होम मेकर राष्ट्र निर्माता - सुप्रीम कोर्ट
सड़क हादसे में गृहणी (होममेकर) की मृत्यु होने पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए उनके घरेलू योगदान का मूल्य कम से कम ₹30,000 प्रतिमाह तय किया है।
मोटर दुर्घटना के दावों से जुड़ी अपील पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने कहा कि
होममेकर का योगदान घर से कहीं आगे तक जाता है और देश-निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुआवज़ा तय करते समय होममेकर की मौत या अक्षमता के कारण परिवार को होने वाले घरेलू देखभाल के नुकसान को अलग से मान्यता दी जानी चाहिए।
➡️ सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु:
⚫ घरेलू देखभाल का नुकसान:
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) के तहत दुर्घटना का मुआवजा तय करते समय, 'घरेलू देखभाल के नुकसान' (Loss of Domestic Care) को मुआवजे की एक अलग और स्वतंत्र श्रेणी माना जाएगा।
⚫ न्यूनतम आय का निर्धारण:
गृहणी द्वारा परिवार के लिए किए जाने वाले कार्य (खाना बनाना, बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल, घर का प्रबंधन आदि) को केवल इसलिए कम नहीं आंका जा सकता क्योंकि वे सीधे तौर पर कोई वेतन नहीं कमातीं। कोर्ट ने उनकी मासिक आर्थिक आय न्यूनतम ₹30,000 तय की है।
⚫ मुआवजे का दायरा:
इस राशि के तहत तीन प्रमुख नुकसानों को कवर किया जाता है—परिवार के सुचारू संचालन में योगदान, बच्चों को मिलने वाली मां की देखभाल, और पति व माता-पिता को मिलने वाला भावनात्मक/पारिवारिक सहयोग।
पहले हादसों में गृहणियों का मुआवजा तय करने के लिए उन्हें आमतौर पर कुशल या अकुशल दिहाड़ी मजदूर मानकर बहुत ही कम राशि (काल्पनिक आय) आंकी जाती थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार उनका योगदान अतुलनीय है, इसलिए उन्हें केवल 'होममेकर' नहीं बल्कि 'राष्ट्र निर्माता' माना जाना चाहिए। इस प्रकार यह नया निर्देश (guideline) अब दुर्घटना दावों के मामलों में पीड़ित परिवारों को एक बहुत बड़ी राहत और न्याय प्रदान करता है।
Case : SHISHUPAL @ SHISH RAM AND ORS. SURJEET AND ORS. v. SURJEET AND ORS | SLP(C) No. 33915/2025
द्वारा
शालिनी कौशिक
एडवोकेट
कैराना (शामली)

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