भरण पोषण के लिए पत्नी पति की पेंशन नहीं रुकवा सकती - मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने अपने हालिया निर्णय (जिसमें पत्नी द्वारा पति की पेंशन रोकने की मांग को खारिज किया गया था) में कहा
"हाईकोर्ट को निष्पादन अदालत या फैमिली कोर्ट नहीं बनाया जा सकता। यदि याचिकाकर्ता भरण-पोषण मामले में सफल हुई है तो आदेश के पालन के लिए उसे उचित कानूनी कार्यवाही शुरू करनी होगी। वह इस रिट याचिका के माध्यम से न तो आदेश का क्रियान्वयन करा सकती है और न ही पति-पत्नी के विवाद का निपटारा करवा सकती है।"
➡️ प्रमुख पक्ष और विवरण :
✒️ याचिकाकर्ता (पत्नी): राजम्मल (Rajammal)
✒️ प्रतिवादी 1 (पति): एन. तमिलमणि (N. Tamilmani)
✒️ प्रतिवादी 2: तमिलनाडु राज्य परिवहन निगम (Tamil Nadu State Transport Corporation
➡️ मामले से जुड़ी मुख्य बातें:विवाद:
पत्नी ने अदालत में याचिका दायर कर मांग की थी कि उसके पति के सेवानिवृत्ति लाभ (पेंशन और अन्य फंड) जारी करने पर रोक लगा दी जाए, क्योंकि पति ने अदालत द्वारा आदेशित भरण-पोषण (मेंटेनेंस) की राशि का भुगतान नहीं किया था।
➡️ अदालत का निर्णय:
जस्टिस मुम्मिनेनी सुधीर कुमार ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि हाईकोर्ट को 'फैमिली कोर्ट' या 'निष्पादन अदालत' (Execution Court) में नहीं बदला जा सकता।
➡️ कानूनी स्थिति:
मद्रास हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि पति भरण-पोषण का भुगतान नहीं कर रहा है, तो पत्नी को उस आदेश को लागू करवाने के लिए उसी निचली अदालत (Trial Court) में जाना चाहिए जिसने भरण-पोषण का आदेश पारित किया था।
➡️ अधिकार:
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि रिट याचिका के जरिए पति की पेंशन को ब्लॉक नहीं किया जा सकता, हालांकि पत्नी भरण-पोषण की वसूली के लिए उचित कानूनी प्रक्रिया का उपयोग करने के लिए स्वतंत्र है।
द्वारा
शालिनी कौशिक
एडवोकेट
कैराना (शामली)

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