और बचा लो इज़्ज़त -बेटी तो फालतू है ना


     छेड़खानी महिलाओं विशेषकर स्कूल-कॉलेज जाने वाली छात्राओं के साथ प्रतिदिन होने वाला अपराध है जिससे परेशानी महसूस करते करते भी पहले छात्राओं द्वारा स्वयं और बाद में अपने परिजनों को बताने पर उनके द्वारा दरकिनार कर दिया जाता है किन्तु यही छेड़खानी कभी छात्रा के विरोध या छात्रा द्वारा पहले लड़के की पिटाई ,यहाँ तक की चप्पलों तक से पिटाई तक जाती है ,कभी कभी छात्रा के परिजनों द्वारा विरोध या फिर परिजनों के व् छेड़छाड़ करने वाले लड़के व् उसके समूह की मार-पिटाई तक पहुँच जाती है .कभी कभी रोज-रोज की छेड़छाड़ से तंग आ छात्रा आत्महत्या कर लेती है और कभी लड़के द्वारा छात्रा की हत्या की परिस्थिति भी सबके समक्ष यह चुनौती बन खड़ी हो जाती है कि अब हम अपनी बेटियों को कैसे पढ़ाएं ?
    अभी 10  दिसंबर 2017 को ही कांधला कस्बे में स्टेट बैंक के पास कोचिंग सेंटर में जाती छात्रा को छेड़ने पर लड़के को छात्रा से ही चप्पलों से पिटना पड़ा था किन्तु अभी कल 13  दिसंबर 2017 को कांधला के गांव गढ़ीश्याम में गांव के अमरपाल ने गांव की ही 16 वर्षीय सोनी को 50  छात्राओं के बीच से खींचकर बलकटी से मार दिया और वहशीपन इतना ज्यादा था कि वह तब तक लड़की को बलकटी से मारता रहा जब तक कि वह मर नहीं गयी ,यहाँ तक कि उसे बचाने में उसकी टीचर को भी चोट आयी उन्होंने कातिल के पैर भी पकडे पर बात नहीं बनी , वह लड़की को मारकर ही माना .   
        इन दोनों ही मामलों में लड़के बहुत पहले से छेड़छाड़ कर रहे थे और ये बात परिजनों को भी पता थी ,पर वे कथित इज़्ज़त ,जो वे अपने मन में स्वयं सोच लेते हैं कि अगर किसी को पता चल गया कि हमारी लड़की के साथ ऐसा हो रहा है तो हमारी क्या इज़्ज़त रहेगी ,की खातिर चुप रहे .छेड़खानी अपराध भी है ये जानते हुए भी रिपोर्ट नहीं की .पहले मामले में एस.पी.शामली के द्वारा स्वयं संज्ञान लेने पर लड़के का सामना कर उसकी पिटाई करने पर जब छात्रा का सम्मान किया गया तब उसके परिजनों का हौसला बढ़ा और उन्होंने रिपोर्ट दर्ज कराई किन्तु दूसरे मामले में रिपोर्ट न कराकर जो इज़्ज़त लड़की के परिजनों ने बचाई थी वह लड़की की जान पर भरी पड़ गयी और ऐसा नहीं है कि ऐसे हादसे यहीं हो रहे हों इलाहबाद के मेजा में भी 16 वर्षीय प्रेमा की भी कातिल ने गर्दन काटकर हत्या कर दी .   
    ये हादसे थमने वाले नहीं हैं अगर लोग अपनी इज़्ज़त को इतनी मामूली समझ अपराधियों को यूँ ही खुले में घूमने देंगें जबकि कानून ने इस सम्बन्ध में व्यवस्था की है ,अगर नहीं जानते हैं तो जान लें -
      भारतीय दंड संहिता की धारा 354 -क में लैंगिक उत्पीड़न अर्थात छेड़खानी के बारे में बताया गया है और इसके लिए दंड का प्रावधान किया गया है -
1-ऐसा कोई निम्नलिखित कार्य ,अर्थात -
   i -शारीरिक संपर्क और अंगक्रियाएँ करने ,जिनमे अवांछनीय और लैंगिक सम्बन्ध बनाने सम्बन्धी स्पष्ट प्रस्ताव अंतर्वलित हों ; या 
  ii -लैंगिक स्वीकृति के लिए कोई मांग या अनुरोध करने ; या 
  iii -किसी स्त्री की इच्छा के विरुद्ध बलात अश्लील साहित्य दिखाने ;या 
  iv - लैंगिक आभासी टिप्पणियाँ करने ,
      वाला पुरुष लैंगिक उत्पीड़न के अपराध का दोषी होगा .
2 -ऐसा कोई पुरुष ,जो उपधारा [1 ]के खंड  [i ] या खंड [ii ] या खंड [iii ]में विनिर्दिष्ट अपराध करेगा ,वह कठोर कारावास से जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी ,या जुर्माने से ,या दोनों से दण्डित किया जायेगा .
3 -ऐसा कोई पुरुष जो उपधारा [1 ] के खंड [iv ] में विनिर्दशित अपराध करेगा ,वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से ,जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी ,या जुर्माने से ,या दोनों से दण्डित किया जायेगा .
    इस प्रकार छेड़खानी को हमारी दंड संहिता में दण्डित किया गया है जिसे आम जनता ढंग से न जानते हुए या जानते हुए भी अपनी बेइज़्ज़ती के नाम पर अपराधियों को खुले आकाश के नीचे घूमने का मौका देती है .अब भले ही अपराधी 302 आई.पी.सी.में हत्या का दोषी हो सजा भुगते पर ऐसे में अपनी बच्ची की तो झूठी इज़्ज़त के नाम पर आप बलि चढ़ा रहे हैं जबकि अगर समय से अपराध पर कार्यवाही कर अपराधी को एक या तीन साल की सजा करा दी जाये तो अपराधी पर से एकतरफा प्रेम का भूत भी उतर सकता है और अगर नहीं उतरता तो कम से कम ये पछतावा तो नहीं रहता कि हमने अपनी बच्ची को खुद मौत के मुंह में धकेल दिया .अब ये आप पर है कि आप अपने स्नेह-प्यार  के नाम पर अपनी बेटी को बचाएंगे या झूठी इज़्ज़त के नाम पर अपराधी को -सोचिये और निर्णय कीजिये .
शालिनी कौशिक 
     एडवोकेट
  [कानूनी ज्ञान ] 



टिप्पणियाँ

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (16-12-2017) को "सब कुछ अभी ही लिख देगा क्या" (चर्चा अंक-2819) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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