ध में उसकी वैसी  हैसियत में कोई लांछन लगाना मानहानि की कोटि में आ सकेगा .
स्पष्टीकरण ३- अनुकल्प के रूप में या व्यंग्योक्ति के रूप में अभिव्यक्त लांछन मानहानि की कोटि में आ सकेगा .
स्पष्टीकरण ४-कोई लांछन किसी व्यक्ति की ख्याति की अपहानि करने वाला नहीं कहा जाता जब तक कि वह लांछन दूसरों की दृष्टि में प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः उस व्यक्ति के सदाचारिक  या बौद्धिक स्वरुप को हेय न करे या उस व्यक्ति की
जाति  के या उसकी आजीविका  के सम्बन्ध में उसके शील  को हेय न करे या उस व्यक्ति की साख  को नीचे  न गिराए  या यह विश्वास न कराये  कि उस व्यक्ति का शरीर घ्रणोंत्पादक   दशा  में है या ऐसी  दशा  में है जो साधारण  रूप से निकृष्ट  समझी  जाती  है
.

अब ध्यान दीजिये उन अपवाद पर जिनमे बोले या प्रकाशित  गए कथन मानहानि की श्रेणी में नहीं आते -
 

पहला अपवाद-सत्य बात का लांछन जिसका लगाया जाना या प्रकशित किया जाना लोक कल्याण के लिए अपेक्षित है.
दूसरा अपवाद-लोक सेवकों का लोकाचरण.
तीसरा अपवाद-किसी लोक प्रश्न के सम्बन्ध में किसी व्यक्ति का आचरण .
चौथा अपवाद-न्यायालयों की कार्यवाहियों की रिपोर्टों का प्रकाशन . पांचवा अपवाद-न्यायालय में विनिश्चित मामले के गुणागुण  या साक्षियों तथा संपृक्त अन्य व्यक्तियों का आचरण .

छठा अपवाद - लोक कृति के गुणागुण .

सातवाँ अपवाद -किसी अन्य व्यक्ति के ऊपर विधिपूर्ण प्राधिकार रखने वाले व्यक्ति द्वारा सद्भावपूर्वक की गयी परिनिन्दा .

आठवां अपवाद-प्राधिकृत व्यक्ति के समक्ष सद्भावपूर्वक अभियोग लगाना .

नौवां अपवाद-अपने या अन्य के हितों की संरक्षा  के लिए  किसी व्यक्ति द्वारा सद्भावपूर्वक लगाया गया लांछन .

दसवां अपवाद -सावधानी जो उस व्यक्ति की भलाई  के लिए,जिसे कि वह दी गयी है या लोक कल्याण के लिए  आशयित है .

अब ये भी जान लें क़ी सद्भावपूर्वक क्या है -
धारा ५२ -कोई बात ''सद्भाव पूर्वक ''की गयी या विश्वास की गयी नहीं कही जाएगी जो सम्यक सतर्कता और ध्यान के बिना की गयी या विश्वास की गयी हो .

 और इस धारा ४९९ का दंड धारा ५०० में दिया गया है जो कहती है कि-
''जो कोई किसी अन्य व्यक्ति की मानहानि करेगा ,वह सादा कारावास से ,जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने  से ,या दोनों से दण्डित किया जायेगा .

 अब  ब्लोगर्स स्वयं अवलोकन कर सकते हैं कि वे यहाँ जो कुछ लिख रहे हैं वह किस किस तरह से उन्हें इस धारा के अधीन करता है वैसे मैंने जहाँ तक ब्लोगर्स के आलेख पढ़े हैं वे उन्हें अपवाद दो का संरक्षण बिलकुल नहीं देते क्योंकि यहाँ कुछ ब्लोगर्स द्वारा लोक सेवकों पर व्यक्तिगत और उनके चरित्र पर जो आक्षेप किये जा रहे हैं वे पूरी तरह से मानहानि के अपराध में उन्हें फंसा सकते हैं .
       शालिनी कौशिक
         [कानूनी ज्ञान ]


22 टिप्‍पणियां:

  1. हो सकता है आप सच कह रही हैं लेकिन कई बार घटनाएं ऐसी आ जाती है जो ब्लोगर को किसी लोकसेवक पर निजी सीमा तक जाकर टिपण्णी करने को मजबूर कर देती है वैसे में इस बात का समर्थक हूँ कि किसी पर निजी टिपण्णी ना कि जाए !!

