तब्लीगी जमात को लेकर यू पी में हाई अलर्ट



 उत्तर प्रदेश में सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने तब्लीगी जमात की गतिविधियों और मस्जिदों में बाहर से आने वाले लोगों की आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखी हुई है। संवेदनशील जिलों में बिना पूर्व सूचना के आने वाली जमातों को वापस भेजने तथा पुलिस थानों में उनका पूरा सत्यापन (Verification) अनिवार्य करने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।

➡️ जमात और बाहरी लोगों को लेकर यूपी में क्या निर्देश हैं?

1️⃣ 24 घण्टे मे अनिवार्य सत्यापन (Verification): मस्जिदों या धार्मिक स्थलों में बाहर से आने वाले किसी भी जमाती या समूह को ठहरने से पहले स्थानीय पुलिस या खुफिया विभाग (LIU) को पूरी जानकारी देनी होगी। राज्य में आने वाली सभी जमातों और उनमें शामिल होने वाले लोगों का 24 घंटे के भीतर अनिवार्य रूप से सत्यापन (Verification) किया जाएगा.

2️⃣ जानकारी देना आवश्यक: रुकने वाले लोगों का नाम, पूरा पता, आधार कार्ड या पहचान पत्र, और ठहरने का कारण पुलिस को बताना होगा। जमात से जुड़े हर व्यक्ति को अपने पहचान पत्र और जरूरी दस्तावेज दिखाने होंगे. पुलिस यह जांच करेगी कि वे किस उद्देश्य से आए हैं और कितने दिनों तक रुकेंगे. 

3️⃣ बिना पूर्व सूचना आने वालों की वापसी: अचानक आने पर कार्रवाई की जाएगी. यदि कोई जमात बिना किसी पूर्व सूचना या प्रशासनिक अनुमति के अचानक पहुंचती है, तो उसे जिले से वापस भेजने की कार्रवाई की जा रही है.

4️⃣ 2 महीने पहले सूचना: उत्तर प्रदेश के संवेदनशील जिलों (जैसे दिल्ली से सटे गाजियाबाद कमिश्नरेट) में धार्मिक स्थलों की कमेटियों को निर्देश दिया गया है कि बाहर से आने वाली किसी भी जमात की सूचना कम से कम दो महीने पहले पुलिस को देना जरूरी है.

5️⃣ इमामों की जवाबदेही: मस्जिदों के जिम्मेदार लोगों (इमामों) को सख्त हिदायत दी गई है कि बिना जानकारी दिए किसी भी बाहरी जमात को न ठहराएं। नियमों का पालन न करने पर इमामों या प्रबंधन समिति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

6️⃣ दैनिक रिपोर्टिंग: पुलिस महानिरीक्षक (IG) कानून व्यवस्था के निर्देशों के तहत जमातों की गतिविधियों, उनके आने-जाने की तारीख और सदस्यों की संख्या की पूरी रिपोर्ट प्रतिदिन वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जा रही है.

7️⃣ खुफिया निगरानी: दिल्ली और आसपास के इलाकों में हुई घटनाओं के बाद से गाजीपुर, गाजियाबाद, आगरा, मेरठ, और लखनऊ सहित अन्य संवेदनशील जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

8️⃣ सड़क पर नमाज पर रोक: जुमे की नमाज और सार्वजनिक आयोजनों पर सख्ती जारी है. राज्य के सभी संवेदनशील और प्रमुख शहरों में सड़क या खुले सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने पर पूरी तरह प्रतिबंध है।

9️⃣ ड्रोन और भारी फोर्स की तैनाती: जुमे (शुक्रवार) की नमाज या त्योहारों के मौके पर मस्जिदों के बाहर भारी पुलिस बल, PAC और पैरामिलिट्री की तैनाती की जाती है। छतों और संवेदनशील इलाकों की ड्रोन के जरिए कड़ी निगरानी की जाती है।

      जम्मू-कश्मीर तथा देश के अन्य बाहरी राज्यों से आने वाले जमातियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है. राज्य के संवेदनशील इलाकों, मस्जिदों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सुरक्षा बलों द्वारा ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार फ्लैग मार्च निकाला जा रहा है.इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर यह भी स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी स्थिति में सड़कों पर नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं होगी। यदि नमाजियों की संख्या अधिक है, तो उन्हें शिफ्टों में या परिसर के भीतर ही नमाज अदा करनी होगी, ताकि सार्वजनिक यातायात बाधित न हो.

द्वारा 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट 

कैराना (शामली) 


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