उज्ज्वल राणा मुजफ्फरनगर केस

 


जिला मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना कस्बे में स्थित DAV पीजी कॉलेज में फीस जमा करने में देरी होने पर परीक्षा फॉर्म न लेने वाले और खुद के साथ अभद्रता की हदे पार करने वाले कॉलेज प्रबंधक, प्रिंसिपल, पीटीआई और पुलिस कर्मियों के व्यवहार से आहत आत्मदाह करने वाले छात्र उज्ज्वल राणा ने रविवार 9 नवम्बर 2025 को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया।

रविवार शाम को छात्र की बहन सलोनी द्वारा की गई नई शिकायत पर कॉलेज प्रबंधक, प्राचार्य, पीटीआई और 3 पुलिसकर्मियों समेत 6 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई। मुजफ्फरनगर के एसएसपी संजय वर्मा ने एक सब-इंस्पेक्टर और दो सिपाहियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है। 

उज्ज्वल की बड़ी बहन सलोनी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्राचार्य प्रदीप कुमार के अलावा प्रबंधक अरविंद गर्ग, पीटीआई संजीव कुमार, एएसआई नंदकिशोर और सिपाही ज्ञानवीर व विनीत के नाम मुकदमे में शामिल किए।

➡️ उज्ज्वल केस में लगाई गई धारा-

108. आत्महत्या का दुष्प्रेरण. 

🌑 यदि कोई व्यक्ति आत्महत्या करता है, तो जो कोई ऐसी आत्महत्या का दुष्प्रेरण करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने के लिए भी दायी होगा।

🌑 अपराध का वर्गीकरण

✒️ दण्ड-10 वर्ष के लिए करावास और जुर्माना- संज्ञेय अजमानतीय सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय- अशमनीय।

➡️ बहन सलोनी द्वारा बताई गई पूरी घटना- 

बहन सलोनी ने एफ आई आर में बताया- 

"उसका भाई उज्ज्वल राणा डीएवी कॉलेज में द्वितीय वर्ष का छात्र था। आर्थिक तंगी के कारण उसकी कुछ फीस बकाया थी। आरोप है कि इसी बात पर कॉलेज प्रबंधक अरविंद कुमार गर्ग और प्राचार्य प्रदीप कुमार ने उसे दफ्तर में बुलाकर घोर अपमानित किया। इसके बाद पीटीआई संजीव कुमार ने प्राचार्य के इशारे पर उज्ज्वल को बाल पकड़कर लात-घूसों से बेरहमी से पीटा। पुलिस वालों ने भी मेरे भाई को बेरहमी से मारा जब प्राचार्य ने पुलिस बुलाई, तो मौके पर पहुंचे एएसआई नंदकिशोर और सिपाही ज्ञानवीर और विनीत ने भी उज्ज्वल से मारपीट की। इस प्रताड़ना से हताश होकर जब उज्ज्वल ने आत्महत्या करने की बात कही, तो पीटीआई संजीव कुमार ने क्रूरता से ताना मारते हुए कहा- कल की बजाय आज ही कर ले। इसी अपमान और आघात से व्यथित होकर उज्ज्वल ने खुद पर ज्वलनशील पदार्थ छिड़ककर आग लगा ली। यह भी आरोप है कि जब अन्य छात्र उसे बचाने दौड़े, तो कॉलेज स्टाफ ने उन्हें संस्थान से निकालने की धमकी दी और आरोपी मौके से फरार हो गए।"

प्रस्तुति 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट 

कैराना (शामली )

टिप्पणियाँ

  1. बहुत ही गलत हुआ इस बच्चे के साथ

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    1. सत्य, भगवान न्याय नहीं करते, उज्जवल के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए था.

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