उत्तर प्रदेश में वकीलों के लिए बन गए नये नियम

( कब और कैसे कर सकेंगे अब वकालत उत्तर प्रदेश में)

 बार कॉन्सिल ऑफ़ उत्तर प्रदेश द्वारा वकीलों के लिए अदालतों में दाखिल किए जाने वाले वकालतनामे पर अपनी पंजीकरण संख्या (Registration Number) और सी.ओ.पी. नंबर (Certificate of Practice Number) लिखना अनिवार्य कर दिया गया है, और आदेश की प्रति सभी जनपद न्यायाधीश, बार एसोसिएशनों को भी प्रेषित की गई है.

➡️ वकालत के लिए रजिस्ट्रेशन और सी ओ पी कोर्ट में अनिवार्य-

वकीलों में आपराधिक और फ़्रॉड किस्म के तत्वों की बढ़ती जा रही आवाजाही को देखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य विधिज्ञ परिषद रजिस्ट्रेशन और सी ओ पी की कोर्ट में अनिवार्यता को लेकर और भी गंभीर हो गई है. बार कौंसिल ऑफ़ उत्तर प्रदेश के सामने यह मुद्दा जोरो से सामने आ रहा है कि कई वकील अपने वकालतनामे पर इन दोनों महत्वपूर्ण जानकारियों को ही नहीं लिख रहे हैं, जबकि ऐसा करना कानूनी रूप से जरूरी है। इसलिए अब राज्य विधिज्ञ परिषद उत्तर प्रदेश ने वकालत नामों पर रजिस्ट्रेशन नम्बर और सी ओ पी नम्बर लिखना अनिवार्य करने का आदेश जारी किया है. आदेश का उद्देश्य अदालती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाना और यह सुनिश्चित करना है कि केवल पंजीकृत और अधिकृत वकील ही मामलों की पैरवी करें।

➡️ आदेश की अनिवार्यता का कारण-

यह नया नियम वकीलों की पहचान को स्पष्ट करने में मदद करेगा। पंजीकरण संख्या यह बताती है कि कोई व्यक्ति बार काउंसिल में एक वकील के रूप में पंजीकृत है, जबकि सी.ओ.पी. नंबर यह दर्शाता है कि उस वकील को कोर्ट में प्रैक्टिस करने का अधिकार है। इन नंबरों को वकालतनामे पर लिखने से फर्जी या अनाधिकृत लोगों को वकील बनकर केस लड़ने से रोका जा सकेगा।

➡️ रजिस्ट्रेशन और सी ओ पी नंबर न लिखे जाने का असर-

अब जिस वकील के वकालतनामे पर रजिस्ट्रेशन और सी ओ पी नम्बर नहीं लिखे जायेंगें, उसके वकालतनामे को स्वीकार नहीं किया जाएगा। जिसका मतलब यह होगा कि वह वकील उस केस में पैरवी नहीं कर पाएगा।

इसी के साथ माननीय चेयरमेन बार कौंसिल ऑफ़ उत्तर प्रदेश श्री शिव किशोर गौड़ एडवोकेट जी से प्राप्त जानकारी के अनुसार बार कौंसिल ऑफ़ उत्तर प्रदेश द्वारा COP नंबर जारी होने तक रजिस्टर्ड अधिवक्ताओं को सहायक या जूनियर अधिवक्ता के ही रूप में वकालत कार्य करना होगा.

➡️ संक्षेप में-

🌑 वकालतनामे पर COP और पंजीकरण नंबर लिखना अनिवार्य क्यूँ किया गया है-

1️⃣. अदालती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाना.

2️⃣ फर्जी या अनाधिकृत लोगों को वकील बनने से रोकने के लिए.

3️⃣. निजी तौर पर वकालत करने वाले वकीलों को पहचानने के लिए.

4️⃣. अदालत में प्रैक्टिस करने का अधिकार देने के लिए

     नये अधिवक्ताओ को COP नम्बर प्राप्त करने के लिए क्या करना होगा, यह जानने के लिए जुड़े रहिये कानूनी ज्ञान ब्लॉग और shalini kaushik law classes से

धन्यवाद 🙏🙏

द्वारा 

शालिनी कौशिक एडवोकेट 

विशेष प्रतिनिधि, शामली 

टिप्पणियाँ

  1. सही है जब रजिस्ट्रेशन नंबर और cop नंबर एडवोकेट के लिये जरूरी हैं तो वकालत नामे पर लिखे जाने ही चाहिए

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    1. सहमत, प्रतिक्रिया हेतु हार्दिक धन्यवाद 🙏🙏

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