गुजारा भत्ता न देने पर सजा


पुरानी सीआरपीसी की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता न देने पर सजा दी जा सकती थी अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 144 के तहत गुजारा भत्ता अदा न करने पर सजा का प्रावधान है। ये धारा पति, पत्नी और माता-पिता के भरण-पोषण से संबंधित है। अदालतें, इस धारा के तहत, भरण-पोषण आदेश का उल्लंघन करने पर विभिन्न कानूनी उपायों का सहारा ले सकती हैं, जिनमें सिविल हिरासत, संपत्ति की कुर्की आदि शामिल हैं. 

🌑 सिविल हिरासत:-

अगर कोई व्यक्ति भरण-पोषण आदेश का पालन नहीं करता है, तो उसे कुछ समय के लिए जेल में रखा जा सकता है. 

🌑 संपत्ति की कुर्की:-

अदालतें, व्यक्ति की संपत्ति कुर्क कर सकती हैं ताकि भरण-पोषण की बकाया राशि वसूल की जा सके. 

🌑 गैर-जमानती वारंट:-

अगर भरण-पोषण आदेश का उल्लंघन किया जाता है, तो न्यायालय पति के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर सकता है. 

🌑 उदाहरण:-

एक मामले में, एक व्यक्ति को अपनी पत्नी और बच्चों को गुजारा भत्ता नहीं देने के कारण 3210 दिन की जेल की सजा सुनाई गई थी. 

🌑 एक अन्य मामले में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक व्यक्ति को भरण-पोषण की राशि न देने के कारण लगभग दो वर्षों से दीवानी कारावास की सजा काट रहा था, लेकिन बाद में उसे रिहा करने का आदेश दिया. 

🌑 बेंगलुरु के एक शख्स की संपत्ति कर्नाटक हाई कोर्ट ने पत्नी और बेटे को गुजारा भत्ता न देने के जुर्म में कुर्क करने का आदेश दिया था. 

🌑 संबंधित जानकारी:-

🌑 अदालतें, भरण-पोषण की राशि तय करते समय, पति-पत्नी की वित्तीय स्थिति, उनकी कमाई की क्षमता और शादी में उनके योगदान जैसे कारकों पर विचार करती हैं. 

🌑 कुछ मामलों में, गुजारा भत्ता एकमुश्त भी दिया जा सकता है. 

🌑 सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि अगर वैध और पर्याप्त कारण हो तो महिला अपने पति के साथ नहीं रहते हुए भी गुजारा भत्ता पाने की हकदार है.

     अन्य जानकारी के लिए आप कमैंट्स में अपनी समस्या लिखकर जानकारी प्राप्त कर सकते हैँ.

धन्यवाद 

प्रस्तुति 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट 

 कैराना (शामली )

टिप्पणियाँ

  1. बहुत ही सार्थक जानकारी शेयर की है आपने आभार 🙏🙏

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  2. अगर पति कोर्ट के समक्ष खुद को लाचार दिखा दे और कोर्ट भी पत्नि से अपने दावे पर विचार करने के लिए कहें तो पत्नि को क्या करना चाहिए

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    उत्तर
    1. पत्नी को अपनी मज़बूरी कोर्ट के समक्ष अपने एडवोकेट के माध्यम से रखनी चाहिए और पति से गुजारा भत्ता दिलाने के आदेश पर अडिग रहना चाहिए

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