रविवार, 9 जून 2013

सूरज पंचोली दंड के भागी .

सूरज पंचोली दंड के भागी .

समान कानून की बातें भारत में की जाती हैं .आज एक बार फिर उसी कानून की बाते की जानी चाहियें किन्तु देखिये तो एक चुप्पी ही दिखाई देती है .जिया के मरने का सबको दुःख है स्वयं उसको भी जो इसका कारण है किन्तु ये दुःख उसे या किसी को भी कानून की अवहेलना करने का अवसर नहीं देता .आज सूरज पंचोली के लिए सजा की मांग की जानी चाहिए किन्तु कहाँ हैं वे मानवाधिकार कार्यकर्ता जो अभी पिछले दिनों संजय दत्त के लिए बढ़-चढ़ कर सजा मांग रहे थे फिर सूरज को क्यों बख्श रहे हैं ?
गीतिका के केस में गोपाल कांडा पर एक धारा  ३०६ भारतीय दंड सहिंता भी लगी है जो कि आत्महत्या के दुष्प्रेरण से सम्बंधित है और अभी आये समाचारों के मुताबिक जिया की मृत्यु का कारण भी कोई और नहीं सूरज ही थे जिनसे बेवफाई मिलने पर जिया ने आत्महत्या कर ली .
 

जिया और सूरज के बीच प्रेम प्रसंग चल रहा था और पिछले कुछ दिनों से सूरज और जिया के बीच किसी और लड़की के आने के  कारण तनाव बढ़ गया था और इधर जिया की माँ तनाव दूर करने की कोशिश में थी तो उधर आदित्य पंचोली ने अपने बेटे सूरज को जिया से दूर रहने की सलाह दी थी किन्तु आख़िरकार जिया ने मौत को गले से लगा लिया और सूरज आज भी खुले घूम रहे हैं .

Geetika Sharma suicide: Gopal Kanda charged with rape, unnatural sex in air hostess case 


"I hold that prima facie charges under sections 306 (abettment of suicide), 120B (criminal conspiracy), 468 (forgery with intention to cheat), 469 (forgery with intention to harm reputation), 466 (forgery of record of public register) and 471 (using forged documents as genuine) are made out against Gopal Kanda and Aruna Chadha," District Judge S K Sarvaria said.

प्यार को खेल बनाने वाले आज के ये युवा खुलेआम कानून का उल्लंघन करते घूम रहे हैं .गोपाल कांडा के अन्य अपराध यदि छोड़ दें तो गीतिका के आत्महत्या की वजह गोपाल थे और सर्वप्रथम वे इसी अपराध के कारण कानून की गिरफ्त में आये .फिर सूरज पर क्यों ये शिकंजा नहीं कसा जा रहा .जबकि धारा ३०६ कहती है -
 भारतीय दंड सहिंता की धारा ३०६ के अनुसार -''यदि कोई व्यक्ति आत्महत्या करे ,तो जो कोई ऐसी आत्महत्या का दुष्प्रेरण करेगा ,वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी दंडनीय होगा .''
   और इस तरह सूरज धारा ३०६ के दोषी हैं ,जिसमे दस वर्ष का कारावास और जुर्माना उपबंधित है .मात्र दुःख जताने से जिया की मौत का उपहास ही उड़ाया जायेगा .यदि जिया और उस जैसी संवेदनशील युवतियों को न्याय दिलाना है तो सूरज पंचोली को धारा ३०६ में दंड का भागी बनाना ही होगा ताकि ये युवा दूसरे की भावनाओं से व् कानून से खेलने से बाज आयें . 
       शालिनी कौशिक 
           [कानूनी ज्ञान ]

10 टिप्‍पणियां:

  1. आप ठीक कह रही हैं .सूरज को कड़ी सजा मिलनी चाहिए .

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  2. शिखा सूरज को किस जुर्म में सजा मिलनी चाहियें ज़रा खुल कर बताएं प्लीज | उसने कोई जिया को उकसाया तो था नहीं के वो आत्मा हत्या करे या फिर कोई ऐसी बात जिसके कारण जिया ने ऐसा कठोर कदम उठाया | ये जिया की खुद की बेवकूफी का सबूत था के उसने विषम हालातों से हार कर अपना जीवन समाप्त कर दिया | इसका मतलब वो कमज़ोर थी और उसमें हालातों से लड़ने की ताक़त नहीं थी | मुझे तो नहीं लगता के ऐसे में किसी को भी इसके लिए दोषी करार देना चाहियें | हाँ ज़बरदस्ती किसी को मुद्दा बना कर जनता का मनोरंजन करना हो तो वो बात अलग है | क्योंकि आज की दुनिया में लोगो को भी मसाला चाहियें दूसरों के जीवन में तांक-झाँक कर के लुत्फ़ उठाने के लिए |

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    1. FIRST YOU SAY -YOU LOVE HER ...AFTER SOME TIME YOU SAY-DO'NT DISTURB ME .......SOME PERSONS IGNORE THIS BUT SOME PERSONS NEVER ....JIYA WAS A PERSON OF SECOND TYPE .JIYA HAS PUNISHED HERSELF -WHY DID SHE LOVE A PERSON LIKE SANJAY PANCHOLI .

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  3. यहाँ हमें तो कोई दोषी नजर नहीं आता, क्योंकि जीने की इच्छा जिया की नहीं थी, और कोई किसी के कारण से ऐसे कदम भी उठा ले तो इसका मतलब यह तो नहीं कि उसे फ़ाँसी दे दी जाये, आप गीतिका केस की बात कर रहे हैं, तो साहब मामला वहाँ एकदम उलट है ।

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  4. pata nahee kyu Jiah ne ye qadam uthaaya.....kitni kamzor thee wo....usko ladna chahiye tha...

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  5. तुषार जी की टिप्पणी गौर करने जैसी है !,

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  6. मुझे नही लगता सज़ा मिलनी चाहिए
    गीतिका शर्मा और जिया के केस की तुला करना बेमानी है
    सूरज गोपाल जैसा नही............अगर दो जन लड़ पड़े और एक मर जाए तो दूसरा कहाँ से दोषी ठहरता है ............मीडिया बढ़ावा दे रहा है और जिया की माँ बस सुर्खियाँ बटोर रही है ..........

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  7. सूरज और काडा के केस को एक नज़र से नही देख सकते ज़मीन आज़मान का फर्क है
    बेवफाई और झगडा इस के लिए किसी को फांसी नही मिल सकती ...........वो कोई दूध पीती बच्ची नही थी.............जिया की माँ सुर्खियाँ बटोर रही है और मीडिया रोटी सेक रहा है .

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