अनुकम्पा नियुक्ति सदैव स्थायी-इलाहाबाद हाईकोर्ट

 


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि मृतक आश्रित कोटे (अनुकम्पा नियुक्ति) के तहत मिलने वाली सरकारी नौकरी हमेशा स्थायी और नियमित प्रकृति की होती है।  विभाग द्वारा नियुक्ति पत्र (Joining Letter) में 'पूर्णतः अस्थायी सेवा' (Temporary) की शर्त जोड़ना पूरी तरह गैरकानूनी और स्थापित विधिक सिद्धांतों के विपरीत है। 

➡️ इस व्यवस्था की पूरी केस डिटेल्स और कानूनी स्थिति निम्नलिखित है:

⚖️ केस डिटेल्स (Case Details)

केस का नाम: सपना सारस्वत बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य

सुनवाई करने वाली अदालत: इलाहाबाद हाईकोर्ट (माननीय न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकलपीठ)

फैसले की तिथि: सितंबर 2026  

मामले की पृष्ठभूमि: आगरा की रहने वाली सपना सारस्वत ने अपने पिता (जो कि एक सरकारी कर्मचारी थे) की सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने के बाद मृतक आश्रित कोटे के तहत नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद विभाग ने उन्हें 27 अगस्त 2026 को नियुक्ति पत्र जारी किया। 

मुख्य विवाद:नियुक्ति पत्र की शर्त संख्या-1 में विभाग ने यह लिख दिया कि

 "यह नियुक्ति पूर्णतः अस्थायी है, जिसे बिना कोई कारण बताए किसी भी समय एक महीने के नोटिस पर समाप्त किया जा सकता है।" 

याची के अधिवक्ता कमल कुमार केशरवानी ने इस अवैध शर्त पर कोर्ट में कड़ी आपत्ति जताई। 

🏛️ हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी और फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नियुक्ति पत्र में इस प्रकार की शर्त को देखकर सख्त नाराजगी जताई और निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदु तय किए:स्वीकृत और नियमित पदों पर नियुक्ति: कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि अनुकंपा के आधार पर दी जाने वाली नियुक्तियां हमेशा स्वीकृत पदों पर नियमित और स्थायी (Regular & Permanent) प्रकृति की होती हैं। 

अवैध शर्त का हटना: कोर्ट के कड़े रुख के बाद अपर महाधिवक्ता (Additional Advocate General) अमित सक्सेना ने भी माना कि यह शर्त अनुचित और कानूनन गलत थी। राज्य सरकार ने अदालत को भरोसा दिया कि इस अवैध शर्त को हटाकर संशोधित नियुक्ति पत्र जारी किया जाएगा। 

भविष्य के लिए निर्देश: शासन स्तर पर इस मामले को उठाने का आश्वासन दिया गया है ताकि भविष्य में किसी भी मृतक आश्रित की नियुक्ति में ऐसी अवैध 'अस्थायी सेवा' की शर्तें न जोड़ी जाएं। 

मुख्य निष्कर्ष-

यदि किसी व्यक्ति को मृतक आश्रित कोटे के तहत नौकरी मिलती है, तो वह सामान्य भर्ती की तरह संविदा या अस्थायी कर्मचारी नहीं होता। उसे पहले दिन से ही एक नियमित और स्थायी कर्मचारी माना जाता है और उसे बिना किसी ठोस विभागीय जांच के नौकरी से नहीं निकाला जा सकता। विभाग का काम केवल परिवार को उस समय वित्तीय संकट से उबारना और स्वीकृत खाली पद पर नियमित रोजगार देना होता है।

द्वारा 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट 

कैराना (शामली) 


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