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  2. अच्‍छी जानकारी के लिए धन्‍यवाद

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  3. कानून के हि‍साब से सॉंस लेना भी अपराध है क्‍योंकि‍ ज़रूर कोई न कोई हवा में वि‍द्यमान जीवों की हत्‍या का मुकदमा दायर कर सकता है

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  4. कानून की जानकारी देने के लिए आभार ! लेकिन क़ानून में बहुत लूप होल्स हैं .और हर नियम अच्छी तरह से परिभाषित नहीं है इसीका फ़ायदा चालक लोग उठा लेते हैं और सीधा सादा लोग फंस जाते हैं.

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  5. कितनी अजीब बात है कल तक वह भी इंसान आज सेकुलर हो गया .

    शालिनी जी हो सकता है वह सब कुछ जो आपने इंगित किया है ,बशर्ते क़ानून को कानूनी तौर पर लागू किया जाए सामने वाले की शक्ल देखकर नहीं .सरकारें खुद कानून का पालन करना भूल चुकी हैं

    .नागरिक तो अनुगामी हैं .सहचर हैं .बढ़िया आलेख .यह आलेख अंग्रेजी में भी होना चाहिए क्योंकि हिंदी की न्यायालय में प्रयुक्त शब्दावली क्लिष्ट हैं मसलन आशयित (कितने लोग इसका मतलब

    समझते

    होंगें,आशय +इत )?अभियोजन करता बी/अभियोगी /अभियोग के बारे में भी कभी बतलाएं .वादी ,प्रतिवादी ,सरकारी गवाह के भी .कचहरी में प्रयुक्त रोजमर्रा के शब्द समझाएं किसी पोस्ट में बड़ी

    मेहरबानी होगी .

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  6. ?कितनी अजीब बात है कल तक वह भी इंसान आज सेकुलर हो गया .इसे आप व्यंग्य में लेंगी ?अपकीर्ति कारक है किसी को सेकुलर कहना ?जब की सेकुलर किसी को कहना ताना मारना है

    गाली देना है .

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  7. बहुत अच्‍छी जानकारी दी आपने..शुक्रि‍या..

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  8. सही कानून की जानकारी देने हेतु हार्दिक आभार

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  9. कानून सबंधी जानकारी देने के लिए
    आपका शुक्रिया...मुझे आपके पोस्ट कही ज्यादा अच्छा लगा काजल जी की टिप्पणी कि इसका बस चले तो ये सांस लेने पर धारा लागू करदे ...नियम पठकर दुःख हुआ बडे लोगो नेताओँ के उपर टिप्पणी करना जुर्म हो गया लेकिन ये लोग जो आम जनता पर टिप्पणी करते इसका क्या ...अभी कुछ दिन आसाराम ने जो दामिनी के बलात्कार पर टिप्पणी कि एक हाथ से ताली नही बजती ये भी बराबर की गुनहगार हैँ तो फिर उसके उपर क्योँ नही लगाया गया यह धारा ...
    मुझे लगता हैँ यह नियम सरकारी चापलुसो के कारन बनी सरकार के लिए हैँ वरना आम जनता तो इससे ग्रसित ही हैँ ..धन्यवाद ।

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  10. थोड़ा सहज भाषा में समझाते तो आसानी रहती, बैसे आभार जानकारी के लिए

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  11. कानून की जानकारी देने के लिए आभार....

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  12. कानून की जानकारी देने के लिए आभार...

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  13. आदरणीया दीदी बेहद अच्छी जानकारी दी है आपने, कानून का ज्ञान भी जरुरी था. हार्दिक बधाई

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  14. कानून की अच्‍छी जानकारी देने के लिए धन्‍यवाद!!!

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  15. बिओल्कुल ठीक है! आज कल द्वष को आगे बढाने का जिम्मा लेने वाले 'नेतागण' खोखली बयानवाजी के चक्कर में कबीर का यह कथन भूल गये हैं:-
    जिभ्या ऐसी बाबरी, कह गयी सरग पताल|
    आप तो कह भीतर गयी,जूता खाय कपाल||
    '

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  16. आज पहली बार आपका ब्लॉग पढ़ा अच्छा लगा ,धन्यवाद

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